Heart Attack: आपने कभी यह सुना है कि उसका दिल जल्दी बूढ़ा हो गया? जाहिर सी बात है कि आपने नहीं ही सुना होगा, तो अब सुन लीजिए। जी हां, पुरुषों का दिल महिलाओं की तुलना में जल्दी बूढ़ा होता है। इस बात को यहां से समझिए कि पुरुषों में जितना ज्यादा हार्ट अटैक आता है, क्या उतना महिलाओं में आता है? नहीं ना! तो सबसे बड़ा अंतर तो आप यहीं से समझ सकते हैं। अब इसके पीछे का विज्ञान जानते हैं।
अमेरिका में हुई एक नई वैज्ञानिक रिसर्च ने खुलासा किया है कि पुरुषों में हार्ट अटैक का खतरा 35 साल की उम्र के बाद बहुत तेजी से बढ़ता है। यह जोखिम महिलाओं की तुलना में लगभग 7 से 10 साल पहले ही शुरू हो जाता है। आइए जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है, क्या कहती है यह नई रिसर्च और इससे बचने के लिए क्या उपाय अपनाने चाहिए।
क्या कहती है नई रिसर्च?(Men vs Women Heart)
अमेरिका की नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी (Northwestern University) के रिसर्चर्स द्वारा की गई यह स्टडी बताती है कि वैज्ञानिकों ने करीब 5,112 लोगों की सेहत का 34 सालों तक लगातार अध्ययन किया। रिसर्च तब शुरू हुई जब इन लोगों की उम्र 18 से 30 साल के बीच थी, जिससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिली कि उम्र के साथ दिल की सेहत कैसे बदलती है।
पुरुषों में ही ज्यादा क्यों है खतरा?(Heart Attack Warning)
जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (Journal of the American Heart Association) में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, 35 साल की वह उम्र है जहां से पुरुषों और महिलाओं के बीच दिल की बीमारियों का अंतर साफ दिखने लगता है। पुरुषों में यह खतरा ज्यादा होने के प्रमुख कारण निम्न हैं-
- कोरोनरी हार्ट डिजीज (CHD)
- हार्मोनल अंतर
- पुरुषों का चेकअप में लापरवाही करना
- कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के लक्षण जल्दी दिखाई देना
पुरुष इस खतरे से कैसे बच सकते हैं?(Heart Health Over 35)
स्टडी की प्रमुख एपिडेमियोलॉजिस्ट अलेक्सा फ्रीमैन का कहना है कि अगर पुरुष समय रहते सतर्क हो जाएं, तो इस खतरे को कम किया जा सकता है।
- 30 से 35 की उम्र के बीच निरंतर स्क्रीनिंग करना।
- जंक फूड का सेवन नहीं करना।
- आहार में फाइबर युक्त पदार्थ शामिल करना।
- तनाव बिल्कुल न लें।
- शरीर में नींद की पूर्ति रखें।
- रोजाना कम से कम 30 मिनट तक व्यायाम करें।
डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


