बेंगलूरु-पुणे-मुंबई रेल कॉरिडोर की अनदेखी, कर्नाटक के साथ अन्याय

बेंगलूरु-पुणे-मुंबई रेल कॉरिडोर की अनदेखी, कर्नाटक के साथ अन्याय

पूरक बजट में घोषणा नहीं हुई तो जनजागरण आंदोलन

केंद्र पर राज्य के मंत्रियों-सांसदों की विफलता का आरोप

विजयपुर. बृहद एवं मध्यम उद्योग मंत्री एम.बी. पाटील ने कहा कि बेंगलूरु-पुणे-मुंबई हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा न कर केंद्र सरकार ने कर्नाटक और महाराष्ट्र के साथ गंभीर अन्याय किया है। यदि पूरक बजट में भी इस कॉरिडोर की घोषणा नहीं की गई, तो जनजागरण आंदोलन छेड़ा जाएगा।

शहर में सोमवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए पाटील ने कहा कि बेंगलूरु-हैदराबाद और बेंगलूरु-चेन्नई हाईस्पीड रेल परियोजनाएं स्वागतयोग्य हैं, लेकिन जिन मार्गों का कर्नाटक में 100 किमी से भी कम संचालन है, उनसे राज्य को कोई ठोस लाभ नहीं मिलेगा। इसके बजाय बेंगलूरु-पुणे-मुंबई रेल कॉरिडोर की आवश्यकता थी, जिससे आईटी सिटी बेंगलूरु और वाणिज्यिक राजधानी मुंबई के बीच सीधा संपर्क संभव होता।

क्षेत्रीय लाभ की संभावना

पाटील ने कहा कि इस परियोजना से मध्य और उत्तर कर्नाटक के साथ-साथ दक्षिण महाराष्ट्र को भी व्यापक लाभ होता। उन्होंने कर्नाटक और महाराष्ट्र के सांसदों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की।

भाजपा सांसदों पर आरोप

उन्होंने केंद्र सरकार में प्रभावशाली माने जाने वाले मंत्री प्रल्हाद जोशी और रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य के भाजपा सांसद कर्नाटक के हितों की रक्षा करने में विफल रहे हैं। विशेष रूप से विजयपुर जिले के सांसदों पर भी उन्होंने निष्क्रियता का आरोप लगाया।

पाटील ने कहा कि यह केवल बजट की विफलता नहीं, बल्कि संघीय ढांचे की आत्मा पर प्रहार है। भद्रा ऊपरी योजना की घोषित राशि 5,600 करोड़ रुपए (अभी जारी नहीं), कर्नाटक में प्रस्तावित हाईस्पीड मार्ग 100 किमी से कम, प्रभावित क्षेत्र मध्य व उत्तर कर्नाटक, दक्षिण महाराष्ट्र।

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