Gold and Silver Prices: सोना-चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट जारी, क्या और गिरेंगे भाव

Gold and Silver Prices: सोना-चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट जारी, क्या और गिरेंगे भाव

Gold and Silver Prices: सोमवार (2 फरवरी) को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट देखने को मिली। सोना और चांदी दोनों ही कई महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 9% गिरकर दो हफ्ते से ज्यादा के निचले स्तर पर आ गया, जबकि चांदी में 13% से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई। गौरतलब है कि पिछले हफ्ते ही दोनों धातुओं ने रिकॉर्ड स्तर छुए थे।

सेंट्रल बैंकों के सख्त संकेत बने वजह

बता दें कि इस तेज गिरावट की बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वैश्विक केंद्रीय बैंकों (Global Central Banks) के ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख को माना जा रहा है। ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने के संकेतों से सोना-चांदी जैसे नॉन-इंटरेस्ट एसेट्स की मांग कमजोर हुई है।

भारत में भी दिखा असर

भारत में भी इस वैश्विक गिरावट का सीधा असर देखने को मिला। MCX पर सोने की कीमतों में भारी इंट्रा-डे गिरावट देखी गई। हाल ही में आयात शुल्क (Import Duty) में कटौती के बाद दबाव और बढ़ गया। बता दें कि दिल्ली में 24 कैरेट सोना करीब 13,410 रुपये प्रति 10 ग्राम गिरकर लगभग 1,47,320 रुपये पर पहुंच गया। 

इसके अलावा चांदी की कीमत में भी करीब 50,000 रुपये प्रति किलो की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। लंदन और न्यूयॉर्क सेशन की तेज बिकवाली का असर भी घरेलू बाजारों में भी साफ दिखा।

ज्वैलरी बाजार में बढ़ी खरीदारी

दरअसल, कीमतों में गिरावट के बाद रिटेल ग्राहकों की खरीदारी बढ़ी है। लोग सस्ते भाव पर सोना-चांदी खरीदने पहुंच रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ निवेशक वर्ग अब भी सतर्क नजर आ रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर तकनीकी सपोर्ट लेवल टूटे, तो गिरावट और गहरी हो सकती है।

गिरावट के पीछे क्या कारण है?

1- अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख

अमेरिका के मजबूत रोजगार आंकड़ों से संकेत मिला है कि अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। इससे ब्याज दरों में जल्द कटौती की संभावना कम हो गई है। उच्च ब्याज दरों के दौर में सोना-चांदी जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट्स आकर्षण खो देते हैं।

2- बड़े निवेशकों की मुनाफावसूली 

2025 के अंत में आई तेज तेजी के बाद हेज फंड्स और बड़े निवेशकों ने भारी हिस्सेदारी बेच दी, जिससे वैश्विक बाजारों में “कैस्केड इफेक्ट” बना।

3- औद्योगिक मांग में कमजोरी से चांदी पर ज्यादा दबाव

चांदी का इस्तेमाल सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में होता है। बड़े देशों से आए कमजोर औद्योगिक विकास आंकड़ों ने चांदी की कीमतों पर ज्यादा दबाव डाला।

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