वो घोटाला जिसने खराब कर दी शेख हसीना की जिंदगी, देश छोड़ कर PM को भारत भागना पड़ा

वो घोटाला जिसने खराब कर दी शेख हसीना की जिंदगी, देश छोड़ कर PM को भारत भागना पड़ा

Purvachal Plot Scandal: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (Sheikh Hasina Jail) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अपनी जान बचा कर भारत भागने के लिए मजबूर हुईं शेख हसीना को अब अपने ही देश की अदालत ने करारा झटका दिया है। ढाका की एक विशेष अदालत (Dhaka Court Verdict)ने बहुचर्चित ‘पूर्वाचल प्लॉट आवंटन घोटाले’ (Purvachal Plot Scandal) में उन्हें दोषी करार देते हुए 10 साल कैद की सजा सुनाई है। कभी बांग्लादेश की ‘आयरन लेडी’ कही जाने वालीं शेख हसीना के लिए यह फैसला उनके सियासी करियर के ताबूत में आखिरी कील माना जा रहा है। यह वही घोटाला है जिसने जनता के बीच उनकी छवि को धूमिल किया और विपक्ष को उनके खिलाफ (Bangladesh Political Crisis) एक मजबूत हथियार दे दिया।

क्या है पूर्वांचल प्लॉट घोटाला ?

आसान भाषा में समझें तो यह मामला सत्ता के दुरुपयोग और सरकारी जमीन की बंदरबांट का मामला है। आरोप है कि अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान शेख हसीना ने नियमों को ताक पर रख कर ‘पूर्वांचल न्यू टाउन प्रोजेक्ट’ में बेशकीमती प्लॉट अपने रिश्तेदारों, पार्टी के चहेते नेताओं और रसूखदार लोगों को कौड़ियों के दाम आवंटित कर दिए थे।

जिन लोगों को जमीन दी गई, वे इसके पात्र ही नहीं थे

कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, इस घोटाले से सरकारी खजाने को करोड़ों टका (बांग्लादेशी मुद्रा) का नुकसान हुआ। जांच एजेंसियों ने पाया कि जिन लोगों को जमीन दी गई, वे इसके पात्र ही नहीं थे। अदालत ने माना कि यह न केवल भ्रष्टाचार है, बल्कि प्रधानमंत्री पद की शपथ का सीधा उल्लंघन भी है।

दरअसल फरारी में मिली सजा

गौरतलब है कि अगस्त 2024 में हुए भारी जन-विद्रोह के बाद शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़कर रातों-रात सैन्य विमान से भारत भागना पड़ा था। तब से वह भारत में ही निर्वासित जीवन जी रही हैं। ढाका की अदालत ने यह फैसला उनकी अनुपस्थिति (In Absentia) में सुनाया है। कोर्ट ने उन्हें ‘भगोड़ा’ मानते हुए सजा का ऐलान किया है।

15 साल का शासन और अंत में जेल

शेख हसीना ने लगातार 15 साल तक बांग्लादेश पर राज किया। इस दौरान उन्होंने देश के विकास के कई दावे किए, लेकिन पूर्वाचल जैसे घोटालों ने अंदर ही अंदर उनकी जड़ें खोखली कर दी थीं। आज स्थिति यह है कि जिस देश को उन्होंने बनाने का दावा किया, उसी देश की अदालत ने उन्हें अपराधी घोषित कर दिया है।

बांग्लादेश में जश्न और गुस्सा

इस फैसले पर मिली-जुली लेकिन तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं:

बीएनपी (विपक्षी दल): खालिदा जिया की पार्टी और अन्य विपक्षी नेताओं ने फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि “देर से ही सही, लेकिन इंसाफ हुआ। सत्ता के नशे में चूर शासकों के लिए यह एक सबक है।”

आम जनता: ढाका की सड़कों पर कई लोगों ने इसे ‘जनता की जीत’ बताया। सोशल मीडिया पर #JusticeServed ट्रेंड कर रहा है।

आवामी लीग समर्थक: शेख हसीना के बचे-खुचे समर्थकों ने इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ (Political Vendetta) करार दिया है। उनका कहना है कि नई सरकार कोर्ट का इस्तेमाल कर के विपक्ष को खत्म करना चाहती है।

क्या भारत से वापस लाई जाएंगी हसीना ?

इस फैसले के बाद कानूनी और कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है:

प्रत्यर्पण की मांग: बांग्लादेश की मौजूदा सरकार अब भारत पर आधिकारिक दबाव बना सकती है कि ‘सजायाफ्ता अपराधी’ शेख हसीना को वापस सौंपा जाए। दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि है, लेकिन राजनीतिक मामलों में पेंच फंस सकता है।

इंटरपोल नोटिस: संभावना है कि बांग्लादेश सरकार शेख हसीना के खिलाफ इंटरपोल का ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ जारी करने की अपील करे, ताकि उनकी अंतरराष्ट्रीय आवाजाही पूरी तरह बंद हो जाए।

संपत्ति जब्त: कोर्ट के आदेश के बाद बांग्लादेश में मौजूद शेख हसीना की निजी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है।

भारत के लिए कूटनीतिक सिरदर्द

यह खबर भारत सरकार के लिए भी एक बड़ी दुविधा लेकर आई है।

दोस्त बनाम कानून: शेख हसीना भारत की पुरानी दोस्त रही हैं और भारत ने उन्हें सुरक्षा दी है। लेकिन अब जब वह एक ‘दोषी अपराधी’ घोषित हो चुकी हैं, तो उन्हें शरण दिए रखना भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि और नई बांग्लादेश सरकार के साथ रिश्तों पर असर डाल सकता है।

नैतिक संकट: भारत हमेशा से लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करता है। ऐसे में पड़ोसी देश की कोर्ट द्वारा सजा पाए पूर्व पीएम को बचाना, नई दिल्ली के लिए कूटनीतिक रूप से गले की हड्डी बन सकता है।

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