Dalai Lama Grammy Award 2026: दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संगीत पुरस्कार ‘ग्रैमी’ (Grammy Awards 2026) के 68वें समारोह में एक ऐतिहासिक पल तब आया, जब तिब्बती बौद्ध धर्म के सर्वोच्च गुरु दलाई लामा के नाम का एलान हुआ। 14वें दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो ने ऑडियो बुक, नैरेटर और स्टोरीटेलिंग रिकॉर्डिंग कैटेगरी में अपना पहला ग्रैमी अवॉर्ड जीतकर दुनिया को हैरान कर दिया है। उन्होंने इस मुकाबले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस केतनजी ब्राउन जैक्सन को पीछे छोड़ते हुए यह अवॉर्ड अपने नाम किया।
Dalai Lama Grammy Award 2026: ग्रैमी अवार्ड्स क्या हैं?
संगीत की दुनिया में ग्रैमी अवॉर्ड (जिसे लोग GRAMMYs भी कहते हैं) संगीत की दुनिया का सबसे बड़ा और मशहूर इनाम है। इसे अमेरिका की रिकॉर्डिंग अकादमी उन कलाकारों को देती है जो, संगीत में कुछ कमाल का काम करते हैं। इंटरनेशनल लेवल पर इसे संगीत का सबसे बड़ा और खास पुरस्कार माना जाता है। इस पुरस्कार को जीतना किसी भी कलाकार के लिए सबसे बड़े सपने के सच होने जैसा होता है। शुरुआत में इसे ग्रामोफोन अवॉर्ड कहा जाता था। ऐसा इसलिए क्योंकि जीतने वाले को जो ट्रॉफी मिलती है, उस पर सोने की पॉलिश वाला एक छोटा सा ग्रामोफोन बना होता है।
Dalai Lama Education and Degree: इस उम्र में हासिल की ‘पीएचडी’
दलाई लामा की पढ़ाई-लिखाई किसी आधुनिक स्कूल या यूनिवर्सिटी में नहीं हुई है। उनकी पढ़ाई का केंद्र तिब्बत के ल्हासा में मौजुद पोटाला पैलेस और द्रेपुंग मोनेस्ट्री रहा है। 6 साल की उम्र से उनकी पारंपरिक बौद्ध शिक्षा शुरू हुई थी। इसके साथ ही दलाई लामा ने महज 25 साल की उम्र में बौद्ध धर्म की सर्वोच्च उपाधि ‘गेशे ल्हारम्पा’ हासिल कर ली थी। इस उपाधि को तिब्बती बौद्ध धर्म में पीएचडी के बराबर माना जाता है। उनके पाठ्यक्रम में पांच मुख्य विषय शामिल थे:
- प्रमाण (Epistemology and Logic)
- मध्यमक (Middle Way Philosophy)
- अभिधर्म (Metaphysics)
- विनय (Monastic Discipline)
- प्रज्ञापारमिता (Perfection of Wisdom)
14th Dalai Lama Biography: क्या होता है ‘दलाई लामा’ का अर्थ?
‘दलाई लामा’ एक मंगोलियाई शब्द है, जिसका अर्थ होता है ज्ञान का महासागर। तिब्बती मान्यताओं के मुताबिक, वे करुणा के बोधिसत्व के अवतार माने जाते हैं। मान्यता है कि, दलाई लामा मानवता की सेवा के लिए अपने मोक्ष को टाल देते हैं। वर्तमान दलाई लामा का जन्म 6 जुलाई, 1935 को तिब्बत के ताक्सर गांव में हुआ था और महज दो साल की उम्र में उन्हें 13वें दलाई लामा का अवतार पहचान लिया गया था। आपको बता दें कि, उनकी विद्वत्ता और शांति के संदेश के कारण उन्हें साल 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
Dalai Lama Tibet to India Journey: भारत में रहने के पीछे ये है वजह
साल 1950 में जब चीन ने तिब्बत पर कब्जा किया, तब दलाई लामा की उम्र मात्र 15 साल थी। चीन के दमन चक्र और अत्याचार से बचने के लिए 17 मार्च,1959 को वे अपनी जान बचाकर छुपकर तिब्बत से निकले। हिमालय के दुर्गम और बर्फीले रास्तों को पार करते हुए 31 मार्च,1959 को वे भारत की सीमा में पहुंचे। तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें शरण दी। तब से वे भारत में ही रह रहे हैं, हालांकि वे ऑफिशियली भारत के नागरिक नहीं बल्कि एक प्रतिष्ठित शरणार्थी हैं। दलाई लामा अभी भी तिब्बती लोगों के सर्वोच्च आध्यात्मिक नेता हैं और भारत को अपना दूसरा घर मानते हैं।


