हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी आज फतेहाबाद जिले के प्रसिद्ध गांव पीलीमंदोरी पहुंचेंगे। वह देश-विदेश में अपनी गायकी से पहचान बनाने वाले शास्त्रीय गायक पंडित जसराज की जयंती के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में भाग लेंगे। यह कार्यक्रम गांव पीलीमंदोरी स्थित स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम में बॉलीवुड सिंगर सोनू निगम और सुप्रसिद्ध भजन गायक अनूप जलोटा के शामिल होने की संभावना है। वहीं पंडित जसराज की बेटी दुर्गा जसराज और बेटे सारंग देव के भी कार्यक्रम में पहुंचने की पुष्टि हुई है। सीएम नायब सैनी इस दौरान गांव पीलीमंदोरी स्थित मोतीराम लाइब्रेरी में पंडित जसराज की प्रतिमा का अनावरण भी करेंगे।
प्रदेशभर से जुटेगा मिरासी समाज
राज्य स्तरीय कार्यक्रम में हरियाणा भर से मिरासी समाज को आमंत्रित किया गया है। इसके साथ ही लोक कलाकारों को भी निमंत्रण भेजा गया है। मुख्यमंत्री लोक कलाकारों के साथ चाय पर संवाद करेंगे और कला-संस्कृति से जुड़े विषयों पर चर्चा करेंगे।
22 साल बाद गांव में आएंगे प्रदेश के मुखिया
गांव पीलीमंदोरी के सरपंच धर्मवीर गोरछिया ने बताया कि करीब 22 वर्षों बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री गांव में आ रहे हैं। इस अवसर पर पंचायत की ओर से गांव की विभिन्न समस्याओं और विकास कार्यों को लेकर मांग पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा। पंचायत को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री गांव के विकास से जुड़ी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए घोषणाएं करेंगे। जानिए… कौन थे पंडित जसराज मेवाती घराने से जुड़े हुए थे पिता पंडित जसराज के पिता मोतीराम मेवाती घराने से जुड़े हुए थे। वह हैदराबाद के निजाम के गवैये थे। इसके चलते उनका परिवार हैदराबाद शिफ्ट हो गया। उस समय पंडित जसराज की उम्र मात्र 7 साल की ही थी। पंडित जसराज ने भी मेवात घराने को आगे बढ़ाया। पिता से ही मिली संगीत शिक्षा पंडित जसराज को उनके पिता मोतीराम ने मुखर संगीत में दीक्षा दी और बाद में उनके बड़े भाई पंडित प्रताप नारायण ने उन्हें तबला सिखाया। वह अपने सबसे बड़े भाई पंडित मनीराम के साथ अपने एकल गायन प्रदर्शन में अक्सर शामिल होते थे। 14 साल की उम्र में बने गायक पंडित जसराज ने 14 साल की उम्र में एक गायक के रूप में प्रशिक्षण शुरू किया, इससे पहले तक वे तबला वादक ही थे। उन्होंने 22 साल की उम्र में गायक के रूप में अपना पहला स्टेज कॉन्सर्ट किया। पद्मश्री और पदम विभूषण सम्मान मिला पंडित जसराज को साल 2000 में शास्त्रीय संगीत गायन में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया। इससे पहले 1975 में उन्हें पद्मश्री सम्मान मिला।


