चार दिनों तक चले ज्ञान, तकनीक, फिटनेस और सांस्कृतिक आयोजनों के बाद USICON-2026 का अंतिम दिन एक प्रेरक यादगार इवेंट बन गया। जहां पहले तीन दिन वैज्ञानिक सत्रों, लाइव सर्जरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर केंद्रित रहे, वहीं चौथा और अंतिम दिन पूरी तरह समाज, सेवा और स्वस्थ जीवनशैली को समर्पित नजर आया।
सुबह ठंडी हवा में सैकड़ों डॉक्टर, डेलीगेट्स और शहरवासी जब एक साथ मैराथन ट्रैक पर उतरे। यह आयोजन केवल दौड़ नहीं बल्कि स्वास्थ्य और अंगदान का सशक्त संदेश बन गया। ‘Pass the Baton of Life’ थीम पर आयोजित इस विशेष रन में देश-विदेश से आए यूरोलॉजिस्ट्स, युवा रेजिडेंट्स, मेडिकल स्टूडेंट्स और स्थानीय नागरिकों ने कंधे से कंधा मिलाकर भाग लिया। कई डॉक्टरों ने कहा कि ऑपरेशन थिएटर में जिंदगी बचाने वाले हाथ आज सड़कों पर दौड़कर लोगों को फिटनेस और अंगदान का महत्व समझा रहे हैं।
सफेद कोट की जगह टी-शर्ट और रनिंग शूज में नजर आए विशेषज्ञों ने यह संदेश दिया कि फिटनेस ही असली दवा है और एक व्यक्ति का अंगदान कई जिंदगियां बचा सकता है। अंतिम दिन भी चले सेशन्स
अंतिम दिन भी विभिन्न केंद्रों पर यूरोपियन बोर्ड एग्जाम और विशेषज्ञता मूल्यांकन सेशन आयोजित किए गए, जहां युवा डॉक्टरों ने अपनी स्किल्स और ज्ञान की परीक्षा दी। सीनियर फैकल्टीज ने उन्हें मार्गदर्शन देते हुए भविष्य की चिकित्सा चुनौतियों के लिए तैयार रहने की सलाह दी। इंदौर बना वैश्विक मेडिकल मैप का अहम केंद्र
चार दिनों तक चले इस इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में 2 हजार से अधिक डेलीगेट्स, 70 से ज्यादा इंटरनेशनल फैकल्टीज और सैकड़ों वैज्ञानिक प्नेजेंटेशन ने इंदौर को वैश्विक मेडिकल मैप पर मजबूती से स्थापित किया। रोबोटिक सर्जरी, लेजर तकनीक, लाइव ऑपरेशन, AI आधारित ट्रीटमेंट और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग ने डॉक्टरों को नई दिशा दी। ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. सुशील भाटिया ने कहा कि USICON का समापन समाज के लिए संदेश के साथ करना ही उद्देश्य था। चेयरमैन डॉ. संजय शिंदे ने कहा कि यह चार दिन केवल मेडिकल चर्चा नहीं, बल्कि जीवनशैली सुधार का अभियान था। ट्रेज़रर डॉ. नितीश पाटीदार ने इंदौर की मेजबानी, इंफ्रास्ट्रक्चर और अनुशासन को लेकर कहा कि शहर आने वाले समय में मेडिकल टूरिज्म और हेल्थ एजुकेशन का बड़ा केंद्र बनेगा। सेक्रेटरी डॉ. रवि नागर और को-ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. श्याम अग्रवाल ने कहा कि कॉन्फ्रेंस से सीखी गई आधुनिक तकनीकें अब छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर इलाज पहुंचाने में सहायक होंगी।


