बेगूसराय में गन्ना किसानों की महापंचायत:प्रति क्विंटल 100 रुपया बोनस की मांग; कहा- 21 फरवरी को मंत्री का पुतला जलाएंगे

बेगूसराय में गन्ना किसानों की महापंचायत:प्रति क्विंटल 100 रुपया बोनस की मांग; कहा- 21 फरवरी को मंत्री का पुतला जलाएंगे

गन्ना उत्पादक किसानों को प्रति क्विंटल 100 रुपया बोनस देने सहित अन्य मांगों को लेकर आज बेगूसराय के गढ़पुरा प्रखंड के मालीपुर में बिहार राज्य गन्ना किसान मोर्चा के बैनर तले किसान महापंचायत का आयोजन किया गया। महापंचायत में उपस्थित किसानों ने निर्णय लिया है कि बोनस की घोषणा नहीं करने पर 21 फरवरी को गन्ना मंत्री का पुतला दहन किया जाएगा। मालीपुर दुर्गा स्थान परिसर में आयोजित किसान महापंचायत की अध्यक्षता कोरैय पैक्स अध्यक्ष चंदन कुमार और मंच संचालन धर्मेन्द्र प्रसाद सिंह ने की। मौके पर वक्ताओं ने कहा कि गन्ना किसानों में भरोसा, सुविधा और लाभ देने में सरकार पूरी तरह से विफल रही है। 34 नये चीनी मिल के लिए 8 लाख हेक्टे में गन्ना खेती सरकार के समक्ष एक बड़ी चुनौती है। महापंचायत को संबोधित करते हुए बिहार राज्य गन्ना किसान मोर्चा के अध्यक्ष अशोक प्रसाद सिंह ने कहा कि 25 नई और 9 पुराने चीनी मिलों को चालू करने की सरकारी घोषणा से किसानों के बीच खुशी की लहर दौड़ी। लेकिन इसके लिए बिहार में कम से कम 8 लाख हेक्टेयर में गन्ना की खेती आज एक बड़ी चुनौती है। अभी बिहार में 2.37 लाख हेक्टेयर में ही गन्ना की खेती हो रही है। बिहार के गन्ना किसान सबसे ज्यादा शोषित चीनी मिल के साथ एथनॉल, बिजली, खाद, शीरा, कागज, कूट, अल्कोहल और जलावन आदि का कारखाना खुलेंगे। लेकिन विडंबना यह है कि बिहार के गन्ना किसान सबसे ज्यादा शोषित और अपेक्षित हैं। देश-विदेश में सबसे कम गन्ना का मूल्य बिहार में है। गन्ना उत्पादकों के बीच सरकार के प्रति काफी आक्रोश है। मिल मालिकों के सामने सरकार ने घुटना टेक दिया है। सरकार अगर चीनी उद्योग को सचमुच में विकसित करना चाहती है तो गन्ना उत्पादकों की समस्याओं पर गंभीरतापूर्वक विचार करना होगा। लेकिन किसान प्रतिनिधियों से मिलने के बजाए मंत्री दिन भर मिल मालिकों से घिरे रहते हैं। किसानों के मनोबल को उठाने, भरोसा और विश्वास पैदा करने के लिए उनके मांगों की पूर्ति करें। किसानों में सरकार के प्रति भरोसा पैदा नहीं हुआ, तो सरकारी निर्णय ख्याली पुलाव बनकर रह जाएंगे। अन्य फसलों की ओर भाग रहे किसान नये चीनी मिल खोलने की बात तो दूर रही, चालू चीनी मिले भी बंद हो जाएंगे, गन्ने की खेती सिकुड़ता जा रहा है। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार को अविलंब उचित कदम उठाना होगा। सरकारी उपेक्षा और मिल प्रबंधन की मनमानी के चलते धीरे-धीरे किसान गन्ना की खेती छोड़कर अन्य फसलों की ओर भाग रहे है। 1904 से लेकर 1940 के बीच बिहार में 33 चीनी मिले खुली। गन्ना उत्पादक किसानों को प्रति क्विंटल 100 रुपया बोनस देने सहित अन्य मांगों को लेकर आज बेगूसराय के गढ़पुरा प्रखंड के मालीपुर में बिहार राज्य गन्ना किसान मोर्चा के बैनर तले किसान महापंचायत का आयोजन किया गया। महापंचायत में उपस्थित किसानों ने निर्णय लिया है कि बोनस की घोषणा नहीं करने पर 21 फरवरी को गन्ना मंत्री का पुतला दहन किया जाएगा। मालीपुर दुर्गा स्थान परिसर में आयोजित किसान महापंचायत की अध्यक्षता कोरैय पैक्स अध्यक्ष चंदन कुमार और मंच संचालन धर्मेन्द्र प्रसाद सिंह ने की। मौके पर वक्ताओं ने कहा कि गन्ना किसानों में भरोसा, सुविधा और लाभ देने में सरकार पूरी तरह से विफल रही है। 34 नये चीनी मिल के लिए 8 लाख हेक्टे में गन्ना खेती सरकार के समक्ष एक बड़ी चुनौती है। महापंचायत को संबोधित करते हुए बिहार राज्य गन्ना किसान मोर्चा के अध्यक्ष अशोक प्रसाद सिंह ने कहा कि 25 नई और 9 पुराने चीनी मिलों को चालू करने की सरकारी घोषणा से किसानों के बीच खुशी की लहर दौड़ी। लेकिन इसके लिए बिहार में कम से कम 8 लाख हेक्टेयर में गन्ना की खेती आज एक बड़ी चुनौती है। अभी बिहार में 2.37 लाख हेक्टेयर में ही गन्ना की खेती हो रही है। बिहार के गन्ना किसान सबसे ज्यादा शोषित चीनी मिल के साथ एथनॉल, बिजली, खाद, शीरा, कागज, कूट, अल्कोहल और जलावन आदि का कारखाना खुलेंगे। लेकिन विडंबना यह है कि बिहार के गन्ना किसान सबसे ज्यादा शोषित और अपेक्षित हैं। देश-विदेश में सबसे कम गन्ना का मूल्य बिहार में है। गन्ना उत्पादकों के बीच सरकार के प्रति काफी आक्रोश है। मिल मालिकों के सामने सरकार ने घुटना टेक दिया है। सरकार अगर चीनी उद्योग को सचमुच में विकसित करना चाहती है तो गन्ना उत्पादकों की समस्याओं पर गंभीरतापूर्वक विचार करना होगा। लेकिन किसान प्रतिनिधियों से मिलने के बजाए मंत्री दिन भर मिल मालिकों से घिरे रहते हैं। किसानों के मनोबल को उठाने, भरोसा और विश्वास पैदा करने के लिए उनके मांगों की पूर्ति करें। किसानों में सरकार के प्रति भरोसा पैदा नहीं हुआ, तो सरकारी निर्णय ख्याली पुलाव बनकर रह जाएंगे। अन्य फसलों की ओर भाग रहे किसान नये चीनी मिल खोलने की बात तो दूर रही, चालू चीनी मिले भी बंद हो जाएंगे, गन्ने की खेती सिकुड़ता जा रहा है। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार को अविलंब उचित कदम उठाना होगा। सरकारी उपेक्षा और मिल प्रबंधन की मनमानी के चलते धीरे-धीरे किसान गन्ना की खेती छोड़कर अन्य फसलों की ओर भाग रहे है। 1904 से लेकर 1940 के बीच बिहार में 33 चीनी मिले खुली।  

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