औरंगाबाद में पांच किशोरियों के जहर खाकर सामूहिक आत्महत्या के प्रयास और उसमें चार किशोरियों की मौत की चर्चा है। एक ही गांव की चार नाबालिग किशोरियों की संदिग्ध मौत की खबर है। हालांकि अब तक पुलिस इस मामले में किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। पुलिस न तो इस घटना की स्पष्ट पुष्टि की है और न ही पूरी तरह इनकार कर पा रही है। मामला हसपुरा थाना क्षेत्र के अमझर शरीफ पंचायत अंतर्गत मोती बिगहा गांव के महादलित परिवारों से जुड़ा हुआ है। राजबंशी टोले की पांच किशोरियां, जिनकी उम्र 13 से 16 साल के बीच बताई जा रही है, आपस में पक्की सहेलियां थीं। गुरुवार की सुबह करीब आठ बजे सभी किशोरियां गांव से बाहर बधार स्थित खेतों में गईं, जहां कथित तौर पर उन्होंने एक साथ जहरीला पदार्थ खा लिया। जहर खाने वाली पांचवीं किशोरी की हालत गंभीर गांव में चर्चा है कि जहर खाने के बाद चार किशोरियों की हालत तेजी से बिगड़ने लगी, जबकि पांचवीं किशोरी पर जहर का असर कम हुआ है। घबराई हुई पांचवीं किशोरी किसी तरह घर पहुंची और परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। परिजनों ने आनन-फानन में गांव वालों को सूचना दी। ग्रामीण जब बधार पहुंचे, तो देखा कि चार किशोरियां गेहूं के खेतों में अलग-अलग स्थानों पर पड़ी हुई थीं। ग्रामीणों ने उन्हें उठा कर गांव लाया। चर्चा है कि जीवित बची किशोरी का इलाज अज्ञात स्थान पर कराया गया, जबकि चार किशोरियों की मौत के बाद ग्रामीणों ने शाम होने का इंतजार किया और फिर चारों शवों का एक ही चिता पर गांव के श्मशान घाट में जला कर अंतिम संस्कार कर दिया। हालांकि यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है कि चारों किशोरियों की मौत बधार में ही हो गई थी या गांव लाने के बाद उनकी जान गई। पुलिस गांव पहुंची, किसी ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया शुक्रवार को जब इस घटना की चर्चा इलाके में आग की तरह फैलने लगी तो लोगों में दहशत का माहौल बन गया। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि गांव के लोग इस संबंध में कुछ भी बोलने से परहेज करते नजर आए। इसी बीच घटना की सूचना हसपुरा थाना पुलिस तक भी पहुंची। हसपुरा थाना अध्यक्ष दिनेश कुमार ने बताया कि सूचना के सत्यापन के लिए गांव में चौकीदार को भेजा गया था, लेकिन ग्रामीणों ने ऐसी किसी भी घटना से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद मामला और भी संदेहास्पद हो गया। घटना के दो दिन बीतने के बाद हरकत में आई पुलिस घटना के दो दिन बीत जाने के बावजूद जब चर्चाएं थमने का नाम नहीं ले रही थीं, तो पुलिस के वरीय अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया। आज दाउदनगर एसडीपीओ अशोक कुमार दास और सर्कल इंस्पेक्टर सुनील कुमार स्थानीय पुलिस बल के साथ मोती बिगहा गांव पहुंचे और जांच शुरू की। पुलिस के गांव पहुंचते ही अजीब स्थिति देखने को मिली। गांव के अधिकांश पुरुष घरों से गायब मिले और कई घरों के दरवाजे बंद पाए गए। पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ था। जो ग्रामीण मिले, उन्होंने घटना से पूरी तरह अनभिज्ञता जाहिर की। पुलिस अब तक यह पता नहीं लगा सकी है कि मृत किशोरियां किसकी बेटियां थीं, आत्महत्या का कारण क्या था, शवों का अंतिम संस्कार किसने कराया और जीवित बची किशोरी फिलहाल कहां है। इन तमाम सवालों के जवाब पुलिस के पास नहीं हैं। दाउदनगर एसडीपीओ अशोक कुमार दास ने बताया कि उन्हें इस तरह की सूचना मिली है और पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जैसे ही किसी ठोस तथ्य की पुष्टि होगी, मीडिया को अवगत कराया जाएगा। औरंगाबाद में पांच किशोरियों के जहर खाकर सामूहिक आत्महत्या के प्रयास और उसमें चार किशोरियों की मौत की चर्चा है। एक ही गांव की चार नाबालिग किशोरियों की संदिग्ध मौत की खबर है। हालांकि अब तक पुलिस इस मामले में किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। पुलिस न तो इस घटना की स्पष्ट पुष्टि की है और न ही पूरी तरह इनकार कर पा रही है। मामला हसपुरा थाना क्षेत्र के अमझर शरीफ पंचायत अंतर्गत मोती बिगहा गांव के महादलित परिवारों से जुड़ा हुआ है। राजबंशी टोले की पांच किशोरियां, जिनकी उम्र 13 से 16 साल के बीच बताई जा रही है, आपस में पक्की सहेलियां थीं। गुरुवार की सुबह करीब आठ बजे सभी किशोरियां गांव से बाहर बधार स्थित खेतों में गईं, जहां कथित तौर पर उन्होंने एक साथ जहरीला पदार्थ खा लिया। जहर खाने वाली पांचवीं किशोरी की हालत गंभीर गांव में चर्चा है कि जहर खाने के बाद चार किशोरियों की हालत तेजी से बिगड़ने लगी, जबकि पांचवीं किशोरी पर जहर का असर कम हुआ है। घबराई हुई पांचवीं किशोरी किसी तरह घर पहुंची और परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। परिजनों ने आनन-फानन में गांव वालों को सूचना दी। ग्रामीण जब बधार पहुंचे, तो देखा कि चार किशोरियां गेहूं के खेतों में अलग-अलग स्थानों पर पड़ी हुई थीं। ग्रामीणों ने उन्हें उठा कर गांव लाया। चर्चा है कि जीवित बची किशोरी का इलाज अज्ञात स्थान पर कराया गया, जबकि चार किशोरियों की मौत के बाद ग्रामीणों ने शाम होने का इंतजार किया और फिर चारों शवों का एक ही चिता पर गांव के श्मशान घाट में जला कर अंतिम संस्कार कर दिया। हालांकि यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है कि चारों किशोरियों की मौत बधार में ही हो गई थी या गांव लाने के बाद उनकी जान गई। पुलिस गांव पहुंची, किसी ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया शुक्रवार को जब इस घटना की चर्चा इलाके में आग की तरह फैलने लगी तो लोगों में दहशत का माहौल बन गया। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि गांव के लोग इस संबंध में कुछ भी बोलने से परहेज करते नजर आए। इसी बीच घटना की सूचना हसपुरा थाना पुलिस तक भी पहुंची। हसपुरा थाना अध्यक्ष दिनेश कुमार ने बताया कि सूचना के सत्यापन के लिए गांव में चौकीदार को भेजा गया था, लेकिन ग्रामीणों ने ऐसी किसी भी घटना से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद मामला और भी संदेहास्पद हो गया। घटना के दो दिन बीतने के बाद हरकत में आई पुलिस घटना के दो दिन बीत जाने के बावजूद जब चर्चाएं थमने का नाम नहीं ले रही थीं, तो पुलिस के वरीय अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया। आज दाउदनगर एसडीपीओ अशोक कुमार दास और सर्कल इंस्पेक्टर सुनील कुमार स्थानीय पुलिस बल के साथ मोती बिगहा गांव पहुंचे और जांच शुरू की। पुलिस के गांव पहुंचते ही अजीब स्थिति देखने को मिली। गांव के अधिकांश पुरुष घरों से गायब मिले और कई घरों के दरवाजे बंद पाए गए। पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ था। जो ग्रामीण मिले, उन्होंने घटना से पूरी तरह अनभिज्ञता जाहिर की। पुलिस अब तक यह पता नहीं लगा सकी है कि मृत किशोरियां किसकी बेटियां थीं, आत्महत्या का कारण क्या था, शवों का अंतिम संस्कार किसने कराया और जीवित बची किशोरी फिलहाल कहां है। इन तमाम सवालों के जवाब पुलिस के पास नहीं हैं। दाउदनगर एसडीपीओ अशोक कुमार दास ने बताया कि उन्हें इस तरह की सूचना मिली है और पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जैसे ही किसी ठोस तथ्य की पुष्टि होगी, मीडिया को अवगत कराया जाएगा।


