बिहार का रहस्यमयी अपहरण केस: न पीड़िता मिली, न गुनहगार, 13 साल बाद भी अनसुलझा रहस्य

बिहार का रहस्यमयी अपहरण केस: न पीड़िता मिली, न गुनहगार, 13 साल बाद भी अनसुलझा रहस्य

पटना के शंभू गर्ल्स हास्टल में रह कर NEET की तैयारी कर रही बच्ची की मौत की जांच अब सीबीआई करेगी। वही सीबीआई करेगी जिसने बिहार के चर्चित बॉबी (श्वेतनिशा त्रिवेदी) से लेकर नवरुणा और शिल्पी हत्याकांड की गुत्थी आज तक नहीं सुलझा पायी। ऐसे में NEET छात्रा के परिजनों की इस आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता कि इस घटना को सरकार रफा- दफा करने में लगी है।

जांच पर क्यों भरोसा नहीं है?

NEET की तैयारी कर रही बच्ची की मौत ने बिहार पुलिस की हकीकत बयां कर दी है। 5 जनवरी 2026 को छात्रा के घर से हॉस्टल पहुंचने के बाद वह कैसे बीमार हुई, किन-किन अस्पतालों में इलाज हुआ, हॉस्टल वाले और लोकल थाने की भूमिका क्या रही; इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए SIT का गठन किया गया। बाद में CID की भी एंट्री हुई। लेकिन शुक्रवार को डीजीपी ने पैरेंट्स को बुलाकर कहा कि आपकी बच्ची की मौत की वजह आत्महत्या है। परिजनों का कहना है कि जब डीजीपी साहेब को भी यही कहना था तो चित्रगुप्त नगर थाना प्रभारी रोशनी कुमारी भी तो बिना जांच के यही कह रही थी।

परिजनों का आरोप

परिजनों का आरोप है कि पहले चित्रगुप्त नगर थाना की पुलिस और फिर बाद में व्यवस्थित तरीके से एसआईटी और सीआईडी ने सारे साक्ष्य को नष्ट कर दिए हैं। पीड़ित परिवार का कहना था कि डीजीपी से मुलाकात के दौरान उनका व्यवहार बेहद अपमानजनक और धमकी भरा था। परिजनों ने कहा कि डीजीपी ने उन्हें डराने का भी प्रयास किए। उन्होंने कहा कि अगर केस सीबीआई को सौंप दिया गया, तो एजेंसी उन्हें दो साल तक दौड़ाती रहेगी। यही वजह है कि सरकार की ओर से प्रस्तावित सीबीआई जांच पर उनको भरोसा नहीं है।

13 साल बाद भी अनसुलझा केस

 यह घटना 18-19 सिंतंबर 2012 की है। बिहार के मुजफ्परपुर में रहने वाले एक बंगाली परिवार की 13-14 वर्षीय बेटी नवरुणा चक्रवर्ती का अपराधियों ने अपहरण के बाद हत्या कर दी। बिहार पुलिस की असफलता के बाद सरकार ने पूरे मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया। लेकिन, सीबीआई ने 2020 में इस मामले को बंद कर दिया। उसका कहना था कि दोषियों के खिलाफ उसे सबूत ही नहीं मिले, इसलिए यह केस बंद कर दिए। स्कूली छात्रा नवरुणा चक्रवर्ती के अपहरण का संदेह भू माफिया पर था, जो परिवार की प्राइम लोकेशन वाली जमीन हड़पना चाहते थे। अपहरण के कुछ महीनों बाद उसकी हड्डियां घर के पास एक गड्ढे से बरामद हुई थीं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CBI की जांच

सुप्रीम कोर्ट ने 25 नवंबर 2013 को इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। फरवरी 2014 से सीबीआई इसकी जांच शुरू करते हुए सबसे पहले घर का निरीक्षण किया, स्केच बनाए और फिर माता-पिता से 100 से ज्यादा सवाल पूछे। परिवार को लगा जांच सही दिशा में आगे बढ़ेगी तो पूरा मामला उजागर हो जायेगा। हत्या में संलिप्त भू माफिया गिरफ्तार होंगे। लेकिन, ऐसा कुछ नहीं हुआ। जबकि सीबीआई को कोर्ट ने समय सीमा के अंदर जांच करने को कहा था।

सीबीआई जांच और गिरफ्तारियां

सीबीआई ने सबसे पहले मुजफ्फरपुर नगर निगम पार्षद राकेश कुमार सिन्हा पप्पू को 5 सितंबर 2017 को गिरफ्तार की थी। पूछताछ में लैंड डील का खुलासा भी हुआ। इसके बाद अप्रैल 2018 में होटल मालिक और दो प्रॉपर्टी डीलर समेत छह और लोगों की इस मामले में गिरफ्तारियां हुईं। 14 दिन की न्यायिक हिरासत में इनसे पूछताछ भी हुई। सीबीआई ने दावा भी किया था कि हत्या जमीनी विवाद के कारण हुई। लेकिन, पीड़िता के परिवार को न्याय नहीं मिल पाया।

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