सर्वार्थ सिद्धि योग में माघी पूर्णिमा आज:गंगा स्नान से मिलेगा अनंत पुण्य, पुष्य नक्षत्र सहित 4 शुभ योगों का दुर्लभ संयोग; जानें शुभ मुहूर्त

सर्वार्थ सिद्धि योग में माघी पूर्णिमा आज:गंगा स्नान से मिलेगा अनंत पुण्य, पुष्य नक्षत्र सहित 4 शुभ योगों का दुर्लभ संयोग; जानें शुभ मुहूर्त

आज रविवार को माघी पूर्णिमा मनाई जा रही है। आज के दिन पुष्य नक्षत्र, प्रीति योग, आयुष्मान योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। श्रद्धालु आज पवित्र गंगा में स्नान कर दान-पुण्य सहित अन्य धार्मिक कृत्य करेंगे। कई घरों में आज सत्यनारायण प्रभु की पूजा भी होगी। आज के दिन संगम स्नान, गंगा स्नान या स्नान जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करने से अनंत पुण्यफल की प्राप्ति होगी। तुलसी पूजा के बाद उसमें घी एक दीपक दिखाने से घर में सुख-समृद्धि का वास होगा। गंगा स्नान से दूर होंगे संताप- ज्योतिषाचार्य ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि, माघी पूर्णिमा पर समस्त देवी-देवता गंगाजल में निवास करते हैं। इसलिए आज गंगाजल के स्पर्श करने मात्र से ही जातक का कल्याण हो जाएगा। आज पूर्णिमा के पावन पर्व पर गंगा स्नान करने से समस्त पाप क्षय होंगे और संताप भी मिट जाएगा। आज के दिन यज्ञ, तप, हवन, मंत्र जाप, वेदपाठ, दान, सेवा करना शुभ फलदायी रहेगा। शुभता का प्रतीक है पुष्य नक्षत्र ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, पुष्य नक्षत्र 27 नक्षत्रों में आठवां नक्षत्र है। अन्य सभी नक्षत्रों के तुलना में इस नक्षत्र को सबसे उत्तम माना गया है। पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति तथा शनि इस नक्षत्र का दिशा प्रतिनिधि है। बृहस्पति शुभता, बुद्धिमता,स्थायित्व और ज्ञान के प्रतीक है। इन दोनों का योग मिलकर इस नक्षत्र को शुभ व महान बना देता है। ऋग्वेद में इस नक्षत्र को मंगलकर्ता कहा गया है, साथ ही यह सभी नक्षत्रों का राजा भी है। पुष्य नक्षत्र में आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करना, मंत्र दीक्षा, उच्च शिक्षा ग्रहण करना, भूमि क्रय-विक्रय, यज्ञ अनुष्ठान और वेद पाठ आरंभ करना, पुस्तक दान या विद्या दान करना और विदेश यात्रा आरंभ करना श्रेष्ठ माना गया है। चन्द्र की किरणें देगी आरोग्यता पंडित झा ने बताया कि, ‘माघ पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा अपनी सोलह कलाओं से शोभायमान होते हैं तथा पूर्ण चन्द्रमा अमृत वर्षा करते हैं जिसका अंश वृक्षों, नदियों, जलाशयों और वनस्पतियों पर पड़ते हैं। इसी लिए इनमें आरोग्यदायक गुण उत्पन्न होते हैं। माघ पूर्णिमा में स्नान-दान करने से सूर्य और चन्द्रमा युक्त दोषों से मुक्ति मिलती है। माघ पूर्णिमा में स्नान-दान करने से सूर्य और चन्द्रमा युक्त दोषों से मुक्ति मिलती हैI’ माघ पूर्णिमा के स्नान-दान और पूजन मुहूर्त पूर्णिमा तिथि- देर रात 03:58 बजे तक पुष्य नक्षत्र- मध्यरात्रि 12:28 बजे तक चर-लाभ मुहूर्त- सुबह 07:57 बजे से 10:41 बजे तक अमृत मुहूर्त- सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:03 बजे तक शुभ योग- दोपहर 01:25 बजे से 02:48 बजे तक अभिजित मुहूर्त- दोपहर 11:41 बजे से 12:25 बजे तक प्रदोष मुहूर्त- शाम 05:32 बजे से रात्रि 08:17 बजे तक आज रविवार को माघी पूर्णिमा मनाई जा रही है। आज के दिन पुष्य नक्षत्र, प्रीति योग, आयुष्मान योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। श्रद्धालु आज पवित्र गंगा में स्नान कर दान-पुण्य सहित अन्य धार्मिक कृत्य करेंगे। कई घरों में आज सत्यनारायण प्रभु की पूजा भी होगी। आज के दिन संगम स्नान, गंगा स्नान या स्नान जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करने से अनंत पुण्यफल की प्राप्ति होगी। तुलसी पूजा के बाद उसमें घी एक दीपक दिखाने से घर में सुख-समृद्धि का वास होगा। गंगा स्नान से दूर होंगे संताप- ज्योतिषाचार्य ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि, माघी पूर्णिमा पर समस्त देवी-देवता गंगाजल में निवास करते हैं। इसलिए आज गंगाजल के स्पर्श करने मात्र से ही जातक का कल्याण हो जाएगा। आज पूर्णिमा के पावन पर्व पर गंगा स्नान करने से समस्त पाप क्षय होंगे और संताप भी मिट जाएगा। आज के दिन यज्ञ, तप, हवन, मंत्र जाप, वेदपाठ, दान, सेवा करना शुभ फलदायी रहेगा। शुभता का प्रतीक है पुष्य नक्षत्र ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, पुष्य नक्षत्र 27 नक्षत्रों में आठवां नक्षत्र है। अन्य सभी नक्षत्रों के तुलना में इस नक्षत्र को सबसे उत्तम माना गया है। पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति तथा शनि इस नक्षत्र का दिशा प्रतिनिधि है। बृहस्पति शुभता, बुद्धिमता,स्थायित्व और ज्ञान के प्रतीक है। इन दोनों का योग मिलकर इस नक्षत्र को शुभ व महान बना देता है। ऋग्वेद में इस नक्षत्र को मंगलकर्ता कहा गया है, साथ ही यह सभी नक्षत्रों का राजा भी है। पुष्य नक्षत्र में आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करना, मंत्र दीक्षा, उच्च शिक्षा ग्रहण करना, भूमि क्रय-विक्रय, यज्ञ अनुष्ठान और वेद पाठ आरंभ करना, पुस्तक दान या विद्या दान करना और विदेश यात्रा आरंभ करना श्रेष्ठ माना गया है। चन्द्र की किरणें देगी आरोग्यता पंडित झा ने बताया कि, ‘माघ पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा अपनी सोलह कलाओं से शोभायमान होते हैं तथा पूर्ण चन्द्रमा अमृत वर्षा करते हैं जिसका अंश वृक्षों, नदियों, जलाशयों और वनस्पतियों पर पड़ते हैं। इसी लिए इनमें आरोग्यदायक गुण उत्पन्न होते हैं। माघ पूर्णिमा में स्नान-दान करने से सूर्य और चन्द्रमा युक्त दोषों से मुक्ति मिलती है। माघ पूर्णिमा में स्नान-दान करने से सूर्य और चन्द्रमा युक्त दोषों से मुक्ति मिलती हैI’ माघ पूर्णिमा के स्नान-दान और पूजन मुहूर्त पूर्णिमा तिथि- देर रात 03:58 बजे तक पुष्य नक्षत्र- मध्यरात्रि 12:28 बजे तक चर-लाभ मुहूर्त- सुबह 07:57 बजे से 10:41 बजे तक अमृत मुहूर्त- सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:03 बजे तक शुभ योग- दोपहर 01:25 बजे से 02:48 बजे तक अभिजित मुहूर्त- दोपहर 11:41 बजे से 12:25 बजे तक प्रदोष मुहूर्त- शाम 05:32 बजे से रात्रि 08:17 बजे तक  

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