जांच सीबीआई के जिम्मे:उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार सुबह 8.40 बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट दी जानकारी

जांच सीबीआई के जिम्मे:उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार सुबह 8.40 बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट दी जानकारी

नीट छात्रा के रेप और हत्या मामले की जांच अब सीबीआई करेगी। गृह मंत्री व उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार सुबह 8.40 बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। अपने पोस्ट में गृह मंत्री ने लिखा कि बिहार के मुख्यमंत्री ने भारत सरकार से पटना में हुई नीट छात्रा की हत्या के मामले की जांच सीबीआई से कराने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि घटना का पारदर्शी और न्यायपूर्ण तरीके से उद्भेदन सुनिश्चित किया जाए। मामला सीबीआई को जाने के बाद पीड़िता के परिजन नाराज हैं। पीड़िता के पिता ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि हमने सीबीआई जांच की मांग नहीं की थी।मामले को लटकाने के लिए सीबीआई को सौंपा गया है। सीबीआई भी वही करेगी, जो एसआईटी कर रही थी। हमने न्यायिक जांच की मांग की है। हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच होनी चाहिए। एफएसएल की रिपोर्ट में कहा गया है कि छात्रा के कपड़ों पर स्पर्म मिला है। रिपोर्ट के बाद एसआईटी ने अब तक 25 संदिग्धों के ब्लड सैंपल लिए हैं। इनमें 10 छात्रा के परिजन भी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, 18 संदिग्धों की डीएनए रिपोर्ट एसआईटी को मिल चुकी है। लेकिन किसी का भी डीएनए छात्रा के कपड़ों से मिले स्पर्म के डीएनए से मैच नहीं किया है।शेष संदिग्धों की डीएनए रिपोर्ट का इंतजार है। छात्रा के पिता भी पहुंचे कोर्ट नीट छात्रा की मौत मामले की जांच हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में कराने की मांग को लेकर मृत छात्रा के पिता नवीन कुमार ने पटना हाई कोर्ट में आपराधिक रिट याचिका दायर की है। -शेष पेज 13 पर हॉस्टल संचालक की लापरवाहियां पटना पुलिस ने कहां-कहां चूक की पुलिस के आरोप पर पिता ने कहा- हमें साक्ष्य दिखाएं, दोषी हैं तो जेल भेज दीजिए पीड़िता के पिता और अन्य परिजन शुक्रवार को डीजीपी से मिले। मुलाकात के दौरान पिता डीजीपी के तर्कों से सहमत नहीं हुए। इसके बाद परिजन बैठक से बाहर निकल आए। पिता से गृहमंत्री सम्राट चौधरी से मिलने का अनुरोध किया गया। लेकिन परिजनों ने मिलने से इनकार कर दिया। पिता ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि उनकी बेटी के साथ रेप के बाद हत्या की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में बड़े-बड़े लोगों का हाथ है। शुरू से ही लीपापोती की जा रही है। जानिए कब क्या हुआ… एसआईटी को पटना में साक्ष्य नहीं मिले एसआईटी रिपोर्ट में पटना को लेकर क्या सामने आया है? एसआईटी की जांच में अब तक पटना में छात्रा के साथ घटना होने के साक्ष्य नहीं मिले हैं। तमाम वैज्ञानिक जांच के बाद भी पटना में वारदात की पुष्टि नहीं हुई है। छात्रा कब पटना से गई और कब हॉस्टल लौटी? छात्रा 26 दिसंबर 25 को पटना से अपने माता-पिता के साथ हॉस्टल से घर गई थी। वह 5 जनवरी को दोपहर 3.34 बजे दोबारा हॉस्टल लौटी। इस अवधि से जुड़े कौन-कौन से साक्ष्य जांचे गए? इस दौरान के सीसीटीवी फुटेज, छात्रा के मोबाइल के सीडीआर और अन्य तकनीकी साक्ष्य एसआईटी ने खंगाले हैं। वैज्ञानिक साक्ष्यों से क्या निष्कर्ष निकला? जवाब : सूत्रों के अनुसार, सभी वैज्ञानिक साक्ष्य खंगालने के बाद भी पटना में किसी घटना के प्रमाण नहीं मिले हैं। इन साक्ष्यों का आगे क्या होगा? एसआईटी इन सभी साक्ष्यों को सूचीबद्ध कर रही है। इन्हें आगे की जांच के लिए सीबीआई को सौंपा जाएगा। इस मामले में जांच की शुरुआत कब हुई? 9 जनवरी को चित्रगुप्त नगर थाने में पीड़िता के पिता के बयान पर केस दर्ज हुआ। इसके बाद पटना पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस पर क्या आरोप लगे? पटना पुलिस पर लापरवाही बरतने और दोषियों को बचाने के आरोप लगे। इसके बाद मामला और तूल पकड़ गया। एसआईटी का गठन कब और किसके नेतृत्व में हुआ? डीजीपी के आदेश पर 16 जनवरी को आईजी सेंट्रल रेंज के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई। सीआईडी की भूमिका कब शुरू हुई? एसआईटी के गठन के कुछ दिनों बाद सीआईडी ने भी मामले की जांच शुरू की। शेष पेज-13 राज्य सरकार से जवाब तलब पटना हाई कोर्ट ने राज्य में निजी छात्रावासों के संचालन और निगरानी से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू और न्यायमूर्ति बिबेक चौधरी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि राज्य में निजी छात्रावासों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के लिए संचालित छात्रावासों की सुरक्षा, संरक्षा, भोजन और स्वच्छता की निगरानी के लिए कोई वैधानिक या नियामक निकाय है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को तय की गई है। 18 संदिग्धों का डीएनए मैच नहीं पिता बोले-यह मामला लटकाने के लिए नीट छात्रा रेप-हत्या केस- राज्य सरकार ने की अनुशंसा रिपोर्टर : डीजीपी से मुलाकात में क्या बात हुई? पिता : डीजीपी ने कहा कि आपकी बच्ची के साथ परिवार के लोगों ने ही गलत किया है। उन्होंने इसे आत्महत्या बताया। लेकिन कोई साक्ष्य नहीं दिखाया। हमने कहा कि अगर सबूत है तो हमें जेल भेज दीजिए। डीजीपी ने कहा कि आत्महत्या मान लीजिए। केस सीबीआई को गया तो तीन साल परेशान रहिएगा। हमने कहा कि यह अन्याय है। रिपोर्टर : अब जांच सीबीआई करेगी, क्या न्याय की उम्मीद है? पिता : मामला लटकाने के लिए सीबीआई को दिया गया है। हमने कभी सीबीआई जांच की मांग नहीं की। हमारी मांग न्यायिक जांच की है। हमें न्याय चाहिए।रिपोर्टर : एसआईटी तो लगातार संपर्क में है? पिता : एसआईटी हमें प्रताड़ित कर रही है। कहा जा रहा है कि घटना जहानाबाद में हुई। सच्चाई यह है कि घटना हॉस्टल में हुई। बड़े लोगों को बचाया जा रहा है। रिपोर्टर : लीपापोती का आरोप किस पर है? पिता : चित्रगुप्त नगर की तत्कालीन थानेदार रौशनी पर आरोप है। वह पैसे लेकर दोषियों को बचा रही थी। डॉ. सतीश ने इलाज में लापरवाही की। हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल ने केस उठाने को कहा। उन्होंने पैसे देने की बात कही। वार्डन चंचला और नीतू की भूमिका भी संदिग्ध है। रिपोर्टर : गृहमंत्री से मिलने से इनकार क्यों किया? पिता : जब डीजीपी ही आत्महत्या बता रहे थे तो मिलने का क्या लाभ। पुलिस जबरन मिलवाना चाह रही थी। नीट छात्रा के रेप और हत्या मामले की जांच अब सीबीआई करेगी। गृह मंत्री व उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार सुबह 8.40 बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। अपने पोस्ट में गृह मंत्री ने लिखा कि बिहार के मुख्यमंत्री ने भारत सरकार से पटना में हुई नीट छात्रा की हत्या के मामले की जांच सीबीआई से कराने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि घटना का पारदर्शी और न्यायपूर्ण तरीके से उद्भेदन सुनिश्चित किया जाए। मामला सीबीआई को जाने के बाद पीड़िता के परिजन नाराज हैं। पीड़िता के पिता ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि हमने सीबीआई जांच की मांग नहीं की थी।मामले को लटकाने के लिए सीबीआई को सौंपा गया है। सीबीआई भी वही करेगी, जो एसआईटी कर रही थी। हमने न्यायिक जांच की मांग की है। हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच होनी चाहिए। एफएसएल की रिपोर्ट में कहा गया है कि छात्रा के कपड़ों पर स्पर्म मिला है। रिपोर्ट के बाद एसआईटी ने अब तक 25 संदिग्धों के ब्लड सैंपल लिए हैं। इनमें 10 छात्रा के परिजन भी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, 18 संदिग्धों की डीएनए रिपोर्ट एसआईटी को मिल चुकी है। लेकिन किसी का भी डीएनए छात्रा के कपड़ों से मिले स्पर्म के डीएनए से मैच नहीं किया है।शेष संदिग्धों की डीएनए रिपोर्ट का इंतजार है। छात्रा के पिता भी पहुंचे कोर्ट नीट छात्रा की मौत मामले की जांच हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में कराने की मांग को लेकर मृत छात्रा के पिता नवीन कुमार ने पटना हाई कोर्ट में आपराधिक रिट याचिका दायर की है। -शेष पेज 13 पर हॉस्टल संचालक की लापरवाहियां पटना पुलिस ने कहां-कहां चूक की पुलिस के आरोप पर पिता ने कहा- हमें साक्ष्य दिखाएं, दोषी हैं तो जेल भेज दीजिए पीड़िता के पिता और अन्य परिजन शुक्रवार को डीजीपी से मिले। मुलाकात के दौरान पिता डीजीपी के तर्कों से सहमत नहीं हुए। इसके बाद परिजन बैठक से बाहर निकल आए। पिता से गृहमंत्री सम्राट चौधरी से मिलने का अनुरोध किया गया। लेकिन परिजनों ने मिलने से इनकार कर दिया। पिता ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि उनकी बेटी के साथ रेप के बाद हत्या की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में बड़े-बड़े लोगों का हाथ है। शुरू से ही लीपापोती की जा रही है। जानिए कब क्या हुआ… एसआईटी को पटना में साक्ष्य नहीं मिले एसआईटी रिपोर्ट में पटना को लेकर क्या सामने आया है? एसआईटी की जांच में अब तक पटना में छात्रा के साथ घटना होने के साक्ष्य नहीं मिले हैं। तमाम वैज्ञानिक जांच के बाद भी पटना में वारदात की पुष्टि नहीं हुई है। छात्रा कब पटना से गई और कब हॉस्टल लौटी? छात्रा 26 दिसंबर 25 को पटना से अपने माता-पिता के साथ हॉस्टल से घर गई थी। वह 5 जनवरी को दोपहर 3.34 बजे दोबारा हॉस्टल लौटी। इस अवधि से जुड़े कौन-कौन से साक्ष्य जांचे गए? इस दौरान के सीसीटीवी फुटेज, छात्रा के मोबाइल के सीडीआर और अन्य तकनीकी साक्ष्य एसआईटी ने खंगाले हैं। वैज्ञानिक साक्ष्यों से क्या निष्कर्ष निकला? जवाब : सूत्रों के अनुसार, सभी वैज्ञानिक साक्ष्य खंगालने के बाद भी पटना में किसी घटना के प्रमाण नहीं मिले हैं। इन साक्ष्यों का आगे क्या होगा? एसआईटी इन सभी साक्ष्यों को सूचीबद्ध कर रही है। इन्हें आगे की जांच के लिए सीबीआई को सौंपा जाएगा। इस मामले में जांच की शुरुआत कब हुई? 9 जनवरी को चित्रगुप्त नगर थाने में पीड़िता के पिता के बयान पर केस दर्ज हुआ। इसके बाद पटना पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस पर क्या आरोप लगे? पटना पुलिस पर लापरवाही बरतने और दोषियों को बचाने के आरोप लगे। इसके बाद मामला और तूल पकड़ गया। एसआईटी का गठन कब और किसके नेतृत्व में हुआ? डीजीपी के आदेश पर 16 जनवरी को आईजी सेंट्रल रेंज के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई। सीआईडी की भूमिका कब शुरू हुई? एसआईटी के गठन के कुछ दिनों बाद सीआईडी ने भी मामले की जांच शुरू की। शेष पेज-13 राज्य सरकार से जवाब तलब पटना हाई कोर्ट ने राज्य में निजी छात्रावासों के संचालन और निगरानी से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू और न्यायमूर्ति बिबेक चौधरी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि राज्य में निजी छात्रावासों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के लिए संचालित छात्रावासों की सुरक्षा, संरक्षा, भोजन और स्वच्छता की निगरानी के लिए कोई वैधानिक या नियामक निकाय है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को तय की गई है। 18 संदिग्धों का डीएनए मैच नहीं पिता बोले-यह मामला लटकाने के लिए नीट छात्रा रेप-हत्या केस- राज्य सरकार ने की अनुशंसा रिपोर्टर : डीजीपी से मुलाकात में क्या बात हुई? पिता : डीजीपी ने कहा कि आपकी बच्ची के साथ परिवार के लोगों ने ही गलत किया है। उन्होंने इसे आत्महत्या बताया। लेकिन कोई साक्ष्य नहीं दिखाया। हमने कहा कि अगर सबूत है तो हमें जेल भेज दीजिए। डीजीपी ने कहा कि आत्महत्या मान लीजिए। केस सीबीआई को गया तो तीन साल परेशान रहिएगा। हमने कहा कि यह अन्याय है। रिपोर्टर : अब जांच सीबीआई करेगी, क्या न्याय की उम्मीद है? पिता : मामला लटकाने के लिए सीबीआई को दिया गया है। हमने कभी सीबीआई जांच की मांग नहीं की। हमारी मांग न्यायिक जांच की है। हमें न्याय चाहिए।रिपोर्टर : एसआईटी तो लगातार संपर्क में है? पिता : एसआईटी हमें प्रताड़ित कर रही है। कहा जा रहा है कि घटना जहानाबाद में हुई। सच्चाई यह है कि घटना हॉस्टल में हुई। बड़े लोगों को बचाया जा रहा है। रिपोर्टर : लीपापोती का आरोप किस पर है? पिता : चित्रगुप्त नगर की तत्कालीन थानेदार रौशनी पर आरोप है। वह पैसे लेकर दोषियों को बचा रही थी। डॉ. सतीश ने इलाज में लापरवाही की। हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल ने केस उठाने को कहा। उन्होंने पैसे देने की बात कही। वार्डन चंचला और नीतू की भूमिका भी संदिग्ध है। रिपोर्टर : गृहमंत्री से मिलने से इनकार क्यों किया? पिता : जब डीजीपी ही आत्महत्या बता रहे थे तो मिलने का क्या लाभ। पुलिस जबरन मिलवाना चाह रही थी।  

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