रांची वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा है कि आगामी बजट में शिक्षकों की बहाली, विद्यालयों में आधारभूत संरचना का विकास, शौचालय, पेयजल आदि व्यवस्था के लिए राशि का प्रावधान किया जाएगा। वित्त मंत्री शनिवार को एक स्थानीय होटल में वित्त विभाग एवं यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में बाल एवं जेंडर बजट पर आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक को केजीबीवी के नजदीक अवस्थित स्वास्थ्य केंद्रों के द्वारा विद्यालय की बच्चियों की जांच सप्ताह में दो दिन कराने का निर्देश दिया। वित्त मंत्री ने आश्वस्त किया कि जो सरकार इस कार्यशाला में प्राप्त हुए सुझावों को आगामी बजट में शामिल करने का प्रयास करेगी। मौके पर स्कूली बच्चे, सहायिका, सेविका, मंईयां सम्मान के लाभुक व विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि व अन्य शामिल रहे। छात्राओं ने स्कूलों में शौचालय व पेयजल की मांग की कार्यशाला में स्कूली छात्राओं ने शिक्षकों की कमी को दूर करने की मांग की। इसके अलावा आधारभूत संरचना निर्माण, मातृभाषा में शिक्षा व खेल की सुविधा बहाल करने का प्रावधान बजट में करने की मांगें रखीं। साथ ही स्कूलों में शौचालय, पेयजल, स्वच्छता के साथ-साथ महिला कॉलेज की स्थापना और हॉस्टलों में सुविधाएं को लेकर भी ध्यान आकृष्ट कराया। इस पर, वित्त सचिव ने कहा कि स्कूलों में 10,000 शिक्षकों की बहाली सरकार ने की है। भविष्य में 14,000 नए शिक्षक बहाल किए जाएंगे। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा है कि रविवार को केंद्रीय बजट आ रहा है। झारखंड सरकार को केंद्र से नया कुछ भी नहीं चाहिए, लेकिन राज्य को केंद्र से कई उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र के पास राज्य सरकार का 1.36 लाख करोड़ रुपया बकाया है। वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस बजट में झारखंड का बकाया देने की घोषणा करेगी। इसके साथ ही बिहार के तर्ज पर झारखंड की भी मंईयां को केंद्र सरकार 10-10 हजार रुपए देने की घोषणा करेगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जीएसटी युक्तिकरण राज्य को करीब 4000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। केंद्र सकार से यह राशि मिलने की राज्यवासियों की अपेक्षा है। वित्त मंत्री ने कहा कि जी राम जी योजना के कारण राज्य पर एक साल में करीब 5500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा। इसलिए केंद्र से उम्मीद है कि इस अतिरिक्त भार का भुगतान उनके द्वारा किया जाएगा। राज्य सरकार ने जल जीवन मिशन पर करीब 12600 करोड़ रुपए खर्च कर दिया है। लेकिन केंद्र सरकार की ओर से अब राशि देने से मना किया जा रहा है। इससे राज्य पर करीब 6300 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बजट में यह राशि झारखंड सरकार को देने की घोषणा हो सकती है। रांची वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा है कि आगामी बजट में शिक्षकों की बहाली, विद्यालयों में आधारभूत संरचना का विकास, शौचालय, पेयजल आदि व्यवस्था के लिए राशि का प्रावधान किया जाएगा। वित्त मंत्री शनिवार को एक स्थानीय होटल में वित्त विभाग एवं यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में बाल एवं जेंडर बजट पर आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक को केजीबीवी के नजदीक अवस्थित स्वास्थ्य केंद्रों के द्वारा विद्यालय की बच्चियों की जांच सप्ताह में दो दिन कराने का निर्देश दिया। वित्त मंत्री ने आश्वस्त किया कि जो सरकार इस कार्यशाला में प्राप्त हुए सुझावों को आगामी बजट में शामिल करने का प्रयास करेगी। मौके पर स्कूली बच्चे, सहायिका, सेविका, मंईयां सम्मान के लाभुक व विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि व अन्य शामिल रहे। छात्राओं ने स्कूलों में शौचालय व पेयजल की मांग की कार्यशाला में स्कूली छात्राओं ने शिक्षकों की कमी को दूर करने की मांग की। इसके अलावा आधारभूत संरचना निर्माण, मातृभाषा में शिक्षा व खेल की सुविधा बहाल करने का प्रावधान बजट में करने की मांगें रखीं। साथ ही स्कूलों में शौचालय, पेयजल, स्वच्छता के साथ-साथ महिला कॉलेज की स्थापना और हॉस्टलों में सुविधाएं को लेकर भी ध्यान आकृष्ट कराया। इस पर, वित्त सचिव ने कहा कि स्कूलों में 10,000 शिक्षकों की बहाली सरकार ने की है। भविष्य में 14,000 नए शिक्षक बहाल किए जाएंगे। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा है कि रविवार को केंद्रीय बजट आ रहा है। झारखंड सरकार को केंद्र से नया कुछ भी नहीं चाहिए, लेकिन राज्य को केंद्र से कई उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र के पास राज्य सरकार का 1.36 लाख करोड़ रुपया बकाया है। वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस बजट में झारखंड का बकाया देने की घोषणा करेगी। इसके साथ ही बिहार के तर्ज पर झारखंड की भी मंईयां को केंद्र सरकार 10-10 हजार रुपए देने की घोषणा करेगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जीएसटी युक्तिकरण राज्य को करीब 4000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। केंद्र सकार से यह राशि मिलने की राज्यवासियों की अपेक्षा है। वित्त मंत्री ने कहा कि जी राम जी योजना के कारण राज्य पर एक साल में करीब 5500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा। इसलिए केंद्र से उम्मीद है कि इस अतिरिक्त भार का भुगतान उनके द्वारा किया जाएगा। राज्य सरकार ने जल जीवन मिशन पर करीब 12600 करोड़ रुपए खर्च कर दिया है। लेकिन केंद्र सरकार की ओर से अब राशि देने से मना किया जा रहा है। इससे राज्य पर करीब 6300 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बजट में यह राशि झारखंड सरकार को देने की घोषणा हो सकती है।


