फर्जी सिम से फाइनेंस अफसर बनकर की कॉल, आखिर आरोपी गिरफ्तार

फर्जी सिम से फाइनेंस अफसर बनकर की कॉल, आखिर आरोपी गिरफ्तार

श्रीगंगानगर. ऑनलाइन निवेश के नाम पर साइबर ठग गिरोह की ओर से की गई सवा 22 लाख रुपए की ठगी के मामले में साइबर थाना पुलिस ने एक आरोपी को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मोबाइल सिम उपलब्ध कराकर ठग गिरोह को तकनीकी मदद दी थी, जिसका इस्तेमाल कर जालसाजों ने खुद को नामी फाइनेंस कंपनी का बड़ा अधिकारी बताकर युवती को ठगी का शिकार बनाया। मामले की जांच कर रहे साइबर थाने के सीआई रमेश कुमार न्यौल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी लालचंद उर्फ माडू मेघवाल, निवासी गांव शेख सरपाल, क्षेत्र श्रीकरणपुर है। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने पंजाब में रहने वाले अपने एक दोस्त के कहने पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मोबाइल सिम उपलब्ध कराई थी। बाद में यह सिम उसके दोस्त की ओर से किसी अन्य व्यक्ति को बेच दी गई, जिसका उपयोग ठगी की वारदात में किया गया। जांच अधिकारी ने बताया कि सिम और कॉलर करने वाले अलग अलग आरेापी है और जिन लोगों ने यह रकम हड़पी है, वे आरोपी इन आरोपियों से अभी दूर है। जांच अधिकारी के अनुसार इस प्रकरण में जिन मोबाइल नम्बर से कॉलें या चैटिंग हुई है, उसके बारे में पड़ताल की जा रही है। इस अनुसंधान में यह पहली गिरफ्तारी है। करणपुर बॉर्डर एरिया के इस आरोपी को अदालत में पेश किया, वहां से रिमांड लेकर पूछताछ की जा रही है।

अधिक मुनाफा देकर फंसाया और ठगते गए रुपए

पुलिस के अनुसार, जालसाजों ने इसी फर्जी सिम का इस्तेमाल करते हुए खुद को एक नामी फाइनेंस कंपनी का वरिष्ठ अधिकारी बताया और अधिक मुनाफे व सुरक्षित निवेश का लालच देकर एक युवती को अपने जाल में फंसा लिया। ठगों ने अलग-अलग किश्तों में युवती से 22 लाख 30 हजार 800 रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए। ठगी का शिकार बनी युवती स्वाति बंसल, निवासी एसटीपीएस कॉलोनी, सूरतगढ़ थर्मल क्षेत्र ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि आरोपी ने फोन कॉल के माध्यम से संपर्क कर खुद को फाइनेंस कंपनी का अधिकारी बताया था। शुरुआत में भरोसा दिलाने के बाद उसने निवेश पर भारी रिटर्न का झांसा दिया। कुछ समय बाद जब युवती ने मुनाफे या मूल रकम लौटाने की बात कही, तो आरोपी ने संपर्क पूरी तरह तोड़ दिया। इसके बाद पीड़िता ने जयपुर साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई, जहां से जीरो नंबर एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला श्रीगंगानगर साइबर थाने में स्थानांतरित किया गया।

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