Budget 2026: 7 ट्रिलियन डॉलर का ‘मेगा प्लान’, युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए खुलेगा खजाना ?

Budget 2026: 7 ट्रिलियन डॉलर का ‘मेगा प्लान’, युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए खुलेगा खजाना ?

Nirmala Sitharaman: भारत अपनी आर्थिक यात्रा के सबसे रोमांचक मोड़ पर खडा हुआ है। टारगेट साफ है—2047 तक ‘विकसित भारत’ बनना। इस बड़े सपने की पहली सीढ़ी है साल 2030 तक देश को 7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना। 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब संसद में 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी, तो सबकी निगाहें इसी रोडमैप पर होंगी। इस बीच, भारतीय अंतरिक्ष संघ (ISPA) ने सरकार को सुझाव दिया है कि अगर इस लक्ष्य को भेदना है, तो ‘कौशल विकास’ (Skill Development) और ‘डीप टेक’ (Deep Tech) को दोहरे इंजन की तरह इस्तेमाल करना होगा।

युवा शक्ति: आंकड़ों से आगे नतीजों की बात

आईएसपीए के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट (सेवानिवृत्त) ने बजट से पहले एक अहम मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा फौज है। देश की 65% आबादी 35 साल से कम उम्र की है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक अवसर है। जरूरत है कि इस युवा पीढ़ी को किताबी ज्ञान से निकालकर व्यावहारिक कौशल और टेक्नोलॉजी से लैस किया जाए। भट्ट का सुझाव है कि अब स्किलिंग का मॉडल बदलना होगा। पैसा उन्हें मिले जो वास्तव में रोजगार पैदा कर रहे हैं, न कि सिर्फ ट्रेनिंग के आंकड़े दिखा रहे हैं। “परिणाम-आधारित” फंडिंग ही असली गेम-चेंजर साबित होगी।

देश के छोटे शहरों में बड़े सपने

डीप टेक का विस्तार सिर्फ मेट्रो शहरों का विकास काफी नहीं है। अब टेक्नोलॉजी को टियर-2 और टियर-3 शहरों तक ले जाना होगा। स्थानीय भाषाओं में एआई (AI) और आधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग देकर गांव-देहात के युवाओं को ग्लोबल मार्केट के लिए तैयार किया जा सकता है। भारत को अब ‘सेवा देने वाले देश’ (Service Economy) की छवि से बाहर निकल कर ‘उत्पाद बनाने वाले देश’ (Product Economy) की ओर बढ़ना होगा। हमारे पास प्रतिभा की कमी नहीं है, बस उसे सही दिशा और संसाधन देने की देर है।

‘धैर्यवान पूंजी’ और स्टार्टअप्स को मोहलत

डीप टेक, क्वांटम कंप्यूटिंग और ग्रीन टेक्नोलॉजी ऐसे क्षेत्र हैं जहां रातों-रात मुनाफा नहीं मिलता। इसके लिए ‘धैर्यवान पूंजी’ (Patient Capital) की जरूरत होती है। आईएसपीए ने मांग की है कि डीप टेक कंपनियों को कम से कम 15 साल तक ‘स्टार्टअप’ का दर्जा दिया जाए, ताकि वे लंबी रेस का घोड़ा बन सकें। इसके साथ ही, कर प्रणाली (Tax System) को सरल बनाने और रिफंड प्रक्रिया को तेज करने की वकालत की गई है, ताकि कंपनियों का पैसा अटकने के बजाय उनके विकास में काम आए।

इंडस्ट्री की मांग: रिस्क लेने वालों को मिले सुरक्षा

टेक इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि एके भट्ट का यह प्रस्ताव समय की मांग है। स्टार्टअप फाउंडर्स का कहना है कि डीप टेक में रिसर्च और डेवलपमेंट में सालों लग जाते हैं। ऐसे में अगर सरकार 15 साल तक टैक्स और नियमों में छूट देती है, तो भारत दुनिया में अगली ‘सिलिकॉन वैली’ बन सकता है। यह कदम निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए भी अहम होगा।

1 फरवरी के बजट पर टिकी हैं निगाहें

अब देखना दिलचस्प होगा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इन सुझावों को बजट में कितनी जगह देती हैं। क्या सरकार डीप टेक के लिए कोई अलग फंड घोषित करेगी? या फिर स्किल डेवलपमेंट के लिए नए मापदंड तय किए जाएंगे? 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में इन सवालों के जवाब मिलेंगे, जो भारत की अगली आर्थिक छलांग की दिशा तय करेंगे।

सर्विस से प्रोडक्ट की ओर शिफ्ट होता भारत

भारत ने पिछले तीन दशकों के दौरान आईटी क्षेत्र में दुनिया में अपना डंका बजाया है, लेकिन अब वक्त ‘मेड इन इंडिया’ सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर का है। अगर बजट में उत्पाद आधारित कंपनियों (Product Based Companies) को बढ़ावा मिलता है, तो हम गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां भारत में खड़ी कर सकते हैं। यह न सिर्फ डॉलर बचाएगा, बल्कि दुनिया भर से विदेशी मुद्रा भी देश में लाएगा।

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