राष्ट्रकथा के समापन के बाद भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष, पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह पहली बार अयोध्या पहुंचे।उन्होंने दशरथ गद्दी पहुंच कर महंत बृजमोहन दास के भाई श्याम जी ओझा की को श्रद्धांजलि दी।इसके बाद उन्होंने हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास के साथ हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद उन्होंने अयोध्या-फैजाबाद से लोकसभा चुनाव लड़ने से साफ इंकार कर दिया।कोई सवाल ही नहीं उठता।मैं चुनाव के लिए थोड़े ही अयोध्या आता हूं।उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद विनय कटियार का अयोध्या में पहला हक है।मैं कहूंगा कि उनको यहां से चुनाव लड़ाया जाय। उन्होंने कहा कि नंदिनीनगर में राष्ट्रकथा हर साल होगी और मैं जब तक जीवित रहूंगा तब तक अनवरत होती ही रहेगी। 8 जनवरी को मेरा जन्मदिवस था।इस समय राष्ट्रकथा के कारण व्यस्तता थी।इसके बाद हेमंत दास नहीं थे तो उनके बिना मैं अयोध्या कैसे आता। सूजीसी विवाद पर उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का आभार जताया। कहा कि देश एक बड़े विवाद से बच गया।इसका विषय अब समाप्त हो गया है। अब यूजीसी उस स्वरूप में नहीं आएगा। मैं हनुमानगढ़ी की पावनभूमि पर हूं।यूजीसी से देश का ताना-बाना बिगड़ जाता है। हमारे विद्यालय में हर जाति के लोग आते हैं और खेलते हैं।हनुमानगढ़ी पर हम लोग कुश्ती लड़ते थे तब कहां जाति पूछते थे। यह उपेंद्र बाबा है कौन बालीवाल के खिलाड़ी हैं।इनसे कौन जाति पूछने जाता है।


