सीवान जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लिए प्रशासन ने एक नई रणनीति अपनाई है। जिला पदाधिकारी विवेक रंजन मैत्रये के नेतृत्व में 10 फरवरी 2026 से 27 फरवरी 2026 तक चलने वाले सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान में स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था को मुख्य केंद्र बनाया गया है। प्रशासन का मानना है कि बच्चों की जागरूकता से यह संदेश पूरे परिवार और समाज तक पहुंचेगा।
डीएम विवेक रंजन मैत्रये ने बताया कि लिम्फैटिक फाइलेरियासिस एक गंभीर मच्छर जनित परजीवी रोग है। यह लंबे समय तक शरीर में रहने के बाद हाथ-पैर और जननांगों में सूजन जैसी जटिल समस्याएं पैदा करता है। यह बीमारी विशेष रूप से गरीब और वंचित वर्गों को प्रभावित करती है, जिससे दिव्यांगता, आजीविका का नुकसान और सामाजिक बहिष्कार जैसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं। उन्होंने एमडीए अभियान को केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी बताया। चयनित शिक्षकों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण इस अभियान को जन आंदोलन का रूप देने में शिक्षा विभाग की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाया गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में जिले के आठ प्रखंडों के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों और चयनित शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण में फाइलेरिया रोग, उसके दुष्प्रभाव, बचाव के उपाय और एमडीए में विद्यालयों की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई। डीएम ने स्पष्ट किया कि स्कूलों में “फाइलेरिया की पाठशाला”, निबंध प्रतियोगिता, स्मार्ट क्लास के माध्यम से जागरूकता वीडियो और प्रभात फेरियों के जरिए बच्चों को इस अभियान का वाहक बनाया जाएगा।
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. ओ.पी. लाल ने जानकारी दी कि नाइट ब्लड सर्वे में गुठनी, नवतन, जीरादेई, हुसैनगंज, हसनपुरा, रघुनाथपुर, लकड़ी नवीगंज और गोरेयाकोठी प्रखंडों में माइक्रो फाइलेरिया की दर 1 प्रतिशत या उससे अधिक पाई गई है। इन्हीं प्रखंडों में एमडीए अभियान चलाया जाएगा। बच्चों की कॉपी पर दवा सेवन का लिखवाएंगे संदेश
डीएम ने निर्देश दिए कि स्कूलों के नोटिस बोर्ड पर एमडीए की तिथि अंकित की जाए। बच्चों की कॉपी पर दवा सेवन का संदेश लिखवाकर अभिभावकों से हस्ताक्षर लिए जाएं और मिड-डे मील के बाद ही दवा सेवन सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने प्रधानाध्यापकों से स्वयं दवा का सेवन कर बच्चों और समुदाय को प्रेरित करने की भी अपील की। प्रशासन का विश्वास है कि शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय तथा पिरामल फाउंडेशन के तकनीकी सहयोग से यह अभियान सफल होगा और सीवान जल्द ही फाइलेरिया मुक्त जिला बनने की ओर मजबूत कदम बढ़ाएगा। सीवान जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लिए प्रशासन ने एक नई रणनीति अपनाई है। जिला पदाधिकारी विवेक रंजन मैत्रये के नेतृत्व में 10 फरवरी 2026 से 27 फरवरी 2026 तक चलने वाले सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान में स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था को मुख्य केंद्र बनाया गया है। प्रशासन का मानना है कि बच्चों की जागरूकता से यह संदेश पूरे परिवार और समाज तक पहुंचेगा।
डीएम विवेक रंजन मैत्रये ने बताया कि लिम्फैटिक फाइलेरियासिस एक गंभीर मच्छर जनित परजीवी रोग है। यह लंबे समय तक शरीर में रहने के बाद हाथ-पैर और जननांगों में सूजन जैसी जटिल समस्याएं पैदा करता है। यह बीमारी विशेष रूप से गरीब और वंचित वर्गों को प्रभावित करती है, जिससे दिव्यांगता, आजीविका का नुकसान और सामाजिक बहिष्कार जैसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं। उन्होंने एमडीए अभियान को केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी बताया। चयनित शिक्षकों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण इस अभियान को जन आंदोलन का रूप देने में शिक्षा विभाग की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाया गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में जिले के आठ प्रखंडों के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों और चयनित शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण में फाइलेरिया रोग, उसके दुष्प्रभाव, बचाव के उपाय और एमडीए में विद्यालयों की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई। डीएम ने स्पष्ट किया कि स्कूलों में “फाइलेरिया की पाठशाला”, निबंध प्रतियोगिता, स्मार्ट क्लास के माध्यम से जागरूकता वीडियो और प्रभात फेरियों के जरिए बच्चों को इस अभियान का वाहक बनाया जाएगा।
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. ओ.पी. लाल ने जानकारी दी कि नाइट ब्लड सर्वे में गुठनी, नवतन, जीरादेई, हुसैनगंज, हसनपुरा, रघुनाथपुर, लकड़ी नवीगंज और गोरेयाकोठी प्रखंडों में माइक्रो फाइलेरिया की दर 1 प्रतिशत या उससे अधिक पाई गई है। इन्हीं प्रखंडों में एमडीए अभियान चलाया जाएगा। बच्चों की कॉपी पर दवा सेवन का लिखवाएंगे संदेश
डीएम ने निर्देश दिए कि स्कूलों के नोटिस बोर्ड पर एमडीए की तिथि अंकित की जाए। बच्चों की कॉपी पर दवा सेवन का संदेश लिखवाकर अभिभावकों से हस्ताक्षर लिए जाएं और मिड-डे मील के बाद ही दवा सेवन सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने प्रधानाध्यापकों से स्वयं दवा का सेवन कर बच्चों और समुदाय को प्रेरित करने की भी अपील की। प्रशासन का विश्वास है कि शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय तथा पिरामल फाउंडेशन के तकनीकी सहयोग से यह अभियान सफल होगा और सीवान जल्द ही फाइलेरिया मुक्त जिला बनने की ओर मजबूत कदम बढ़ाएगा।


