अमेरिका में डंकी रूट से रोज 65 भारतीय पकड़े गए:सालभर में 23 हजार लोग गिरफ्तार हुए; तुर्किये-दुबई रूट से US में एंट्री का ट्रेंड बढ़ा

अमेरिका में डंकी रूट से रोज 65 भारतीय पकड़े गए:सालभर में 23 हजार लोग गिरफ्तार हुए; तुर्किये-दुबई रूट से US में एंट्री का ट्रेंड बढ़ा

अमेरिका में डंकी रूट से एंट्री करने के मामले में बीते एक साल में हर रोज 65 भारतीय पकड़े गए। जनवरी से दिसंबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार अमेरिकी बॉर्डर एंड कस्टम ने कुल 23,830 भारतीयों को पकड़ा। विभाग के मुताबिक एंट्री के मामले घटे हैं, लेकिन इस पर पूरी तरह से रोक नहीं लगी है। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में 2024 में कुल 85,119 भारतीय पकड़े गए थे। अधिकारियों ने बताया कि इस बार एक नया ट्रेंड भी सामने आया है। अमेरिका में एंट्री करते पकड़े गए सभी भारतीय सिंगल एंटिटी यानी अकेले ही थे। कोई भी भारतीय परिवार के साथ नहीं पकड़ा गया। जबकि 2024 में पकड़े गए भारतीयों में से करीब 20 हजार भाई, पत्नी या बच्चों के साथ अमेरिका में अवैध रूप से एंट्री कर रहे थे। वहीं अमेरिका में कनाडा और मैक्सिको बॉर्डर के बजाय अब तुर्किये-दुबई रूट से अवैध एंट्री के मामले सामने आ रहे हैं। कनाडा-मैक्सिको बॉर्डर पर 8 हजार से ज्यादा भारतीय पकड़े गए कनाडा बॉर्डर पर साल 2025 में 6968 जबकि मैक्सिको बॉर्डर पर 1543 भारतीय पकड़े गए। सबसे ज्यादा 15,319 दूसरे अमेरिकी शहरों से भारतीय पकड़े गए। सूत्रों के मुताबिक तुर्किये-दुबई रूट से फ्लाइट के द्वारा सीधे अमेरिका में एंट्री कराई जाती है। ज्यादातर केस अमेरिका में वेकेशन वीसा के नाम पर एंट्री और फिर स्टे अवधि को जम्प करने के आ रहे हैं। अमेरिका से 2025 के दौरान कुल 3254 भारतीयों को डिपोर्ट किया गया। ये संख्या 2009 के बाद से सबसे ज्यादा है। 16 साल में 18882 को डिपोर्ट हुए। अमेरिका जाने के लिए डंकी के 3 पड़ाव… पहला रास्ता: -40 डिग्री की जानलेवा सर्दी में कनाडा से अमेरिका पहुंचना सबसे पहले डंकी को कनाडा के लिए टूरिस्ट वीजा अप्लाय करना होता है, जिससे भारत से कनाडा तक आसानी से पहुंचा जा सके। कनाडा के टोरंटो पहुंचने पर डंकी को एजेंट के कॉल के इंतजार में कई दिनों तक होटल में रुकना पड़ता है। एजेंट डंकी को टोरंटो से 2,100 किलोमीटर दूर मनितोबा प्रॉविंस तक लेकर जाता है। मनितोबा में सर्दी इतनी ज्यादा होती है कि आंखों से निकले आंसू पलकों पर ही जम जाते हैं। डंकी को मनितोबा से 1,834 किमी दूर एमरसन गांव पहुंचाया जाता है। यह गांव कनाडा और अमेरिका बॉर्डर पर है। यहां से डंकी -40 डिग्री की जानलेवा सर्दी में पैदल चलकर अमेरिका पहुंचते हैं। इस रास्ते में घुटनों तक बर्फ जमी होती है और दूर-दूर तक कोई इंसान नजर नहीं आता। डंकी 49वें पैरलल बॉर्डर पर पहुंचते हैं। दूसरा रास्ता: घने जंगलों और रेगिस्तान पार कर अमेरिका पहुंचना भारत में डंकी रूट का सबसे आम रास्ता रास्ता साउथ अमेरिका होते हुए अमेरिका पहुंचाता है, लेकिन इस रास्ते में घने जंगल, पहाड़, नदियां और रेगिस्तान पार करना होता है। 5 फरवरी 2025 को भारत वापस आए अवैध अप्रवासी हरजिंदर सिंह ने बताया कि 2020 में उनके ग्रुप ने 10 दिनों में पनामा के जंगल को पार किया था। 5 दिनों तक उन्हें खाने-पीने के लिए कुछ भी नहीं मिला। इस दौरान उन्हें रास्ते में करीब 40 शव मिले, जिनमें ज्यादातर कंकाल बन चुके थे। पनामा से नहीं जाने पर कोलंबिया नदी पार करते हैं डंकी अगर कोई डंकी पनामा जंगल से नहीं जाना चाहता तो उसे कोलंबिया से 150 किलोमीटर लंबी नदी पार करनी होती है। यहां से डंकी सेंट्रल अमेरिका के देश निकारागुआ के लिए नाव लेते हैं। नाव से सफर करने के बाद दूसरी नाव में ट्रांसफर होते हैं, जो मेक्सिको के लिए जाती है। इस नदी में बॉर्डर पुलिस पैट्रोलिंग तो करती ही है, नदी में खतरनाक जानवर भी जान लेने के लिए तैयार रहते हैं। इसके बाद डंकी ग्वाटेमाला पहुंचता है। ह्यूमन ट्रैफिकिंग यानी मानव तस्करी के लिए ग्वाटेमाला एक बड़ा कोऑर्डिनेशन सेंटर है। अमेरिकी बॉर्डर की ओर बढ़ते हुए यहां डंकी को दूसरे एजेंट को हैंडओवर किया जाता है। आखिर इतनी मुसीबतें सहकर अमेरिका क्यों जाते हैं भारतीय? भारतीय लोग बेहतर अवसर के लिए भारत से बाहर जाने का इरादा करते हैं, लेकिन कई लोग एजुकेशन की कमी या किसी अन्य वजह से लीगल तरीके से नहीं जा पाते। कई एजेंट भारतीय लोगों को अमीर बनने का झूठा सपना दिखाते हैं कि अमेरिका जाकर वह कामयाब हो जाएंगे…

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