सहारनपुर में वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य मुख्यालय लखनऊ और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार के निर्देश पर नेशनल वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है। यह प्रशिक्षण 27 जनवरी से 16 फरवरी 2026 तक टीबी सेनेटोरियम हॉल, सहारनपुर में आयोजित किया जा रहा है। इसमें आशा कार्यकर्ता, एएनएम, लैब टेक्नीशियन (एलटी) और स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों को संवेदीकरण और दक्षता प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शुक्रवार शाम को इसी कड़ी में ब्लॉक नकुड़ की 93 आशा कार्यकर्ताओं, 4 एएनएम, 1 बीएचडब्ल्यू, 1 स्वास्थ्य पर्यवेक्षक और 1 एलटी सहित कुल 100 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि जनपद को इस वर्ष “मलेरिया मुक्त” घोषित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय टीमों द्वारा निरीक्षण भी प्रस्तावित है। उन्होंने यह भी बताया कि 1 फरवरी को जनपद के चिकित्सकों के लिए एक विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसमें मेडिकल कॉलेज मेरठ की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनुपमा शर्मा प्रशिक्षण प्रदान करेंगी। जिला मलेरिया अधिकारी श्रीमती शिवांका गौड़ ने प्रतिभागियों को डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया से बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी। आशा कार्यकर्ताओं को उनके क्षेत्रों में बुखार के रोगियों की पहचान करने, मलेरिया की जांच करने और घर-घर सर्वेक्षण करने के लिए प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान लोगों को यह भी बताया गया कि कूलर,गमले,छत पर रखे पुराने टायर, बोतलें, टंकियां और अन्य बर्तनों में जमा पानी को साप्ताहिक रूप से खाली करें।इस पर विशेष जोर दिया गया, क्योंकि डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर साफ रुके हुए पानी में पनपता है। प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि कूलर को भरने से पहले उसे अच्छी तरह रगड़कर साफ करना चाहिए,क्योंकि एडीज मच्छर के अंडे लंबे समय तक चिपके रह सकते हैं।ग्राम स्तर पर वीएचएसएनसी (ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण समिति) और प्रधानों के माध्यम से “क्या करें-क्या न करें” संबंधी प्रचार-प्रसार किया जाएगा।लक्षणों के संबंध में,तेज बुखार होने पर पैरासीटामोल लेने, ठंडे पानी से शरीर पोंछने और तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेने की सलाह दी गई। मरीजों को एस्प्रिन और स्टेरॉयड जैसी दवाओं से बचने के लिए भी कहा गया। यदि खून आने जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत अस्पताल पहुंचने और रोगी को मच्छरदानी में रखने की हिदायत दी गई।


