प्रतापगढ़ जिले के अरनोद थाना क्षेत्र में दो पुलिसकर्मियों पर एक युवक के साथ मारपीट करने, उसका मोबाइल और बाइक छीनने तथा उसे परीक्षा देने से रोकने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित युवक शंकरलाल मीणा निवासी रातडिया ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) प्रतापगढ़ को प्रार्थना-पत्र देकर निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। दूसरी तरफ, पुलिस ने इन आरोपों को भ्रामक बताते हुए प्रेस नोट जारी किया है। पुलिसकर्मी पर लगाया नशे में होने का आरोप पीड़ित शंकरलाल ने अपने प्रार्थना-पत्र में बताया कि 27 जनवरी की रात वह प्रिंटिंग प्रेस से लौट रहा था, तभी अरनोद थाने के दो पुलिसकर्मियों ने उसे रास्ते में रोक लिया। युवक का आरोप है कि पुलिसकर्मी शराब के नशे में थे और उन्होंने गाली-गलौज करते हुए जातिगत अपमान किया। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उसका मोबाइल और बाइक छीन ली। थाने ले जाकर मारपीट करने का आरोप शंकरलाल ने बताया- उसे जबरन थाने ले जाया गया, जहां लात-घूंसे और डंडों से बेरहमी से मारपीट की गई। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसके गुप्तांगों पर भी प्रहार किया गया, जिससे उसे गंभीर दर्द हुआ। युवक ने पुलिस को बार-बार बताया कि अगले दिन उसकी परीक्षा है, लेकिन उसकी बात नहीं सुनी गई और उसे रातभर थाने में ही बैठाए रखा गया। पीड़ित की परीक्षा छूटी देरी से छोड़े जाने के कारण शंकरलाल अपनी परीक्षा नहीं दे पाया, जिससे उसका एक साल खराब हो गया। प्रार्थी ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उसके खिलाफ 185 एम.वी. एक्ट के तहत झूठा चालान बनाया है और उसकी बाइक अभी भी थाने में जब्त है। पुलिस ने आरोपों को झूठा बताया वहीं, पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित पोस्ट पूरी तरह भ्रामक है। पुलिस के अनुसार, 27 जनवरी की रात विशेष पेट्रोलिंग के दौरान युवक संदिग्ध अवस्था में मिला था। पूछताछ में वह अपना नाम-पता सही से नहीं बता पाया और शराब के नशे में था, जिसकी पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट में हुई है। पुलिस ने मारपीट से किया इंकार पुलिस ने बताया- बाइक बिना नंबर प्लेट के होने के कारण मोटर वाहन अधिनियम (एमवी एक्ट) के तहत चालान किया गया। पुलिस ने किसी भी प्रकार की मारपीट से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि युवक द्वारा लगाए गए आरोप कार्रवाई से बचने और सोशल मीडिया पर सहानुभूति प्राप्त करने के लिए झूठे फैलाए जा रहे हैं।


