गोपालगंज में SC/ST OBC मोर्चा के सदस्यों ने यूजीसी बिल लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। दर्जनों की संख्या में मोर्चा से जुड़े लोगों ने शहर की सड़कों पर आक्रोश मार्च निकाला। यह जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरा, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। उन्होंने बिल लागू न होने पर राष्ट्रीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी भी दी। ”छात्रों के शैक्षणिक और करियर के अवसरों का हनन” प्रदर्शनकारियों का मानना है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से संबंधित लंबित बिलों और आरक्षण नीतियों को कड़ाई से लागू न करने से दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों के शैक्षणिक और करियर के अवसरों का हनन हो रहा है। मोर्चा की प्रमुख मांगों में उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति और नामांकन में एससी/एसटी रोस्टर का पूर्ण पालन, पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए यूजीसी द्वारा दी जाने वाली फेलोशिप और वित्तीय सहायता को सुव्यवस्थित करना, तथा शिक्षा के क्षेत्र में संवैधानिक आरक्षण के प्रावधानों को बिना किसी छेड़छाड़ के जमीनी स्तर पर उतारना शामिल है। जुलूस केवल एक सांकेतिक प्रदर्शन जुलूस का नेतृत्व अधिवक्ता मोतीलाल प्रसाद और वैश्य युवा वाहिनी प्रदेश अध्यक्ष प्रत्यूष कुमार प्रवीण ने किया। उन्होंने कहा कि यह जुलूस केवल एक सांकेतिक प्रदर्शन है। यदि सरकार और संबंधित विभाग जल्द ही यूजीसी बिल और आरक्षण संबंधी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेते हैं, तो आने वाले समय में जिले भर में और राष्ट्रीय स्तर पर उग्र आंदोलन किया जाएगा। नेताओं ने चेतावनी दी कि शिक्षा उनका अधिकार है और बिल लागू करने में देरी होने पर वे चक्का जाम करने और सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। इस जुलूस में युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों की भारी भागीदारी देखी गई, जिसने स्थानीय प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। आक्रोश मार्च कैलाश होटल के पास स्थित बुद्ध बिहार मंदिर से निकल कर शहर के मुख्य चौक-चौराहों से गुजरा। गोपालगंज में SC/ST OBC मोर्चा के सदस्यों ने यूजीसी बिल लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। दर्जनों की संख्या में मोर्चा से जुड़े लोगों ने शहर की सड़कों पर आक्रोश मार्च निकाला। यह जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरा, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। उन्होंने बिल लागू न होने पर राष्ट्रीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी भी दी। ”छात्रों के शैक्षणिक और करियर के अवसरों का हनन” प्रदर्शनकारियों का मानना है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से संबंधित लंबित बिलों और आरक्षण नीतियों को कड़ाई से लागू न करने से दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों के शैक्षणिक और करियर के अवसरों का हनन हो रहा है। मोर्चा की प्रमुख मांगों में उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति और नामांकन में एससी/एसटी रोस्टर का पूर्ण पालन, पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए यूजीसी द्वारा दी जाने वाली फेलोशिप और वित्तीय सहायता को सुव्यवस्थित करना, तथा शिक्षा के क्षेत्र में संवैधानिक आरक्षण के प्रावधानों को बिना किसी छेड़छाड़ के जमीनी स्तर पर उतारना शामिल है। जुलूस केवल एक सांकेतिक प्रदर्शन जुलूस का नेतृत्व अधिवक्ता मोतीलाल प्रसाद और वैश्य युवा वाहिनी प्रदेश अध्यक्ष प्रत्यूष कुमार प्रवीण ने किया। उन्होंने कहा कि यह जुलूस केवल एक सांकेतिक प्रदर्शन है। यदि सरकार और संबंधित विभाग जल्द ही यूजीसी बिल और आरक्षण संबंधी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेते हैं, तो आने वाले समय में जिले भर में और राष्ट्रीय स्तर पर उग्र आंदोलन किया जाएगा। नेताओं ने चेतावनी दी कि शिक्षा उनका अधिकार है और बिल लागू करने में देरी होने पर वे चक्का जाम करने और सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। इस जुलूस में युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों की भारी भागीदारी देखी गई, जिसने स्थानीय प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। आक्रोश मार्च कैलाश होटल के पास स्थित बुद्ध बिहार मंदिर से निकल कर शहर के मुख्य चौक-चौराहों से गुजरा।


