Budget 2026: क्या उम्मीद, क्या आशाएं-आम आदमी को मिल सकता है क्या-क्या फायदा! जानें CAs का आकलन

Budget 2026: क्या उम्मीद, क्या आशाएं-आम आदमी को मिल सकता है क्या-क्या फायदा! जानें CAs का आकलन

दो दिन बाद यानी रविवार को इस बार छुट्टी के दिन सबकी निगाहे टिकीं रहेगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर, क्योंकि वे मोदी सरकार की तीसरी पारी का दूसरा बजट पेश करेगी। वे नौंवी बार बजट पेश कर पूरी दुनिया में सबसे अधिक बार बजट पेश करने का रेकार्ड बनाने वालीं पहली फाइनैंस मिनिस्टर बन जाएंगी।

वर्तमान वित्त मंत्री इस बार देशवासियों के लिए अपने सूटकेस से क्या-क्या सौगातें निकाल सकती है, इसी को लेकर पत्रिका डॉट कॉम ने टीवी मीडिया के चिर परिचित चेहरे सीए मनीष मल्होत्रा और सीए फर्म K G Somani & Co LLP की पार्टनर सीए तृप्ति सिंघल सोमानी से बात की है।

आम आदमी को मिल सकती है मामूली राहत

चार्टड अकाउंटेंट्स फर्म के सीए मनीष मल्होत्रा कहते है कि वैसे बजट से खास कोई उम्मीद तो नहीं है, फिर भी लग रहा है कि सरकार की ओर से स्टैंडर्ड डिडक्सन की लिमिट बढ़ सकती है। गौरतलब है कि ये लिमिट अभी 75000 रुपये की है, पर माना जा रहा है कि आम आदमी को निराश न करते हुए सरकार बजट में इस लिमिट को 1 लाख रुपये तक ले जाकर मामूली राहत देने वाला कदम उठा सकती है।

मल्होत्रा आगे कहते हैं कि टैक्स स्लैब में कोई बदलाव की उम्मीद इस बार रखना ठीक भी नहीं है। हां, लेकिन ओल्ड रिजीम अभी कन्टिनयू रहेगी क्योंकि कई लोगों ने उसी के जरिए हाउस लोन आदि ले रखा है ताकि उनको छूट का समुचित लाभ मिलता रहे। साथ ही टैक्स सिंपलिफिकेशन पर जोर रहेगा जो पिछले साल सरकार द्वारा प्रपोज भी किया गया था। हो सकता है कि कैपिटन गेन और म्यूचुअल फंड में टैक्स छूट देकर आम आदमी को थोड़ी खुशी दे सकती है सरका।

स्टार्टप और एआई ड्रिवन कंपनियों पर बजट में फोकस रह सकता है। मेक इन इंडिया के जरिए मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री रिबेट पा सकती है। हिलाओं के लिए सरकार एंटरप्रेन्योरशिप की कोई स्कीम ला सकती है।

सिल्वर पर लोग होगा गेमचेंजर

सीए मनीष का मानना है कि इस बजट का गेमचेंजर तो सिल्वर पर लोन मिलने की घोषणा हो सकती है। सिल्वर के बढ़ते दाम सरकार को इस कदम को उठाने के लिए माकूल समय दे रहे हैं। हेल्थ और एजकुशेन पर सरकार को बजट के मार्फत और फोकस करना चााहिए। पर बड़ी बात ये है कि यहां सरकार को इंश्योरेंस कंपनियों की नकेल भी कसनी होगी। पिछली बार जिस तरह सरकार ने इंश्युरेंस पर से जीएसटी कम कर आम आदमी को बड़ी राहत देने की कोशिश की थी, उस पर इन कंपनियों ने पलीता लगा दिया था। कई इंश्युरेंस कंपनियों ने अपना प्रीमियम बढ़ाकर ग्राहकों से पहले जितनी ही रकम वसूली।

ESG के खाते में भी कुछ आना जरूरी है

सीए तृप्ति आगे कहती है कि वो अभी डावोस सम्मेलन से लौटी हैं और वहां भी उन्होंने पाया कि ESG यानी Environmental, Social, and Governance पर बहुत फोकस हो रहा है। वर्तमान समय में देश की सरकार को भी इस ओर कदम बढ़ाने होंगे। आज पर्यावरण, समाज और गर्वनेंस का कॉम्बो ही किसी भी देश का सर्वागीण विकास कर सकता है। ऐसे में मुझे प्रधानमंत्री मोदी और वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से पूरी उम्मदी है कि वो इस ओर भी नजर डालते हुए कुछ स्टेप उठाएंगे।

बननी चाहिए MSME SlAB

प्रतिष्ठित सीए फर्म K G Somani & Co LLP की पार्टनर सीए तृप्ति सिंघल सोमानी आगामी बजट पर बात करते हुए बताती हैं कि कंपनी एक्ट की तुलना में पार्टनरशिप स्लैब को नहीं घटाया गया था। वे कहती हैं कि सरकार को पार्टनरशिप/एलएलपी के लिए कंपनियों के सेक्शन 115BAA की ही तरह कंशेससेनल टैक्स रिजीम लानी चाहिए ताकि उन फर्मों के लिए जो एक्सेंपशन या इंसेन्टिव नहीं लेते है, उनके लिए फ्लैट टैक्स रेट 30 प्रतिशत से घटकर 22 प्रतिशत रहना चाहिए। ज्यादतर पार्टनरशिप फर्म्स एमएसएमई होती है, 30 प्रतिशत की दर से टैक्स ठीक नहीं है, ऐसे में छोटे फैमिली बिजनेस के लिए एंटी ग्रोथ वातावरण बनता है जबकि इसके विपरीत बड़ कोर्पोरेट सिर्फ 22 प्रतिशत दर से टैक्स देते हैं. इसलिए एमएसएमई स्लैब बनना समय की माग है।

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