Bollywood Villains Tragic Death: बॉलीवुड, हॉलीवुड या हो टॉलीवुड, फिल्में सिर्फ हीरो-हीरोइन के दम पर ही नहीं चलती हैं। फिल्मों के सफल होने में उसकी कहानी, लोकेशंस, स्क्रिप्ट, म्यूजिक के साथ-साथ एक दमदार खलनायक का भी अहम योगदान होता है। इन सबके इतर एक्शन-ड्रामा फिल्मों में उसके खलनायकों का महत्वपूर्ण रोल होता है। लेकिन असल जिंदगी में इन खूंखार किरदारों को निभाने वाले कलाकारों की असल जिंदगी का अंत बेहद ही दर्दनाक और खौफनाक रहा। 60 से 90 के दशक में फिल्मों में किसी को भी मिनटों में दर्दनाक मौत देने वाले इन विलेन्स की मौत की कहानी किसी के भी रोंगटे खड़े कर देगी। किसी को किसी को गंभीर बीमारी ले गई तो किसी की लाश कमरे में पड़ी सड़ती रही।
रामी रेड्डी

साउथ से लेकर बॉलीवुड तक कई फिल्मों में काम करने वाले रामी रेड्डी को एक्टिंग में कोई रूचि नहीं थी। उन्होंने हैदराबाद में पत्रकारिता की पढ़ाई की और एक पत्रकार बन गए। इसके बाद उन्होंने वो अखबार में नौकरी करने लगे। बतौर पत्रकार रेड्डी ने कई इन्तेर्विएवस किये और इसी दौरान उन्होंने साउथ के मशहूर डायरेक्टर कोडी रामाकृष्ण का इंटरव्यू लिया। मगर किस्मत को कुछ और ही मजूर था शायद यही वजह थी कि डायरेक्टर उनसे इतना इंप्रेस हो गए थे कि उन्हें अपनी फिल्म ‘स्पॉट नाना’ में विलेन का रोल ऑफर कर दिया। बस फिर क्या था यहीं से शुरू हो गया अभिनय का रामी रेड्डी का फिल्मीं सफर। डायरेक्टर कोडी रामकृष्ण ने उन्हें 1989 में आई फिल्म ‘स्पॉट नाना’ में रामी को विलेन के रोल में साइन कर लिया। फिल्म इतनी बड़ी हिट हुई कि बॉलीवुड में भी उसको काम मिलने लगा। रामी रेड्डी ने ‘दिलवाले’, ‘आंदोलन’, ‘लोहा’, ‘गुंडा’, ‘शपथ’, ‘ऐलान’ और ना जाने ऐसी कितनी ही बॉलीवुड फिल्मों में विलेन के किरदार निभाए, ये सभी फिल्में सुपरहिट रहीं। फिल्म वक्त हमारा है में रामी रेड्डी ने कर्नल चिकारा का किरदार निभाया और ये किरदार दर्शकों के लिए यादगार बन गया।
रामी रेड्डी की दर्दनाक मौत
1990 से लेकर 2000 तक रामी रेड्डी ने कई भाषाओं की फिल्मों में काम कर चुके थे। मगर अब रामी रेड्डी की तबीयत बिगड़ने लगी थी। वो अक्सर बीमार रहने लगे, वजन लगातार घटने लगा और फिर पता चला कि वो लिवर कैंसर से पीड़ित हैं। अब वो सिर्फ हड्डियों का ढांचा भर रह गए थे। ना तो रेड्डी को फिल्में मिल रहीं थी और ना ही उनके पास कोई और काम था। फिल्ममेकर्स भी उनसे दूरी बना ली थी, उनकी हालत बहुत ज्यादा खराब हो गई थी। और फिर 14 अप्रैल 2011 को रामी रेड्डी ने इस दुनिया को अलविदा कर दिया। रामी रेड्डी हिंदी सिनेमा के उन चुनिंदा खलनायकों में शामल रह गए, जिन्हें हमेशा याद किया जाएगा।
ललिता पवार

रामानंद सागर की ‘रामायण’ में मंथरा का किरदार निभाने वाली और बॉलीवुड फिल्मों में खूंखार सास का किरदार निभाने वाली ललिता पवार ने अपने फिल्मी करियर में लगभग 700 फिल्मों में काम किया। मगर उनको असली पहचान मंथरा के किरदार ने ही दिलाई थी। इस किरदार को उन्होंने अपने अभिनय से इस कदर जीवंत कर दिया था कि लोग असलियत में उनसे नफरत करने लगे थे। हीरोइन बनाना चाहती थीं ललिता पवार, मगर एक एक फिल्म के सेट पर हुए हादसे में उनकी एक आंख चली गई और उनका एक्ट्रेस बनने का सपना अधूरा रह गया। हालांकि, इसके बाद उन्होंने केरैक्टर रोल्स करने शुरू कर दिए। जानकारी के लिए बता दें कि ललिता पवार ने दो शादियां कीं। ललिता के पहले पति गणपत पवार ने उनकी ही बहन के साथ अफेयर कर उनको धोखा दिया था। इसके बाद ललिता पवार ने उनसे तलाक लिया और राजप्रकाश गुप्ता से शादी कर ली थी।
ललिता पवार की दर्दनाक मौत
ललिता पवार अपने आखिरी समय में अकेली रहीं। उनकी मौत मुंह के कैंसर से हुई थी। वह पुणे से कैंसर का इलाज करवा रही थीं। 24 फरवरी 1988 को ललिता ने जिस समय अंतिम सांस ली थी वो अपने घर में अकेली थीं क्योंकि उनके पति अस्पताल में एडमिट थे। इसी के चलते ललिता पवार की मौत की खबर तीन दिन बाद पता चली थी। और जब घर का दरवाजा तोड़ा गया तो पुलिस को ललिता पवार की लाश मिली थी।
बिल्ला यानी माणिक ईरानी

साल 1983 में एक फिल्म आई थी जिसने बॉलीवुड को जैकी श्रॉफ उर्फ जग्गू दादा और मीनाक्षी शेषाद्रि जैसे कलाकार दिए। मगर इस फिल्म ने एक और नाम ‘बिल्ला’ दिया था। जी हां, फिल्म में खलनायक का किरदार निभाने वाले माणिक ईरानी ने अपने किरदार बिल्ला को हमेशा के लिए यादगार बना दिया था। उनका ये किरदार इतना फेमस हो गया था कि लोग उनको बिल्ला के नाम से ही जानने लगे थे। 80 से 90 के दशक में बिल्ला ने कई बड़ी फिल्मों में काम किया। बिल्ला ने 1974 में फिल्म ‘पाप और पुण्य’ से फिल्मी करियर की शुरुआत की। इन्होंने अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) के साथ भी कई फिल्में कीं। इतना ही नहीं अमिताभ बच्चन की फिल्म डॉन में उनके सारे स्टंटसीन माणिक ईरानी ने ही किये थे। बता दें कि माणिक ने बतौर बॉडी डबल फिल्मों में कदम रखा था।
बिल्ला की दर्दनाक मौत
80 और 90 के दशक में खूंखार विलेन बनकर माणिक ईरानी ने अपनी एक्टिंग से पर्दे पर ही नहीं, रील लाइफ में भी लोगों को डराया। लेकिन उनका ये खौफ धीरे-धीरे अचानक ही धूमिल हो गया क्योंकि माणिक ईरानी को शराब की लत लग गई थी। ख़बरों की मानें तो जब उनकी पत्नी उनको छोड़ कर चली गई। पत्नी के जाने के बाद उन्होंने अपने बेटे को अकेले पाला और बड़ा किया। मगर अचानक ही तबियत ख़राब होने के चलते उनके बेटे की मौत हो गई और वो अकेले रह गए जिसके बाद उन्होंने खुद को शराब के नशे में डुबो लिया और 1991 में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
महेश आनंद

लंबी-चौड़ी कद काठी, सिल्की लंबे बाल और चेहरे पर मूंछें ऐसे विलेन पर भला कौन न फिदा हो जाए। हम बात कर रहे हैं महेश आनंद की, जिन्होंने अपने लुक और एक्टिंग दोनों ही दर्शकों का दिल जीता था। महेश ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की थी। महेश आनंद एक्टर तो जबरदस्त थे ही डांसर और मार्शल आर्टिस्ट भी थे। इन्होंने हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगु और मलयालम भाषा की भई फिल्में की थीं। डांसर के रोल से फिल्मों में कदम रखने के बावजूद उनकी पहचान एक विलेन के तौर पर बनीं। इन्होंने ‘करिश्मा’, ‘शहंशाह’, ‘इंसाफ’, ‘इलाका’, ‘गंगा जमुना सरस्वती’ और ‘तूफान’ जैसी ढेरों फिल्मों में काम किया।
5 शादी करके भी अकेले थे
5 शादी करने के बाद भी महेश आनंद के जीवन में अकेलापन था। पहली शादी, एक्ट्रेस रीना रॉय की बहन बरखा रॉय से की थी, वो एक फिल्म प्रड्यूसर हैं। इन्होंने दूसरी शादी मिस इंडिया इंटरनैशनल एरिका मारिया डिसूजा से की। इसके बाद, 1992 में एक्ट्रेस मधु मल्होत्रा से तीसरी शादी की। फिर, साल 2000 में चौथी शादी ऊषा बच्चानी से और साल 2015 में पांचवी शादी रूसी महिला से की थी। पांच-पांच जीवनसाथी मिलने के बाद भी उनकी आखिरी जिंदगी बहुत ही कष्टदायी थी।
निजी जिंदगी थी दर्दनाक
57 साल की उम्र में 2019 को महेश आनंद ने अंधेरी स्थित अपने फ्लैट में अंतिम सांस ली। लेकिन पुलिस वालों का कहना था कि, दो दिन से इनकी लाश बंद कमरे में पड़ी थी और सड़ने लगी थी। इनकी बॉडी के पास दारू की बोतल और खाना मिला। इसके अलावा, इनके घर का टीवी ऑन था। महेश काफी समय से बेरोजगारी से जूझ रहे थे। इसके चलते वो डिप्रेशन में चले गए थे। हालांकि, उन्हें गोविंदा के साथ फिल्म ‘रंगीला राजा’ में काम मिला था, मगर ये रोल कुछ खास नहीं था। आर्थिक तंगी, बेरोजगारी, शराब की लत और डिप्रेशन ने एक इतने खूंखार विलेन को निगल लिया।
गैविन पैकर्ड

आपको 90 की दशक के विलेन ‘चिकना’ तो याद होंगे, जिनका असली नाम गैविन पैकर्ड था। गोरे-चिट्टे, बॉडीबिल्डर गैविन पैकर्ड का फिल्मों में दबदबा था। उनकी खलनायकी के आगे हीरो भी फीके पड़ जाते थे। इन्होंने ‘ये है जलवा’, ‘सड़क’, ‘मोहरा’, ‘तड़ीपार’ और ‘चमत्कार’ जैसी फिल्मों में काम किया है। साथ ही, गैविन ने मलयालम भाषा की फिल्में भी की थीं। गैविन ने साल 2000 में फिल्मों को अलविदा कह दिया था।
एक्टर के साथ बॉडीबिल्डर भी थे
गैविन पैकर्ड नेशनल अवॉर्ड विनिंग बॉडीबिल्डर थे। इन्होंने सलमान खान के बॉडीगार्ड शेरा को बॉडी बिल्डिंग सिखाई थी। इसके अलावा, संजय दत्त और सुनील शेट्टी तक को ट्रेन किया था।
सांस की बीमारी से जूझ रहे थे
गैविन पैकर्ड को सांस की बीमारी थी। इसी के चलते साल 2012 में वो इस दुनिया से चले गए। रिपोर्ट्स की मानें तो, फिल्मों में इतना काम करने के बावजूद भी उनकी अंतिम विदाई में फिल्म इंडस्ट्री के कुछ ही लोग पहुंचे थे।
फिल्मी दुनिया चकाचौंध पर ही सीमित है। पर्दे के आगे इसकी सच्चाई बहुत ही कड़वी है जिसे सब नहीं निगल पाते हैं। इस वजह से कई ऐसे स्टार्स हैं जो गुमनामी की दलदल में कहीं खो गए।


