मऊगंज जिले में कस्तूरबा गांधी छात्रावास की वार्डन के निलंबन का मामला अब गर्माता जा रहा है। अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) ने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए कलेक्टर दफ्तर में ज्ञापन सौंपा है। संघ का कहना है कि यह कार्रवाई बदले की भावना से की गई है और अगर इसे वापस नहीं लिया गया, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। अजाक्स के जिला अध्यक्ष अर्जुन रावत और अन्य सदस्यों ने संयुक्त कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में कहा कि वार्डन शकुन्तला नीरत ने छात्रावास में हो रहे भ्रष्टाचार की आवाज उठाई थी। आरोप है कि दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय शिकायत करने वाली महिला शिक्षक को ही सस्पेंड कर दिया गया। संघ ने इस आदेश को तुरंत रद्द करने की मांग की है। नियमों को ताक पर रखकर कार्रवाई का आरोप संघ का तर्क है कि एक ही मामले में पहले उनसे प्रभार छीना गया, फिर निलंबित किया गया और अब जांच की जा रही है, जो कि न्याय के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि उच्च श्रेणी शिक्षक का पद संभाग स्तर का होता है, इसलिए जिला स्तर से किया गया निलंबन नियमों के हिसाब से सही नहीं है। संघ ने इसे एक दलित महिला शिक्षक का उत्पीड़न करार दिया है। प्रशासन को एक हफ्ते की चेतावनी अजाक्स ने साफ कर दिया है कि वार्डन पर लगाए गए पैसों की हेराफेरी के आरोप बेबुनियाद हैं, क्योंकि इसकी कोई ऑडिट रिपोर्ट नहीं आई है। संघ ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर एक हफ्ते के भीतर निलंबन वापस नहीं हुआ, तो वे सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर सड़कों पर उतरेंगे। इस आंदोलन से होने वाली किसी भी परेशानी की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।


