Monkey Fever: निपाह के बाद अब मंकी फीवर का कहर! ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें

Monkey Fever: निपाह के बाद अब मंकी फीवर का कहर! ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें

Monkey Fever: निपाह वायरस का कहर अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि अब ‘मंकी फीवर’ ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में इस बीमारी से हुई पहली मौत से यह बात तो साफ है कि इस बीमारी का प्रकोप बरकरार है। यह बीमारी मुख्य रूप से बंदरों में पाए जाने वाले पिस्सुओं और किलनियों के काटने से फैलती है और यही कारण है कि इसे मंकी फीवर के नाम से जाना जाता है। आइए जानते हैं कि यह बीमारी क्या होती है और इसके कारण, लक्षण व बचाव के उपाय क्या हैं।

मंकी फीवर (KFD) क्या होता है?(Kyasanur Forest Disease)

यह एक प्रकार का वायरल बुखार होता है जो फ्लेविवायरस (Flavivirus) के कारण होता है। इसकी पहचान सबसे पहले 1957 में कर्नाटक के क्यासानूर जंगलों में हुई थी। यह मुख्य रूप से बंदरों को प्रभावित करता है और उनके जरिए इंसानों तक पहुंचता है।

मंकी फीवर (KFD) के कारण क्या होते हैं?(Monkey Fever Cause)

  • संक्रमित किलनी (Ticks) का काटना।
  • संक्रमित बंदरों के सीधे संपर्क में आना।
  • जंगल के आस-पास निवास स्थान होना या वहां काम करना।

मंकी फीवर (KFD) के लक्षण क्या होते हैं?(Monkey Fever Symptoms)

  • अचानक बहुत तेज बुखार आना।
  • गंभीर रूप से सिर में दर्द होना।
  • पेट में दर्द, उल्टी या दस्त होना।
  • शरीर के अंगों से रक्तस्राव (Bleeding) होना।
  • मरीज को चक्कर आना या दिमागी उलझन के कारण बेहोश हो जाना।

मंकी फीवर से कैसे बचें?(Monkey Fever Prevention)

  • नवंबर से जून के मध्य जंगलों में जाने से बचें।
  • यदि जंगल में जाना जरूरी हो, तो शरीर को ढकने वाले पूरी बाजू के कपड़े पहनें।
  • जंगलों में रहने वाले लोगों को टीकाकरण (Vaccination) जरूर कराना चाहिए।

डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से न आजमाएं, बल्कि इस बारे में संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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