सहरसा में 1 फरवरी को रविदास जयंती महोत्सव:लोक कला और संस्कृति के संरक्षण पर रहेगा विशेष जोर, रविदास मंदिर परिसर में होगा कार्यक्रम

सहरसा में 1 फरवरी को रविदास जयंती महोत्सव:लोक कला और संस्कृति के संरक्षण पर रहेगा विशेष जोर, रविदास मंदिर परिसर में होगा कार्यक्रम

सहरसा में 1 फरवरी को संत शिरोमणि रविदास जयंती महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। यह महोत्सव जिला प्रशासन और कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में होगा। जिला कला संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा ने बताया कि कार्यक्रम जिलाधिकारी दीपेश कुमार के नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है। महोत्सव का मुख्य उद्देश्य संत रविदास के विचारों, सामाजिक संदेशों और उनके मानवतावादी दर्शन को जन-जन तक पहुंचाना है। इसके साथ ही, समाज में प्रचलित लोक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन को भी इस आयोजन के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाएगा। रविदास मंदिर परिसर में होगा कार्यक्रम कार्यक्रम का प्रथम सत्र रविदास मंदिर परिसर में होगा। यहां मुख्य अतिथियों की उपस्थिति में विधिवत शुभारंभ किया जाएगा। इस दौरान भजन-कीर्तन, प्रसाद वितरण तथा अन्य धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। संत रविदास के भक्ति संदेशों से जुड़े भजनों की प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण मिलेगा। दूसरे सत्र में शहर के प्रेक्षागृह में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें संत रविदास की जीवनी पर आधारित व्याख्यान प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे आमजन को उनके जीवन, संघर्ष और सामाजिक समरसता के संदेशों से अवगत कराया जाएगा। इसके बाद बिहार की विलुप्त होती लोक परंपरा “रसन चौसी” का वादन प्रस्तुत किया जाएगा। यह लोक विधा विवाह और मुंडन जैसे पारंपरिक अवसरों पर गाई जाती थी, जो अब लगभग लुप्त होने की कगार पर है। परंपरा को किया जाएगा पुनर्जीवित कला संस्कृति विभाग का प्रयास है कि ऐसे कलाकारों को मंच और संरक्षण देकर इस परंपरा को पुनर्जीवित किया जाए। महोत्सव के तहत संत रविदास के प्रसिद्ध कथन “मन चंगा तो कठौती में गंगा” पर आधारित नाटक का मंचन भी होगा, जिसे स्थानीय रंगमंच के कलाकार प्रस्तुत करेंगे। इसके अतिरिक्त, शास्त्रीय संगीत एवं शास्त्रीय नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियां भी होंगी। कार्यक्रम के समापन चरण में बाहर से आमंत्रित कलाकार संत रविदास के भजन, होली गीत और अन्य सांस्कृतिक गीत प्रस्तुत करेंगे। यह महोत्सव श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक चेतना का एक सशक्त मंच साबित होगा। सहरसा में 1 फरवरी को संत शिरोमणि रविदास जयंती महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। यह महोत्सव जिला प्रशासन और कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में होगा। जिला कला संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा ने बताया कि कार्यक्रम जिलाधिकारी दीपेश कुमार के नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है। महोत्सव का मुख्य उद्देश्य संत रविदास के विचारों, सामाजिक संदेशों और उनके मानवतावादी दर्शन को जन-जन तक पहुंचाना है। इसके साथ ही, समाज में प्रचलित लोक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन को भी इस आयोजन के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाएगा। रविदास मंदिर परिसर में होगा कार्यक्रम कार्यक्रम का प्रथम सत्र रविदास मंदिर परिसर में होगा। यहां मुख्य अतिथियों की उपस्थिति में विधिवत शुभारंभ किया जाएगा। इस दौरान भजन-कीर्तन, प्रसाद वितरण तथा अन्य धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। संत रविदास के भक्ति संदेशों से जुड़े भजनों की प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण मिलेगा। दूसरे सत्र में शहर के प्रेक्षागृह में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें संत रविदास की जीवनी पर आधारित व्याख्यान प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे आमजन को उनके जीवन, संघर्ष और सामाजिक समरसता के संदेशों से अवगत कराया जाएगा। इसके बाद बिहार की विलुप्त होती लोक परंपरा “रसन चौसी” का वादन प्रस्तुत किया जाएगा। यह लोक विधा विवाह और मुंडन जैसे पारंपरिक अवसरों पर गाई जाती थी, जो अब लगभग लुप्त होने की कगार पर है। परंपरा को किया जाएगा पुनर्जीवित कला संस्कृति विभाग का प्रयास है कि ऐसे कलाकारों को मंच और संरक्षण देकर इस परंपरा को पुनर्जीवित किया जाए। महोत्सव के तहत संत रविदास के प्रसिद्ध कथन “मन चंगा तो कठौती में गंगा” पर आधारित नाटक का मंचन भी होगा, जिसे स्थानीय रंगमंच के कलाकार प्रस्तुत करेंगे। इसके अतिरिक्त, शास्त्रीय संगीत एवं शास्त्रीय नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियां भी होंगी। कार्यक्रम के समापन चरण में बाहर से आमंत्रित कलाकार संत रविदास के भजन, होली गीत और अन्य सांस्कृतिक गीत प्रस्तुत करेंगे। यह महोत्सव श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक चेतना का एक सशक्त मंच साबित होगा।  

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