समावेशी राष्ट्रवाद व समकालीन राजनीतिक विमर्श पर हुई चर्चा

भास्कर न्यूज| पूर्णिया संविधान सभा के सदस्य रहे पूर्णिया के पूर्व सांसद मो. ताहिर साहेब की स्मृति में एक विचार संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें भारतीय लोकतंत्र की मूल भावना,समावेशी राष्ट्रवाद व समकालीन राजनीतिक विमर्श की दिशा पर चर्चा हुई। वीवीआईटी में जनमन पीपुल्स फाउंडेशन,सब हिमालयन रिसर्च इंस्टिट्यूट द्वारा विचारोत्तेजक व सारगर्भित विचार संगोष्ठी की अध्यक्षता जेएनयू के प्रो.डॉ मणीन्द्रनाथ ठाकुर ने की। इसका विषय भारत का राष्ट्र निर्माण संविधान सभा की भावना और आज की राजनीतिक बहसें,रखा गया था। इसमें भारतीय लोकतंत्र की मूल भावना,समावेशी राष्ट्रवाद तथा समकालीन राजनीतिक विमर्श की दिशा पर गहन चर्चा की गई। वक्ताओं ने खुलकर अपनी बातें रखी। इस कार्यक्रम में मो. ताहिर साहेब के सबसे छोटे बेटे शौकत ने भी शिरकत कर अपने विचारों को साझा किया। वीवीआईटी के चेयरमैन ई. राजेश मिश्रा ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया। डॉ रमन ने संचालन व शौर्य रॉय ने इस कार्यक्रम की भूमिका रखी। युवाओं से लोकतंत्र की जिम्मेदारी समझने का आह्वान मुख्य वक्ता लेखक व विचारक प्रेम कुमार मणि ने कहा-भारतीय संविधान केवल कानूनों का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित एक परिवर्तनकारी राष्ट्रीय परियोजना है। भास्कर न्यूज| पूर्णिया संविधान सभा के सदस्य रहे पूर्णिया के पूर्व सांसद मो. ताहिर साहेब की स्मृति में एक विचार संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें भारतीय लोकतंत्र की मूल भावना,समावेशी राष्ट्रवाद व समकालीन राजनीतिक विमर्श की दिशा पर चर्चा हुई। वीवीआईटी में जनमन पीपुल्स फाउंडेशन,सब हिमालयन रिसर्च इंस्टिट्यूट द्वारा विचारोत्तेजक व सारगर्भित विचार संगोष्ठी की अध्यक्षता जेएनयू के प्रो.डॉ मणीन्द्रनाथ ठाकुर ने की। इसका विषय भारत का राष्ट्र निर्माण संविधान सभा की भावना और आज की राजनीतिक बहसें,रखा गया था। इसमें भारतीय लोकतंत्र की मूल भावना,समावेशी राष्ट्रवाद तथा समकालीन राजनीतिक विमर्श की दिशा पर गहन चर्चा की गई। वक्ताओं ने खुलकर अपनी बातें रखी। इस कार्यक्रम में मो. ताहिर साहेब के सबसे छोटे बेटे शौकत ने भी शिरकत कर अपने विचारों को साझा किया। वीवीआईटी के चेयरमैन ई. राजेश मिश्रा ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया। डॉ रमन ने संचालन व शौर्य रॉय ने इस कार्यक्रम की भूमिका रखी। युवाओं से लोकतंत्र की जिम्मेदारी समझने का आह्वान मुख्य वक्ता लेखक व विचारक प्रेम कुमार मणि ने कहा-भारतीय संविधान केवल कानूनों का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित एक परिवर्तनकारी राष्ट्रीय परियोजना है।  

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