राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) की ओर से गोरखपुर में पहली बार कम्यूनिकेशन, इलेक्ट्रानिक्स व डिजिटल टेक्नोलॉजीज पर आधारित दो दिवसीय इंटरनेशनल कांफ्रेंस हो रही है। होटल कोर्टयार्ड बाय मैरिएट में आयोजित इस कांफ्रेंस में रोबोट डॉग दौड़ता रहा। दो पैरों पर खड़ा होकर अभिवादन करता, हाथ भी हिलाता।
कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के सीटीओ केशरी के अस्थाना ने कहा कि AI व क्लाउड कंप्यूटिंग इंसान के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सम्मेलन उभरती प्रौद्योगिकी को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी तकनीकों का प्रभाव गोरखपुर जैसे उभरते क्षेत्रों के लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रिटायर्ड आईएएस व सार्वजनिक उपक्रम चयन बोर्ड के सदस्य अलकेश शर्मा ने कांफ्रेंस का लोकार्पण किया। उन्होंने डिजिटल प्रौद्योगिकियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा नवाचार-आधारित अनुसंधान की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये तत्व समावेशी विकास को गति देने एवं भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने डिजिटल इंडिया एवं आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु शिक्षा, उद्योग और सरकार के बीच सशक्त सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। NIELIT के महानिदशक एमएम त्रिपाठी ने सभी का स्वागत किया। उन्होंने नाइलिट की डिजिटल कौशल विकास, उच्च शिक्षा एवं उन्नत शोध के क्षेत्र में बढ़ती भूमिका को दर्शाया। उन्होंने कहा कि यह दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं डिजिटल प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में नवीनतम शोध, नवाचार और भावी संभावनाओं पर विचार-विमर्श हेतु शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं एवं विद्यार्थियों को एक साझा वैश्विक मंच प्रदान करता है। माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के सीटीओ केशरी के अस्थाना ने कहा कि एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी तकनीकों का प्रभाव गोरखपुर जैसे उभरते क्षेत्रों के लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय देहरादून की कुलपति डा. त्रिप्ता ठाकुर ने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन छात्रों और शोधकर्ताओं को उभरती प्रौद्योगिकियों के साथ जुड़ने और उद्योग-अकादमिक सहयोग के अवसर प्रदान करते हैं। डॉ. नीरजा गुप्ता, कुलपति, गुजरात विश्वविद्यालय ने उभरती तकनीकों के राष्ट्रीय सुरक्षा में महत्व को उजागर किया। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर चर्चा को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। 500 से अधिक विद्वानों व शोधकर्ताओं की सहभागिता
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश एवं विदेशों से 500 से अधिक शोधकर्ताओं एवं लेखकों ने सहभागिता की है। सम्मेलन के दौरान तकनीकी शोध पत्र प्रस्तुतियां, मुख्य व्याख्यान, पैनल चर्चाएं तथा विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें अगली पीढ़ी की संचार प्रणालियां, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल परिवर्तन जैसे उभरते विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जा रहा है। डॉ. डीके मिश्रा, निदेशक, नाइलिट गोरखपुर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। थीमेटिक स्टॉल बढ़ा रहे सम्मेलन का आकर्षण
सम्मेलन के अंतर्गत देशभर के नाइलिट केंद्रों द्वारा साइबर सुरक्षा, वीएलएसआई, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों पर आधारित विभिन्न थीमेटिक स्टॉल प्रदर्शित किए गए। इसके साथ ही डिजिटल जागरूकता को बढ़ावा देने हेतु ड्रोन प्रौद्योगिकी, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न स्टार्ट-अप कंपनियों ने अपने नवाचारों का प्रदर्शन किया, जिसे आगंतुकों द्वारा विशेष सराहना मिली।


