इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के राजातालाब के एस डी एम व तहसीलदार को नौ फरवरी को दस बजे कोर्ट में इस स्पष्टीकरण के साथ हाजिर होने का निर्देश दिया है कि ध्वस्तीकरण मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का उल्लंघन करते हुए उन्होंने याची की बेदखली आदेश व कार्यवाही कैसे की। क्यों न उनके खिलाफ आदेश की अवहेलना करने की कार्यवाही की जाय। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने लल्लन प्रसाद यादव व 8 अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। याचीगण के खिलाफ 2006 मे राजस्व संहिता की धारा 34 मे बेदखली की कार्यवाही शुरू की गई।एस डी एम ने बेदखली आदेश पारित किया। जिसके खिलाफ याची ने अपर आयुक्त वाराणसी के समक्ष अपील दाखिल की है जो विचाराधीन है। उसमें कोई अंतरिम राहत नहीं दी गई तो हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बेदखली पर रोक लगाने की मांग की गई है। सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि 25 सितंबर 25 के एस डी एम के आदेश पर तहसीलदार ने 11 दिसंबर 25 को राजस्व अधिकारियों की एक टीम गठित की और याची की बेदखली कर दी गई है। कोर्ट ने ध्वस्तीकरण मामले में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लेख करते हुए कहा कि बेदखली प्रक्रिया के तहत नोटिस और सुनवाई का पूरा मौका दिया जाय, फिर फाइनल आदेश के खिलाफ अपील का अवसर दिया जाय। इसके फैसले के बाद ध्वस्तीकरण कार्यवाही की जाय। कोर्ट ने कहा एस डी एम व तहसीलदार की कार्यवाही न केवल विधि विरुद्ध है अपितु सुप्रीम कोर्ट के आदेश का खुला उल्लघंन है। और दोनों अधिकारियों को व्यक्तिगत या वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सफाई के लिए हाजिर होने का निर्देश दिया है।


