शहीद पत्रकार गौरी लंकेश की 64वीं जयंती मनाई गई:कटिहार में बहुजन समाज की महिलाओं ने कार्यक्रम आयोजित किया

शहीद पत्रकार गौरी लंकेश की 64वीं जयंती मनाई गई:कटिहार में बहुजन समाज की महिलाओं ने कार्यक्रम आयोजित किया

कटिहार के हसनगंज और डंडखोरा में गुरुवार को बहुजन समाज की महिलाओं ने शहीद पत्रकार गौरी लंकेश की 64वीं जयंती मनाई। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं शामिल हुईं। इस अवसर पर बहुजन चिंतक एवं समाजसेवी लक्ष्मीकांत प्रसाद ने कहा कि जन चेतना और सामाजिक न्याय के उद्देश्य से ग्रामीण महिलाओं के बीच गौरी लंकेश की जयंती मनाई जा रही है। उन्होंने गौरी लंकेश को भारत की एक बहादुर बेटी, निडर पत्रकार, संपादक और सामाजिक कार्यकर्ता बताया, जिन्होंने हमेशा सच और न्याय का पक्ष लिया। अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया स्थानीय उषा दीदी ने अपने संबोधन में गौरी लंकेश को एक निर्भीक पत्रकार बताया, जिन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव और कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने बताया कि गौरी लंकेश बेंगलुरु से प्रकाशित अपनी साप्ताहिक पत्रिका ‘गौरी लंकेश पत्रिके’ के माध्यम से दक्षिणपंथी राजनीति और सांप्रदायिकता के खिलाफ मुखर थीं। महिलाओं का इतिहास संघर्ष और बलिदान से भरा रहा उषा दीदी ने यह भी उल्लेख किया कि 5 सितंबर 2017 को बेंगलुरु में उनके आवास के बाहर गोली मारकर की गई हत्या को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना जाता है। वक्ताओं ने जोर दिया कि बहुजन समाज की महिलाओं का इतिहास संघर्ष और बलिदान से भरा रहा है, और ऐसे हमलों से समाज भयभीत नहीं होगा। कार्यक्रम में प्रियंका, नथनी देवी, पिंकी देवी, तारा देवी, गीता देवी, पार्वती देवी, चिंती देवी, ललिता देवी, रसोमनी देवी, हरा देवी, प्रीतम, साबिया देवी, आशा देवी और राजेश कुमार सहित कई लोग उपस्थित थे। कटिहार के हसनगंज और डंडखोरा में गुरुवार को बहुजन समाज की महिलाओं ने शहीद पत्रकार गौरी लंकेश की 64वीं जयंती मनाई। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं शामिल हुईं। इस अवसर पर बहुजन चिंतक एवं समाजसेवी लक्ष्मीकांत प्रसाद ने कहा कि जन चेतना और सामाजिक न्याय के उद्देश्य से ग्रामीण महिलाओं के बीच गौरी लंकेश की जयंती मनाई जा रही है। उन्होंने गौरी लंकेश को भारत की एक बहादुर बेटी, निडर पत्रकार, संपादक और सामाजिक कार्यकर्ता बताया, जिन्होंने हमेशा सच और न्याय का पक्ष लिया। अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया स्थानीय उषा दीदी ने अपने संबोधन में गौरी लंकेश को एक निर्भीक पत्रकार बताया, जिन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव और कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने बताया कि गौरी लंकेश बेंगलुरु से प्रकाशित अपनी साप्ताहिक पत्रिका ‘गौरी लंकेश पत्रिके’ के माध्यम से दक्षिणपंथी राजनीति और सांप्रदायिकता के खिलाफ मुखर थीं। महिलाओं का इतिहास संघर्ष और बलिदान से भरा रहा उषा दीदी ने यह भी उल्लेख किया कि 5 सितंबर 2017 को बेंगलुरु में उनके आवास के बाहर गोली मारकर की गई हत्या को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना जाता है। वक्ताओं ने जोर दिया कि बहुजन समाज की महिलाओं का इतिहास संघर्ष और बलिदान से भरा रहा है, और ऐसे हमलों से समाज भयभीत नहीं होगा। कार्यक्रम में प्रियंका, नथनी देवी, पिंकी देवी, तारा देवी, गीता देवी, पार्वती देवी, चिंती देवी, ललिता देवी, रसोमनी देवी, हरा देवी, प्रीतम, साबिया देवी, आशा देवी और राजेश कुमार सहित कई लोग उपस्थित थे।  

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