सहरसा में निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों से मनमानी फीस और स्टेशनरी के नाम पर वसूली की प्रथा पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने एक आदेश जारी कर निजी स्कूलों की इस ‘एकाधिकार’ वाली व्यवस्था पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अभिभावकों और सामाजिक संगठनों द्वारा लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि जिले के निजी स्कूल संचालक किताबें, यूनिफॉर्म, बैग और जूते जैसी सामग्री अत्यधिक महंगी कीमतों पर बेच रहे हैं। साथ ही, अभिभावकों को किसी विशेष दुकान या स्कूल काउंटर से ही सामान खरीदने के लिए मजबूर किया जाता था। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत निषेधाज्ञा लागू जिलाधिकारी ने इस प्रथा को अनुचित आर्थिक बोझ मानते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत निषेधाज्ञा लागू की है। आदेश के अनुसार, कोई भी स्कूल संचालक या प्राचार्य अब छात्रों को स्कूल की यूनिफॉर्म, जूते, टाई, किताबें या कॉपियां किसी खास दुकान या विक्रेता से खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा। अभिभावक खुले बाजार से अपनी सुविधा और बजट के अनुसार सामान खरीद सकेंगे। स्कूल की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करना होगा डिटेल्स सभी निजी स्कूलों को अनिवार्य पुस्तकों और यूनिफॉर्म की पूरी सूची और विवरण 10 फरवरी 2026 से पहले स्कूल की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करना होगा। अभिभावकों को राहत देते हुए डीएम ने आदेश दिया है कि स्कूल प्रशासन यूनिफॉर्म में कम से कम 3 वर्षों तक कोई बदलाव नहीं करेगा। जिलाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई स्कूल इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो संबंधित व्यक्ति, संस्था या आयोजक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आदेश की अवहेलना करने पर स्कूल के प्राचार्य, संचालक, प्रबंधक और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सभी सदस्य सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और पूरे सहरसा जिले में प्रभावी रहेगा। प्रशासन के इस कदम से अभिभावकों को राहत मिली है। सहरसा में निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों से मनमानी फीस और स्टेशनरी के नाम पर वसूली की प्रथा पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने एक आदेश जारी कर निजी स्कूलों की इस ‘एकाधिकार’ वाली व्यवस्था पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अभिभावकों और सामाजिक संगठनों द्वारा लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि जिले के निजी स्कूल संचालक किताबें, यूनिफॉर्म, बैग और जूते जैसी सामग्री अत्यधिक महंगी कीमतों पर बेच रहे हैं। साथ ही, अभिभावकों को किसी विशेष दुकान या स्कूल काउंटर से ही सामान खरीदने के लिए मजबूर किया जाता था। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत निषेधाज्ञा लागू जिलाधिकारी ने इस प्रथा को अनुचित आर्थिक बोझ मानते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत निषेधाज्ञा लागू की है। आदेश के अनुसार, कोई भी स्कूल संचालक या प्राचार्य अब छात्रों को स्कूल की यूनिफॉर्म, जूते, टाई, किताबें या कॉपियां किसी खास दुकान या विक्रेता से खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा। अभिभावक खुले बाजार से अपनी सुविधा और बजट के अनुसार सामान खरीद सकेंगे। स्कूल की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करना होगा डिटेल्स सभी निजी स्कूलों को अनिवार्य पुस्तकों और यूनिफॉर्म की पूरी सूची और विवरण 10 फरवरी 2026 से पहले स्कूल की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करना होगा। अभिभावकों को राहत देते हुए डीएम ने आदेश दिया है कि स्कूल प्रशासन यूनिफॉर्म में कम से कम 3 वर्षों तक कोई बदलाव नहीं करेगा। जिलाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई स्कूल इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो संबंधित व्यक्ति, संस्था या आयोजक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आदेश की अवहेलना करने पर स्कूल के प्राचार्य, संचालक, प्रबंधक और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सभी सदस्य सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और पूरे सहरसा जिले में प्रभावी रहेगा। प्रशासन के इस कदम से अभिभावकों को राहत मिली है।


