किशनगंज में नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में विशेष पोक्सो अदालत ने आरोपी को कड़ी सजा सुनाई है। गुरुवार को अनन्य विशेष न्यायाधीश (पोक्सो अधिनियम) दीप चंद पांडेय की अदालत ने आरोपी को 20 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त 6 माह की सश्रम कारावास भुगतनी होगी। यह मामला वर्ष 2020 का है, जिसमें पीड़िता को करीब 6 साल बाद न्याय मिला है। कोढोबारी थाना क्षेत्र का मामला अदालत के अनुसार, यह मामला वाद संख्या 18/2020 के अंतर्गत कोढोबारी थाना कांड संख्या 9/2020 से संबंधित है। इस मामले में कोढोबारी थाना क्षेत्र के निवासी संजय कुमार को आरोपी बनाया गया था। जांच और सुनवाई के दौरान आरोपी के खिलाफ लगे आरोप प्रमाणित पाए गए, जिसके बाद अदालत ने उसे दोषी करार दिया। मजबूत साक्ष्यों के आधार पर सजा मामले की जांच के दौरान पुलिस ने कई अहम और ठोस साक्ष्य जुटाए थे। इनमें पीड़िता का न्यायालय में दिया गया बयान, चिकित्सकीय जांच रिपोर्ट, घटनास्थल से जुड़े परिस्थितिजन्य प्रमाण शामिल थे। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य विश्वसनीय और आरोपी के खिलाफ पर्याप्त हैं। विशेष लोक अभियोजक की सख्त पैरवी मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक मनीष कुमार साह ने सजा के बिंदु पर प्रभावी और सशक्त जिरह पेश की। उन्होंने अदालत के समक्ष उपलब्ध साक्ष्यों का विस्तार से विश्लेषण करते हुए आरोपी को कठोरतम सजा दिए जाने की मांग की। अदालत ने अभियोजन की दलीलों को स्वीकार करते हुए यह स्पष्ट किया कि नाबालिग के साथ दुष्कर्म जैसे अपराध समाज के लिए अत्यंत घातक हैं और इनमें सख्त सजा आवश्यक है। पीड़िता को मिलेगा 5 लाख का मुआवजा अदालत ने पीड़िता और उसके परिवार को राहत देते हुए 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। इसके साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि आरोपी पर लगाया गया 50 हजार रुपये का अर्थदंड पीड़िता को ही प्रदान किया जाएगा। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता को हुए मानसिक, शारीरिक और सामाजिक आघात को देखते हुए यह मुआवजा आवश्यक है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त संदेश अदालत का यह फैसला बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को लेकर समाज में एक सख्त संदेश देता है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पोक्सो एक्ट का उद्देश्य न केवल पीड़ितों को न्याय दिलाना है, बल्कि ऐसे अपराधों पर रोक लगाना भी है। परिवार और सामाजिक संगठनों ने किया फैसले का स्वागत पीड़िता के परिवार ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है। परिजनों का कहना है कि भले ही न्याय मिलने में समय लगा, लेकिन उन्हें भरोसा है कि यह फैसला भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने में मदद करेगा। वहीं, कई सामाजिक संगठनों ने भी अदालत के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी सख्त सजाएं अपराधियों में डर पैदा करेंगी और बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करेंगी। किशनगंज में पोक्सो मामलों पर नजर गौरतलब है कि किशनगंज जिले में पिछले कुछ वर्षों में पोक्सो एक्ट के तहत कई मामले सामने आए हैं। ऐसे में अदालत का यह फैसला कानून व्यवस्था को मजबूत करने और नाबालिगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। किशनगंज में नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में विशेष पोक्सो अदालत ने आरोपी को कड़ी सजा सुनाई है। गुरुवार को अनन्य विशेष न्यायाधीश (पोक्सो अधिनियम) दीप चंद पांडेय की अदालत ने आरोपी को 20 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त 6 माह की सश्रम कारावास भुगतनी होगी। यह मामला वर्ष 2020 का है, जिसमें पीड़िता को करीब 6 साल बाद न्याय मिला है। कोढोबारी थाना क्षेत्र का मामला अदालत के अनुसार, यह मामला वाद संख्या 18/2020 के अंतर्गत कोढोबारी थाना कांड संख्या 9/2020 से संबंधित है। इस मामले में कोढोबारी थाना क्षेत्र के निवासी संजय कुमार को आरोपी बनाया गया था। जांच और सुनवाई के दौरान आरोपी के खिलाफ लगे आरोप प्रमाणित पाए गए, जिसके बाद अदालत ने उसे दोषी करार दिया। मजबूत साक्ष्यों के आधार पर सजा मामले की जांच के दौरान पुलिस ने कई अहम और ठोस साक्ष्य जुटाए थे। इनमें पीड़िता का न्यायालय में दिया गया बयान, चिकित्सकीय जांच रिपोर्ट, घटनास्थल से जुड़े परिस्थितिजन्य प्रमाण शामिल थे। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य विश्वसनीय और आरोपी के खिलाफ पर्याप्त हैं। विशेष लोक अभियोजक की सख्त पैरवी मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक मनीष कुमार साह ने सजा के बिंदु पर प्रभावी और सशक्त जिरह पेश की। उन्होंने अदालत के समक्ष उपलब्ध साक्ष्यों का विस्तार से विश्लेषण करते हुए आरोपी को कठोरतम सजा दिए जाने की मांग की। अदालत ने अभियोजन की दलीलों को स्वीकार करते हुए यह स्पष्ट किया कि नाबालिग के साथ दुष्कर्म जैसे अपराध समाज के लिए अत्यंत घातक हैं और इनमें सख्त सजा आवश्यक है। पीड़िता को मिलेगा 5 लाख का मुआवजा अदालत ने पीड़िता और उसके परिवार को राहत देते हुए 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। इसके साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि आरोपी पर लगाया गया 50 हजार रुपये का अर्थदंड पीड़िता को ही प्रदान किया जाएगा। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता को हुए मानसिक, शारीरिक और सामाजिक आघात को देखते हुए यह मुआवजा आवश्यक है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त संदेश अदालत का यह फैसला बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को लेकर समाज में एक सख्त संदेश देता है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पोक्सो एक्ट का उद्देश्य न केवल पीड़ितों को न्याय दिलाना है, बल्कि ऐसे अपराधों पर रोक लगाना भी है। परिवार और सामाजिक संगठनों ने किया फैसले का स्वागत पीड़िता के परिवार ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है। परिजनों का कहना है कि भले ही न्याय मिलने में समय लगा, लेकिन उन्हें भरोसा है कि यह फैसला भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने में मदद करेगा। वहीं, कई सामाजिक संगठनों ने भी अदालत के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी सख्त सजाएं अपराधियों में डर पैदा करेंगी और बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करेंगी। किशनगंज में पोक्सो मामलों पर नजर गौरतलब है कि किशनगंज जिले में पिछले कुछ वर्षों में पोक्सो एक्ट के तहत कई मामले सामने आए हैं। ऐसे में अदालत का यह फैसला कानून व्यवस्था को मजबूत करने और नाबालिगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।


