भारत-पाकिस्तान 1965 वॉर के हीरो रहे मेजर भूपिंदर सिंह की प्रतिमा और उनका टैंक एक बार फिर से भारत नगर चौक में दिखेगा। मेजर भूपिंदर सिंह की प्रतिमा और टैंक 1995 में भारत नगर चौक से हटाकर गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स के सामने शिफ्ट किया गया और फिर वहां से रोजगार्डन के बाहर शिफ्ट किया गया। स्थानीय लोगों के विरोध व भारतीय सेना के हस्तक्षेप के बाद जिला प्रशासन व नगर निगम को मेजर भूपिंदर सिंह की प्रतिमा व टैंक भारत नगर चौक में शिफ्ट करने के लिए मजबूर होना पड़ा। वीरवार को सेना के अधिकारियों ने नगर निगम अफसरों के साथ भारत नगर चौक का जायजा लिया जहां पर प्रतिमा स्थापित की जानी है। प्रतिमा शिफ्ट करने के लिए हुआ संघर्ष नगर निगम ने भारत नगर चौक के व्यूटीफिकेशन व उसके रख रखाव की जिम्मेदारी हीरो साइकिल को दी। चौक में साइकिल लगाए जाने के बाद स्थानीय लोगों व पूर्व सैनिकों ने प्रशासन व निगम से मांग की थी कि यहां पर साइकिल के बजाए मेजर भूपिंदर सिंह की प्रतिमा व टैंक फिर से स्थापित किया जाए। पब्लिक एक्शन कमेटी व पूर्व सैनिक कई दिन तक भारत नगर चौक में प्रदर्शन करते रहे। उसके बाद रिटायर्ड ब्रिगेडियर इंद्रमोहन सिंह ने इस मामले में सेना के अधिकारियों को पत्र लिखा और अपील की कि भारतीय सेना के हीरो का बुत ऐसी जगह पर लगा है जहां कोई नहीं देखता। सेना ने प्रशासन को लिखा पत्र, शहीदों को मिले सम्मान सेना के अधिकारियों ने जिला प्रशासन व नगर निगम को पत्र लिखा कि मेजर भूपिंदर सिंह लुधियाना के हैं और उनको सम्मान मिलना चाहिए। उनकी प्रतिमा जहां पहले थी वहीं पर लगाई जानी चाहिए। सेना के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन व निगम ने प्रतिमा फिर से भारत नगर चौक में लगाने का फैसला लिया। मेजर भूपिंदर सिंह कौन थे? मेजर भूपिंदर सिंह भारतीय सेना केअधिकारी थे। उनका जन्म लुधियाना के हरनामपुरा गांव में हुआ था। उन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध में टैंक युद्ध (टैंक बैटल) में अद्भुत साहस और नेतृत्व दिखाया। वो पाकिस्तानी सेना का टैंक लूटकर ले आए थे। युद्ध के दौरान उन्होंने अपने स्क्वाड्रन को नेतृत्व दिया और दुश्मन के कई टैंकों को नष्ट किया। 19 सितंबर 1965 को उनके टैंक पर पाकिस्तान की गोलियां लगी और आग लग गई। उन्होंने घायल अवस्था में भी नेतृत्व किया। गंभीर रूप से जलने के कुछ दिन बाद वो शहीद हो गए। उनके साहस और नेतृत्व के लिए उन्हें वीरता के क्षेत्र में दूसरा सबसे बड़ा वीरता सम्मान मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। मेजर भूपिंदर सिंह की प्रतिमा और टैंक कब और कहां स्थापित किए गए, जानिए भारत नगर चौक पर स्थापना: भारत नगर चौक में पहले राउंड अबाउट होता था। मेजर भूपिंदर सिंह लुधियाना के थे इसलिए सरकार ने उनका बुत भारत नगर चौक में लगाने का फैसला किया। 30 अक्टूबर 1979 को मेजर भूपिंदर सिंह की प्रतिमा और पाकिस्तानी टैंक जिसे वो लूटकर लाए थे उसे भारत नगर चौक पर स्थापित किया गया। ट्रैफिक लाइट्स लगी तो हटाई प्रतिमा व टैंक: शहर की आबादी बढ़ती गई और शहर में ट्रैफिक का दबाव बढ़ने लगा। भारत नगर चौक में ट्रैफिक को रेगुलेट करने के लिए राउंड अबाउट तोड़कर वहां पर ट्रैफिक लाइट लगाई गई। इस दौरान प्रतिमा को वहां से हटा दिया गया। गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज के बाहर रखी प्रतिमा व टैंक: 7 दिसंबर 1995 को टैंक व उनकी प्रतिमा भारत नगर चौक से हटाकर गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स के सामने स्थापित किया गया। 2020 तक प्रतिमा व टैंक यहीं पर रहा। एलिवेटिड रोड के लिए यहां से भी हटाई गई प्रतिमा व टैंक: भारत नगर चौक से जगराओं पुल की तरफ एलिवेटिड रोड के निर्माण के लिए मेजर भूपिंदर सिंह की प्रतिमा व टैंक को कॉलेज के सामने से 23 सितंबर 2020 को हटा दिया गया। यहां से उन्हें रोजगार्डन के बाहर शिफ्ट किया गया। जगह को लेकर उठे सवाल: नगर निगम ने जब मेजर भूपिंदर सिंह की प्रतिमा को कॉलेज के बाहर से रोजगार्डन के पास शिफ्ट किया तो शहरवासियों ने सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि प्रतिमा को एक मोड पर लगाया गया है जिसे कोई जल्दी देख भी नहीं सकता है। 2025 में उठी वापसी की मांग: 2025 में प्रतिमा को फिर से भारत नगर चौक में स्थापित करने की मांग उठने लगी। यह मांग तब तेज हुई जब प्राइवेट कंपनी ने यहां पर एक साइलकिल स्थापित कर दिया। 29 जनवरी को वापस स्थापित करने का फैसला: नगर निगम अफसरों के साथ सेना के कर्नल हरीश भी भारत नगर चौक पहुंचे और उन्होंने मेजर भूपिंदर सिंह के बुत व टैंक के लिए जगह चयनित की। 29 जनवरी को फैसला हो गया कि बुत यहां पर दोबारा स्थापित किया जाएगा।


