राणा सांगा व इब्राहिम लोदी का युद्ध स्थल, लेकिन न कोई प्रतीक, न कोई पहल, ऐतिहासिक पहचान को तरस रहा खातौली

राणा सांगा व इब्राहिम लोदी का युद्ध स्थल, लेकिन न कोई प्रतीक, न कोई पहल, ऐतिहासिक पहचान को तरस रहा खातौली

खातौली (कोटा)। भारतीय इतिहास में मध्यकालीन शौर्य के प्रतीक राणा सांगा और सुल्तान इब्राहिम लोदी के बीच 1517 ईस्वी में लड़ा गया युद्ध आज भी ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। लेकिन अफसोस कि कोटा जिले के खातौली कस्बे को उसकी ऐतिहासिक पहचान से जोड़ने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। यह कस्बा कभी मेवाड़ राज्य के बूंदी क्षेत्र की सीमा पर स्थित था और यहां के ऐतिहासिक महत्व को राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने अनदेखा किया है।

मध्यकालीन युद्धों का गवाह रहे इस कस्बे में राणा सांगा और इब्राहिम लोदी के बीच हुई संघर्ष की कोई पहचान नहीं है। न तो कोई स्मारक है न ही युद्ध स्थल को पहचान दिलाने की कोई पहल। यहां तक कि वर्तमान पीढ़ी भी इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाक्रम से अपरिचित है।

पूर्व प्रयास, लेकिन सफलता नहीं मिली

पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में पीपल्दा के विधायक रहे विद्याशंकर नंदवाना ने इस युद्ध स्थल पर राणा सांगा की प्रतिमा लगाने की योजना बनाई थी, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस सरकार के विधायक ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। वहीं स्थानीय संगठन पृथ्वीराज ब्रिगेड के अध्यक्ष व वार्ड पंच लोकेंद्र सिंह हाडा ने भी गुडला तिराहे पर राणा सांगा की प्रतिमा लगाने की मांग की थी, परंतु यह मामला विवादों में उलझकर रह गया।

Khatauli Historical Site

नए प्रयासों की उम्मीद

इस मुद्दे पर अब स्थानीय लोग और संगठन फिर से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि राज्य और केंद्र सरकार इस ऐतिहासिक स्थल की पहचान को पुनर्जीवित करने के लिए कुछ कदम उठाएंगे। श्री क्षत्रिय महासभा पीपल्दा भी इस दिशा में गंभीर है और कस्बे के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करने की मांग कर रही है।

कस्बे को मिले ऐतिहासिक पहचान

खातौली निवासी 88 वर्षीय सेवानिवृत अध्यापक पृथ्वी सिंह हाडा बताते हैं कि हमारे जन्म से पहले कि यह छतरियां बनी हुई है। पूर्वजों के अनुसार खातौली में बनी यह समा​धियां ऐतिहासिककाल की है। कस्बे को ऐतिहासिक रूप से प्रस्तुत किया जाना चाहिए जिससें की वर्तमान पीढ़ी को भी इसकी जानकारी मिले।

Khatauli Historical Site

क्षत्रिय महासभा सेवा समिति पीपल्दा अध्यक्ष बृजराज सिंह करवाड़ ने बताया कि खातौली महाराणा सांगा एवं इब्राहिम लोदी की युद्ध स्थल के रूप में विख्यात रहा है जहां इब्राहिम लोदी की सेना को राजस्थान के रणबाकुरों ने परास्त कर दिया। यहां युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त योद्धाओं की समाधि इसका प्रमाण है। किन्तु खातौली अपनी इस पहचान को सरकारों की उपेक्षा के चलते नहीं बना पा रहा।

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