रेलवे पटरी पर मिली बेसहारा महिला,जीविका दीदी ने की मदद:जमुई में 28 घंटे तक जिंदगी-मौत से जूझती रही महिला, मानसिक रूप से परेशान लग रही थी

रेलवे पटरी पर मिली बेसहारा महिला,जीविका दीदी ने की मदद:जमुई में 28 घंटे तक जिंदगी-मौत से जूझती रही महिला, मानसिक रूप से परेशान लग रही थी

जमुई के मलयपुर थाना क्षेत्र में इंसानियत को झकझोर देने वाली तस्वीर गुरुवार को सामने आई। रेलवे पटरी के पास एक अज्ञात महिला बेसहारा और बदहवास हालत में पड़ी मिली। महिला इतनी डरी-सहमी थी कि न तो ठीक से चल पा रही थी और न ही अपनी पहचान बता पा रही थी। उसकी हालत देखकर आसपास के लोगों को अंदेशा हुआ कि वह किसी नशा गिरोह या मानव तस्करी का शिकार हो सकती है। शुरुआत में लोगों ने महिला से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन वह बार-बार घबराने लगती थी और सही जवाब नहीं दे पा रही थी। बुधवार देर रात इस संबंध में पुलिस को सूचना दी गई। जीविका दीदी की नजर पड़ी तो बदली तस्वीर इसी दौरान जीविका दीदी रीना देवी की नजर रेलवे पटरी के पास पड़ी महिला पर पड़ी। महिला की हालत देख रीना देवी से रहा नहीं गया। बिना देर किए उन्होंने अपने बच्चों की मदद से महिला को रेलवे पटरी से करीब 100 मीटर दूर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और उसे सुलाया। रीना देवी बताती हैं कि महिला की हालत गंभीर थी, लेकिन उसे ऐसे हाल में छोड़ना उन्हें मंजूर नहीं था। उन्होंने तत्काल महिला के लिए दवाइयों की व्यवस्था की, उसे खाना खिलाया और गर्म पानी दिया। खुले आसमान के नीचे कटी रात महिला पूरी रात खुले आसमान के नीचे रही। ठंड से बचाने के लिए स्थानीय लोगों ने अलाव जलाया। रीना देवी पूरी रात महिला की देखरेख में जुटी रहीं। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि महिला को किसी तरह की परेशानी न हो। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अगर उस रात रीना देवी मदद के लिए आगे नहीं आतीं, तो महिला की जान भी जा सकती थी। मानसिक रूप से परेशान लग रही थी महिला रीना देवी के अनुसार, महिला मानसिक रूप से काफी परेशान लग रही थी। बातचीत के दौरान वह कभी खुद को बिहार के सुपौल जिले का निवासी बताती, तो कभी डिब्रूगढ़ का। महिला बार-बार यही कहती रही कि उसे नहीं पता कि वह यहां कैसे पहुंच गई। महिला ने बताया कि उसके दो बेटे और एक बेटी हैं, जो उसके बिना रो रहे होंगे। वह बार-बार अपने बच्चों से मिलने की बात कह रही थी। महिला का यह भी कहना था कि किसी ने उसे जबरदस्ती यहां तक पहुंचाया है, हालांकि उसके साथ किसी तरह की गलत घटना नहीं हुई है। 28 घंटे तक जिंदगी और मौत से संघर्ष करीब 28 घंटे तक महिला जिंदगी और मौत से जूझती रही। इस दौरान रीना देवी ने लगातार पुलिस से संपर्क बनाए रखा और मामले की गंभीरता बताई। सूचना मिलते ही बुधवार देर रात मलयपुर थाना के एएसआई सुनील कुमार, पुलिस जवान और डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने तत्काल महिला को इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा। समय पर इलाज से बची जान सदर अस्पताल में डॉक्टरों ने महिला का इलाज शुरू किया। समय पर इलाज मिलने से महिला की हालत में सुधार हुआ और उसकी जान बच सकी। इलाज के दौरान महिला ने अपना नाम मीणा बताया और अपना घर डिब्रूगढ़ बताया है। फिलहाल महिला का इलाज चल रहा है और पुलिस उसके परिजनों की तलाश में जुट गई है। समाज के लिए मिसाल बनी रीना देवी स्थानीय लोगों का कहना है कि जीविका दीदी रीना देवी ने जिस तरह एक बेसहारा महिला की मदद की, वह समाज के लिए प्रेरणा है। अगर हर व्यक्ति मुश्किल में फंसे किसी इंसान के लिए आगे आए, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। रीना देवी का यह मानवीय प्रयास यह साबित करता है कि आज भी समाज में इंसानियत जिंदा है। जमुई के मलयपुर थाना क्षेत्र में इंसानियत को झकझोर देने वाली तस्वीर गुरुवार को सामने आई। रेलवे पटरी के पास एक अज्ञात महिला बेसहारा और बदहवास हालत में पड़ी मिली। महिला इतनी डरी-सहमी थी कि न तो ठीक से चल पा रही थी और न ही अपनी पहचान बता पा रही थी। उसकी हालत देखकर आसपास के लोगों को अंदेशा हुआ कि वह किसी नशा गिरोह या मानव तस्करी का शिकार हो सकती है। शुरुआत में लोगों ने महिला से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन वह बार-बार घबराने लगती थी और सही जवाब नहीं दे पा रही थी। बुधवार देर रात इस संबंध में पुलिस को सूचना दी गई। जीविका दीदी की नजर पड़ी तो बदली तस्वीर इसी दौरान जीविका दीदी रीना देवी की नजर रेलवे पटरी के पास पड़ी महिला पर पड़ी। महिला की हालत देख रीना देवी से रहा नहीं गया। बिना देर किए उन्होंने अपने बच्चों की मदद से महिला को रेलवे पटरी से करीब 100 मीटर दूर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और उसे सुलाया। रीना देवी बताती हैं कि महिला की हालत गंभीर थी, लेकिन उसे ऐसे हाल में छोड़ना उन्हें मंजूर नहीं था। उन्होंने तत्काल महिला के लिए दवाइयों की व्यवस्था की, उसे खाना खिलाया और गर्म पानी दिया। खुले आसमान के नीचे कटी रात महिला पूरी रात खुले आसमान के नीचे रही। ठंड से बचाने के लिए स्थानीय लोगों ने अलाव जलाया। रीना देवी पूरी रात महिला की देखरेख में जुटी रहीं। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि महिला को किसी तरह की परेशानी न हो। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अगर उस रात रीना देवी मदद के लिए आगे नहीं आतीं, तो महिला की जान भी जा सकती थी। मानसिक रूप से परेशान लग रही थी महिला रीना देवी के अनुसार, महिला मानसिक रूप से काफी परेशान लग रही थी। बातचीत के दौरान वह कभी खुद को बिहार के सुपौल जिले का निवासी बताती, तो कभी डिब्रूगढ़ का। महिला बार-बार यही कहती रही कि उसे नहीं पता कि वह यहां कैसे पहुंच गई। महिला ने बताया कि उसके दो बेटे और एक बेटी हैं, जो उसके बिना रो रहे होंगे। वह बार-बार अपने बच्चों से मिलने की बात कह रही थी। महिला का यह भी कहना था कि किसी ने उसे जबरदस्ती यहां तक पहुंचाया है, हालांकि उसके साथ किसी तरह की गलत घटना नहीं हुई है। 28 घंटे तक जिंदगी और मौत से संघर्ष करीब 28 घंटे तक महिला जिंदगी और मौत से जूझती रही। इस दौरान रीना देवी ने लगातार पुलिस से संपर्क बनाए रखा और मामले की गंभीरता बताई। सूचना मिलते ही बुधवार देर रात मलयपुर थाना के एएसआई सुनील कुमार, पुलिस जवान और डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने तत्काल महिला को इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा। समय पर इलाज से बची जान सदर अस्पताल में डॉक्टरों ने महिला का इलाज शुरू किया। समय पर इलाज मिलने से महिला की हालत में सुधार हुआ और उसकी जान बच सकी। इलाज के दौरान महिला ने अपना नाम मीणा बताया और अपना घर डिब्रूगढ़ बताया है। फिलहाल महिला का इलाज चल रहा है और पुलिस उसके परिजनों की तलाश में जुट गई है। समाज के लिए मिसाल बनी रीना देवी स्थानीय लोगों का कहना है कि जीविका दीदी रीना देवी ने जिस तरह एक बेसहारा महिला की मदद की, वह समाज के लिए प्रेरणा है। अगर हर व्यक्ति मुश्किल में फंसे किसी इंसान के लिए आगे आए, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। रीना देवी का यह मानवीय प्रयास यह साबित करता है कि आज भी समाज में इंसानियत जिंदा है।  

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