वीर तेजाजी को नमन
श्रद्धा व आस्था के प्रतीक, सत्यवादी और गौ-रक्षक लोक देवता वीर तेजाजी महाराज के जन्मोत्सव के अवसर पर हुब्बल्ली में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कर्नाटक में निवास कर रहे राजस्थान मूल के जाट समाज के लोगों ने दीप प्रज्ज्वलन, माल्यार्पण व पुष्प अर्पण कर वीर तेजाजी को नमन किया। राष्ट्रीय हिंदी दैनिक राजस्थान एवं हुब्बल्ली में निवासरत जाट समाज की संयुक्त मेजबानी में आयोजित इस कार्यक्रम में समाजजनों ने वीर तेजाजी के जीवन, आदर्शों और बलिदान पर विचार व्यक्त किए। प्रारंभ में राजस्थान पत्रिका हुब्बल्ली के संपादकीय प्रभारी अशोक सिंह राजपुरोहित ने वीर तेजाजी की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए पत्रिका के सामाजिक सरोकारों की जानकारी दी।
धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा
बाड़मेर जिले के बाटाडु तहसील के चौखला निवासी मोहनलाल डूडी ने कहा, वीर तेजाजी केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि त्याग और करुणा के प्रतीक थे। उन्होंने गौ-रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। बचपन में उनके जीवन पर आधारित कैसेट सुनकर मन में गर्व का भाव पैदा होता था। आज भी उनका जीवन हमें निस्वार्थ सेवा, साहस और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
सत्य के पथ पर अडिग रहने वाले
बालोतरा जिले के टापरा निवासी अन्नाराम मूंडण ने कहा, वीर तेजाजी सत्य के पथ पर अडिग रहने वाले महान पुरुष थे। उन्होंने सत्य वचन के लिए अपने जीवन की आहुति दी। आज के समय में समाज को उनके आदर्शों से सीख लेने की आवश्यकता है। यदि हम सत्य, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को अपनाएं, तो समाज स्वत: मजबूत और समरस बनेगा।
समाज को नई दिशा दी
जोधपुर जिले के ओसियां क्षेत्र के श्रीरामनगर निवासी पप्पूराम गोदारा ने कहा, वीर तेजाजी ने समाज को नई दिशा दी और किसान वर्ग के हितों की रक्षा की। वे केवल जाट समाज ही नहीं, बल्कि संपूर्ण लोकजीवन के आराध्य हैं। उनकी पूजा हर वर्ग करता है। उनका जीवन संदेश देता है कि सामाजिक जिम्मेदारी और परोपकार ही सच्ची भक्ति है।
आस्था आज भी जन-जन में जीवित
बालोतरा जिले के चिरडिय़ा निवासी मदनराम साईं ने कहा, वीर तेजाजी युगपुरुष थे, जिनकी आस्था आज भी जन-जन में जीवित है। वे अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। हमें चाहिए कि उनके बताए मार्ग पर चलें, सेवा और सत्य को जीवन का आधार बनाएं। यही वीर तेजाजी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
सत्यवादी और गौ-रक्षक
जोधपुर जिले के उत्तेसर निवासी मदनलाल गोदारा ने कहा, वीर तेजाजी सत्यवादी और गौ-रक्षक थे। उन्होंने गायों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी, जो भारतीय संस्कृति का सर्वोच्च उदाहरण है। उनका बलिदान हमें यह सिखाता है कि धर्म, करुणा और साहस के लिए जीवन समर्पित करना ही सच्चा पुरुषार्थ है।
तेजाजी के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया
कार्यक्रम में बालोतरा जिले के भाम्बूनगर निवासी सुरेन्द्र भाम्बू, बालोतरा जिले के कादानाडी निवासी चैनाराम जाखड़, बालोतरा जिले के जाखड़ा निवासी लुम्बाराम जाखड़, जोधपुर जिले के लूणी क्षेत्र के सतलाना निवासी गोपाल बुगालिया, बालोतरा जिले के भाम्बूनगर निवासी बाबूलाल भाम्बू, जोधपुर जिले के बीजारिया बावड़ी निवासी ईराराम बैरड़, बाड़मेर जिले के चौखला निवासी एमसीए की छात्रा वर्षा डूडी, बाड़मेर जिले के मोखाब निवासी मूमलदेवी मैया सहित अनेक समाजजनों ने वीर तेजाजी के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।


