Economic Survey Budget 2026: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था बीते कुछ सालों में मजबूती के साथ आगे बढ़ी है। कोविड के बाद घरेलू मांग, निवेश और सरकारी खर्च ने ग्रोथ को सहारा दिया है। इकोनॉमिक सर्वे 2026 के हवाले से मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि भारत की आर्थिक ग्रोथ की गति और मजबूत हुई है, जबकि महंगाई में स्पष्ट नरमी देखने को मिली है।
जीडीपी ग्रोथ भी बेहतर (Better GDP Growth)
इकोनॉमिक सर्वे 2026 के अनुसार भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ में लगातार सुधार दर्ज किया गया है। वित्त वर्ष 2012 से 2020 के दौरान औसतन 6.4 प्रतिशत रहने वाली ग्रोथ वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 6.5 प्रतिशत पहुंच गई है। चालू वित्त वर्ष 2026 में इसके 7.4 प्रतिशत तक जाने का अनुमान है। यह संकेत देता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था कोविड से पहले के स्तर से भी बेहतर प्रदर्शन कर रही है। घरेलू खपत और निजी निवेश इस ग्रोथ के प्रमुख आधार बने हुए हैं।
घरेलू मांग और निवेश से मिला सहारा
Economic Survey 2026 में बताया गया है कि प्राइवेट कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PFCE: Private Consumption Expenditure) यानी वस्तुओं और सेवाओं पर किए गए कुल खर्च में स्थिरता बनी हुई है। यह वित्त वर्ष 2012-2020 के 6.8 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 7.2 प्रतिशत हो गई। वहीं, निवेश गतिविधियों में भी तेज उछाल देखा गया है। रियल ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (GFCF: Real Gross Fixed Capital Formation) वित्त वर्ष 2025 में 7.1 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2026 में 7.8 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। इससे साफ है कि कैपिटल फॉर्मेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस से ग्रोथ को दीर्घकालीन आधार मिल रहा है।
महंगाई और राजकोषीय घाटा
Economic Survey 2026 के मुताबिक महंगाई के मोर्चे पर उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वित्त वर्ष 2023 में हेडलाइन सीपीआई महंगाई (CPI Inflation) 6.7 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2025 में 4.7 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2026 में 1.7 प्रतिशत तक आ गई। कोर इंफ्लेशन में भी गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2021 के 9.2 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2026 में 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।


