Menopause क्या है, जिसका दर्द ट्विंकल खन्ना ने झेला, 4 महिला एक्सपर्ट्स ने 35-40 उम्र की औरतों को लिए दी ये सलाह

Menopause क्या है, जिसका दर्द ट्विंकल खन्ना ने झेला, 4 महिला एक्सपर्ट्स ने 35-40 उम्र की औरतों को लिए दी ये सलाह

Menopause Kya Hai : औरतों का जीवन हर उम्र में नई चुनौती लेकर आता है। जिस तरह से पीरियड का आना दर्दनाक होता है, उसी तरह पीरियड का बंद होना भी है। एक्ट्रेस ट्विंकल खन्ना ने इसको लेकर अपना अनुभव शेयर किया है। एक्ट्रेस ने मेनोपॉज (Menopause) को लेकर खुलकर बात की। पत्रिका के साथ बातचीत में डॉ. प्रियंका रहरिया (स्त्री रोग विशेषज्ञ), डॉ. सुनीला खंडेलवाल (चेयरपर्सन- इंटरनेशनल, इंडियन मेनोपॉज सोसाइटी), दिब्या प्रकाश (डाइटिशियन) और डॉ. सिली राउत (एंथ्रोपोलॉजिस्ट) से मेनोपॉज क्या है, लक्षण-बचाव आदि के बारे में बताया है।

“मैं एक ऐसा फोन… जिसका चार्जर ही खराब…”

ट्विंकल खन्ना ने इसको लेकर अपना अनुभव शेयर करते हुए लिखा है, “मैं 52 साल की हूं और इस वक्त बिना किसी मेकअप के हूं। काश! मैं यह कह पाती कि अच्छी धूप और निखार के लिए बस इतना ही काफी है। लेकिन मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) इतनी उदार नहीं होती। मैंने एक बार मजाक में कहा था कि मेनोपॉज मुझसे भी बड़ी ‘आफत’ है। एक लंबे समय तक इसने मुझे ऐसा महसूस कराया जैसे मैं एक ऐसा फोन हूं जिसका चार्जर ही खराब हो गया है-हमेशा लो बैटरी!”

मेनोपॉज क्या है?

Menopause Kya hai
Photo – NotebookLM

डॉ. रहरिया कहती हैं, जब 45-50 की उम्र में पीरियड बंद होता है तो उसे मेनोपॉज कहते हैं। कई बार मेनोपॉज समय से पहले और देर से भी होता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसको लेकर ये समझ नहीं आता कि औरत खुश हो या नहीं! क्योंकि, मेनोपॉज के लक्षण भी दर्दनाक अनुभव देते हैं, जिसे आप नीचे पढ़ सकते हैं-

मेनोपॉज के लक्षण (Menopause Symptoms)

  • हॉट फ्लैशेस (Hot Flashes): अचानक चेहरे, गर्दन और छाती में तेज गर्मी महसूस होना और पसीना आना।
  • रात में पसीना आना (Night Sweats): सोते समय अचानक पसीने से भीग जाना। हॉट फ्लैशेस के अलावा ये सबसे आम लक्षण है।
  • पीरियड्स में बदलाव: पीरियड्स का अनियमित होना, बहुत ज्यादा या बहुत कम ब्लीडिंग होना और अंत में एक साल तक पूरी तरह बंद हो जाना।
  • नींद की कमी (Insomnia): थकान होने के बावजूद गहरी नींद न आना।
  • मूड स्विंग्स (Mood Swings): बिना किसी बड़ी वजह के अचानक गुस्सा आना, चिड़चिड़ापन या उदासी महसूस होना।
  • ब्रेन फॉग (Brain Fog): चीजों को याद रखने में कठिनाई होना या फोकस की कमी।
  • घबराहट और बेचैनी: दिल की धड़कन अचानक तेज महसूस होना और एंग्जायटी होना।
Menopause Symptoms in hindi
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मेनोपॉज के बाद शरीर में दिखते हैं ये बदलाव

  • हड्डियों और जोड़ों में दर्द: एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।
  • वजन बढ़ना: मेटाबॉलिज्म धीमा होने से खासकर पेट के आसपास चर्बी बढ़ने लगती है।
  • त्वचा और बालों में बदलाव: स्किन का रूखा होना और बालों का पतला होना या झड़ना।
  • यूरिनरी इश्यूज: बार-बार पेशाब आने की इच्छा होना या यूरिन इन्फेक्शन का खतरा बढ़ना।

मेनोपॉज को लेकर बढ़ रही पॉजिटिविटी

डॉ. सुनीला खंडेलवाल का कहना है, मेनोपॉज दर्दनाक है। ये एक नेचुरल प्रक्रिया है जिसे रोक नहीं सकते। इसलिए, खुद को सकारात्मक रखना जरूरी है। हमारी सोसाइटी की स्टडी में ये देखने को मिला कि करीब 60 प्रतिशत महिलाएं इसे पॉजिटिव ले रही हैं। इस कारण उनको इस तरह की परिस्थिति से डील करने में मदद भी मिल रही है।

एक्ट्रेस खन्ना ने भी पोस्ट में लिखा है, “अब मैं बेहतर महसूस कर रही हूं, इसलिए नहीं कि मैंने ‘अपनी उम्र को शालीनता से स्वीकार’ कर लिया है (पता नहीं इसका मतलब क्या होता है), बल्कि इसलिए क्योंकि मैं अब नियमित वेट ट्रेनिंग करती हूं, ढेर सारे सप्लीमेंट्स लेती हूं, और किताबों (पढ़ने और लिखने) में सुकून ढूंढती हूं। साथ ही, 50 के बाद अब मैंने अपनी छोटी-छोटी खुशियों को जीना शुरू कर दिया है और सहेलियों के साथ जमकर वक्त बिताती हूं।”

“मेनोपॉज से स्त्रीत्व खत्म नहीं होता”

Menopause positivity
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डॉ. खंडेलवाल आगे कहती हैं, कई स्त्री ये समझती हैं कि मेनोपॉज के कारण उनका स्त्रीत्व खत्म हो गया। इस चक्कर में अपना आत्मविश्वास खो देती हैं। जबकि, ऐसा नहीं है। महिलाओं को इसके बाद खुलकर जीना चाहिए। अपने हेल्थ को लेकर और अधिक जागरूक होना चाहिए। भारत की 80 प्रतिशत महिलाएं पोस्ट मेनोपॉज से जूझती हैं। अगर वो 35 के बाद ही डाइट व मेडिकल टेस्ट का ध्यान रखें तो शायद खुद को कई तरह की दिक्कतों से बचा पाएंगी।

ग्रामीण भारत में मेनोपॉज को लेकर जागरूकता कम

डॉ. सिली राउत, एंथ्रोपोलॉजिस्ट (मानवविज्ञानी) कहती हैं, “ग्रामीण भारत में पीरियड्स और शरीर में होने वाले बदलावों को डॉक्टरी ज्ञान के बजाय अक्सर रोजमर्रा के अनुभवों से जोड़कर देखा जाता है। जब किसी लड़की को पहली बार पीरियड्स शुरू होते हैं, तो उसे समाज में एक बड़े उत्सव या रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है, जिसे उसकी शारीरिक परिपक्वता की पहचान माना जाता है। लेकिन इसके उलट, मेनोपॉज (पीरियड्स का बंद होना) पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है और न ही इसके बारे में ज्यादा बात होती है। अधेड़ उम्र में कई ग्रामीण महिलाएं अचानक गर्मी लगना, थकान, घबराहट या नींद न आने जैसी समस्याओं से जूझती हैं। लेकिन वे अक्सर इन्हें मेनोपॉज का लक्षण नहीं मानती, बल्कि बढ़ती उम्र या मौसम का असर समझकर टाल देती हैं। प्रजनन की उम्र बीत जाने के बाद स्वास्थ्य संबंधी जानकारी की कमी इस अंतर को और बढ़ा देती है। अगर हम ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में मेनोपॉज के प्रति जागरूकता बढ़ाएं, तो महिलाएं जीवन के इस बड़े बदलाव को बेहतर तरीके से समझ सकेंगी।”

डॉ. खंडेलवाल भी मानती हैं कि ग्रामीण भारत में जागरूकता की कमी है। साथ ही वो ये भी कहती हैं, हड्डियों का कमजोर होना, दर्द आदि के अलावा मेनोपॉज के कारण महिलाएं मानसिक व शारीरिक रूप से कमजोर हो जाती हैं। इसके अलावा दिल की बीमारी, कैंसर जैसी बीमारियों का रिस्क भी काफी हद तक बढ़ सकता है। इसलिए, इसको लेकर गांवों में अधिक तेजी से काम करने की जरूरत है।

जैसे- ट्विंकल ने बताया है कि वो कैसे खुद को फिट रखी हैं-

  • Coenzyme Q10 (एनर्जी के लिए)
  • NAD+
  • Omega-3 (दिल और दिमाग के लिए)
  • Lion’s Mane (याददाश्त और फोकस के लिए)
  • आयरन सप्लीमेंट
  • Vitamin D3 + K2 (हड्डियों के लिए)
  • Collagen (स्किन और जोड़ों के लिए)
  • Magnesium Glycinate (बेहतर नींद के लिए)

हालांकि, सप्लीमेंट्स आदि को लेकर डॉ. रहरिया की सलाह है, अगर मेनोपॉज आपको बहुत अधिक दिक्कत दे रहा है तब जाकर दवाई आदि का सेवन करें। हर बार मेनोपॉज खतरनाक नहीं होता है। कुछ महिलाओं के लिए अच्छा भी हो सकता है। पर, महिलाएं यदि बढ़ती उम्र के साथ अपनी डाइट में कैल्शियम, आयरन, विटामिन डी आदि का सेवन करें तो मेनोपॉज के साइड इफेक्ट्स से खुद को बचा पाएंगी। साथ ही खुद को फिट रख पाएंगी। मेनोपॉज से अधिक दिक्कत होने पर हार्मोन थेरेपी आदि भी कारगर माना जाता है।

मेनोपॉज के लिए डाइट चार्ट

Menopause diet
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दिब्या प्रकाश, डाइटिशियन का कहना है, दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, और फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ हड्डियों को मजबूत रखने के लिए आवश्यक हैं। प्रोटीन के लिए मछली, अंडे, सोया, दालें, और बीन्स खाएं। फाइटोएस्ट्रोजेन (Phytoestrogens) के लिए अलसी के बीज, सोया उत्पाद, फलियां, और तिल। साथ ही हेल्दी फैट के लिए ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर तैलीय मछली (salmon, mackerel), अखरोट आदि खा सकती हैं। हालांकि, महिला की उम्र और वजन व हेल्थ कंडीशन के हिसाब से ये अलग भी हो सकता है। इसलिए, किसी डाइटिशियन से डाइट चार्ट बनाकर किसी चीज का सेवन करना सही साबित हो सकता है।

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