शहर में गंदगी और सार्वजनिक स्वच्छता को लेकर जहां अक्सर शिकायतें होती रहती हैं, वहीं झूंसी क्षेत्र के एक 15 वर्षीय बालक ने इस मुद्दे पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है। झूंसी निवासी सुमित केसरवानी (पुत्र: सक्षम केसरवानी) ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर सार्वजनिक स्थानों पर पान-गुटखा खाकर थूकने और कूड़ा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में बालक ने कहा है कि जब तक नियमों का कड़ाई से पालन नहीं कराया जाएगा और दोषियों पर जुर्माना नहीं लगेगा, तब तक लोगों की आदतों में बदलाव संभव नहीं है। उसने स्पष्ट रूप से लिखा है कि शहर को साफ-सुथरा बनाए रखने के लिए केवल योजनाएं ही नहीं, बल्कि अनुशासन और जिम्मेदारी भी उतनी ही ज़रूरी है। सुमित ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। उसने कहा कि नागरिकों की छोटी-छोटी जिम्मेदारियां ही मिलकर शहर की बड़ी तस्वीर बदल सकती हैं। मुख्यमंत्री तक पहुंचा यह पत्र उम्र से कहीं बड़ी सोच और सामाजिक चेतना का प्रतीक माना जा रहा है। यह पहल दर्शाती है कि नई पीढ़ी स्वच्छ भारत को केवल एक नारे के रूप में नहीं, बल्कि व्यवहार और नागरिक दायित्व के रूप में देख रही है। इस बालक की सोच ने समाज के सामने एक अहम सवाल भी खड़ा कर दिया है-जब एक 15 वर्षीय बच्चा सिविक सेंस और स्वच्छता की बात कर सकता है, तो क्या हम बड़े होकर अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह निभा रहे हैं?


