संभल हिंसा के दौरान पुलिस कर्मियों द्वारा गोली मारे जाने का आरोप लगाने वाले आलम के पिता की याचिका पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने FIR के आदेश दिया था। जिसके खिलाफ संभल पुलिस और ASP अनुज चौधरी इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। ASP अनुज चौधरी व संभल पुलिस ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में रिवीजन याचिका दाखिल की है। मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच ने मामले में आरोपी बनाए गए आलम को 25 फरवरी 2026 तक अंतरिम अग्रिम जमानत प्रदान की है। उल्लेखनीय है कि संभल की चंदौसी स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय के तत्कालीन सीजेएम विभांशु सुधीर ने 9 जनवरी 2026 को संभल के तत्कालीन सीओ (वर्तमान ASP) अनुज चौधरी, तत्कालीन कोतवाली प्रभारी इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित कुल 20 पुलिस कर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। सीजेएम विभांशु सुधीर का तबादला इस आदेश के कुछ समय बाद ही सीजेएम विभांशु सुधीर का तबादला सुल्तानपुर कर दिया गया था। तबादले से नाराज अधिवक्ताओं ने पूर्व बार अध्यक्ष राजेश कुमार यादव एडवोकेट के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन भी किया था। मामला संभल कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला नई सराय निवासी आलम पुत्र यामीन से जुड़ा है, जो पापे (रस्क और बिस्कुट) बेचने और तीन पहिया रिक्शा चलाने का काम करता था। आलम के पिता ने 6 फरवरी 2025 को सीजेएम कोर्ट चंदौसी में याचिका दाखिल कर दावा किया था कि 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद बनाम श्री हरिहर मंदिर सर्वे के दौरान भड़की हिंसा के समय आलम मौके पर मौजूद था और पुलिस कर्मियों ने उसे गोली मारी थी। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि सीजीएम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के खिलाफ रिवीजन याचिका दाखिल की गई है। वहीं ASP अनुज चौधरी ने भी व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट में रिवीजन याचिका दायर की है। मामले की आगे की सुनवाई हाईकोर्ट में की जाएगी।


