नौकरी का झांसा दे बैंकॉक भेजा, वहां से म्यांमार भेज कराने लगा साइबर ठगी

नौकरी का झांसा दे बैंकॉक भेजा, वहां से म्यांमार भेज कराने लगा साइबर ठगी

परसा बाजार के रहने वाले विवेक कुमार को साइबर बदमाशों ने विदेश में टाइपिंग जॉब का झांसा दिया। उसे विमान का टिकट देकर बैंकॉक बुलाया। वहां से जंगलों के रास्ते म्यांमार ले गया। वहां साइबर क्राइम कराने लगा। विरोध करने पर उसे पीटा जाता था। इसी दौरान म्यांमार सेना ने छापेमारी की तो अन्य लोगों के साथ विवेक भी मुक्त हो गया। म्यांमार सेना ने इंडियन एंबेसी को यह जानकारी दी। इंडियन एंबेसी ने विमान से विवेक को दिल्ली भेजा और बिहार पुलिस को सूचित किया। बिहार पुलिस की टीम दिल्ली पहुंची उसे पटना लाया। विवेक के बयान पर पटना के साइबर थाने में केस दर्ज किया गया। इनकार किया तो 5 लाख मांगे विवेक को इंस्टाग्राम पर बेंगलुरु के प्रिंस नाम के व्यक्ति से संपर्क हुआ था। उसने विदेश में नौकरी का लालच दिया। म्यांमार पहुंचने के बाद विवेक को एक कॉन्ट्रेक्ट पर साइन करने को कहा गया। इनकार करने पर 5 लाख रुपए मांगे। उसके पास पैसे नहीं थे। फिर म्यांमार के एक सुनसान इलाके में स्थित मकान में ले जाकर ऑनलाइन क्रिप्टो करेंसी में निवेश के स्कैम और अन्य तरीकों से साइबर क्राइम करने का दबाव बनाया गया। 15-16 घंटे काम करवाया जाता था। इसी दौरान म्यांमार सेना को साइबर क्रिमिनल के उस ठिकाने की जानकारी मिल गयी और फिर उन लोगों ने छापेमारी कर तमाम लोगों को मुक्त कराया। परसा बाजार के रहने वाले विवेक कुमार को साइबर बदमाशों ने विदेश में टाइपिंग जॉब का झांसा दिया। उसे विमान का टिकट देकर बैंकॉक बुलाया। वहां से जंगलों के रास्ते म्यांमार ले गया। वहां साइबर क्राइम कराने लगा। विरोध करने पर उसे पीटा जाता था। इसी दौरान म्यांमार सेना ने छापेमारी की तो अन्य लोगों के साथ विवेक भी मुक्त हो गया। म्यांमार सेना ने इंडियन एंबेसी को यह जानकारी दी। इंडियन एंबेसी ने विमान से विवेक को दिल्ली भेजा और बिहार पुलिस को सूचित किया। बिहार पुलिस की टीम दिल्ली पहुंची उसे पटना लाया। विवेक के बयान पर पटना के साइबर थाने में केस दर्ज किया गया। इनकार किया तो 5 लाख मांगे विवेक को इंस्टाग्राम पर बेंगलुरु के प्रिंस नाम के व्यक्ति से संपर्क हुआ था। उसने विदेश में नौकरी का लालच दिया। म्यांमार पहुंचने के बाद विवेक को एक कॉन्ट्रेक्ट पर साइन करने को कहा गया। इनकार करने पर 5 लाख रुपए मांगे। उसके पास पैसे नहीं थे। फिर म्यांमार के एक सुनसान इलाके में स्थित मकान में ले जाकर ऑनलाइन क्रिप्टो करेंसी में निवेश के स्कैम और अन्य तरीकों से साइबर क्राइम करने का दबाव बनाया गया। 15-16 घंटे काम करवाया जाता था। इसी दौरान म्यांमार सेना को साइबर क्रिमिनल के उस ठिकाने की जानकारी मिल गयी और फिर उन लोगों ने छापेमारी कर तमाम लोगों को मुक्त कराया।  

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