कोडरमा जिले के जयनगर प्रखंड अंतर्गत करियांवां पंचायत के सुगासाख गांव में नल जल योजना के तहत भूमि निरीक्षण करने पहुंचे जयनगर व डोमचांच अंचल के अंचल अधिकारियों को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। उन्हें बिना निरीक्षण किए ही लौटना पड़ा। ग्रामीणों ने अधिकारियों से अपनी मांगों को लिखित में प्रस्तुत करने के लिए दो दिनों की मोहलत मांगी है। यह योजना सुगासाख गांव से डोमचांच प्रखंड के विभिन्न गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए है। इसके तहत बराकर नदी के बीच में एक इंटक वेल का निर्माण कर पानी उठाया जाना है, जिसे डोमचांच प्रखंड तक पहुंचाया जाएगा। इसी उद्देश्य से बुधवार को दोनों अंचलों के अंचल अधिकारी गांव पहुंचे थे। अधिकारियों के पहुंचने पर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। उन्होंने अधिकारियों को भूमि निरीक्षण करने से रोक दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल बुलाया गया, लेकिन ग्रामीणों ने पुलिस की भी बात नहीं मानी और अपनी मांगों पर अड़े रहे। ग्रामीणों का मानना, गांवों में पानी का गंभीर संकट पैदा हो जाएगा ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव के कुओं और चापानलों में अभी से ही पानी का स्तर नीचे चला गया है। उनका मानना है कि नदी में इंटक वेल के निर्माण और डीप बोरिंग से आसपास के गांवों में पानी का गंभीर संकट पैदा हो जाएगा। इससे भविष्य में सिंचाई तो दूर, पीने के पानी के लिए भी ग्रामीणों को तरसना पड़ेगा। घंटों चली बहस के बाद अंचल अधिकारियों को निराश होकर लौटना पड़ा। ग्रामीणों ने अधिकारियों से दो दिनों की मोहलत मांगी है ताकि वे अपनी मांगों को लिखित रूप में प्रस्तुत कर सकें। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि जिला प्रशासन उनकी बातों को मानता है, तभी वे योजना को आगे बढ़ने देंगे, अन्यथा इसे लागू नहीं होने दिया जाएगा। इधर, जयनगर सीओ सारांश जैन ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा कोई भी वैध मांग अभी तक सामने नहीं आई है। उक्त गांव के कुछ लोग हैं, जो भोलीभाली जनता को गुमराह कर विकास कार्यों में बाधक बने हुए हैं। वाटर लेवल गिरने की बात पर उन्होंने कहा कि जिस कम्पनी ने यह कार्य लिया है, उसने डीवीसी से एक एकरारनामा किया है, जिसमें यह साफ साफ लिखा हुआ है कि उनके द्वारा वाटर लेवल को कर हाल में मेंटेन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों द्वारा दो दिनों का समय मांगा गया है ताकि वे अपनी मांगों को हमारे समक्ष रख सकें। उन्होंने कहा कि अगर ग्रामीणों की मांग जायज हुई तो उसे हर हाल में माना जाएगा, अन्यथा कार्य में अवरोध पैदा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कोडरमा जिले के जयनगर प्रखंड अंतर्गत करियांवां पंचायत के सुगासाख गांव में नल जल योजना के तहत भूमि निरीक्षण करने पहुंचे जयनगर व डोमचांच अंचल के अंचल अधिकारियों को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। उन्हें बिना निरीक्षण किए ही लौटना पड़ा। ग्रामीणों ने अधिकारियों से अपनी मांगों को लिखित में प्रस्तुत करने के लिए दो दिनों की मोहलत मांगी है। यह योजना सुगासाख गांव से डोमचांच प्रखंड के विभिन्न गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए है। इसके तहत बराकर नदी के बीच में एक इंटक वेल का निर्माण कर पानी उठाया जाना है, जिसे डोमचांच प्रखंड तक पहुंचाया जाएगा। इसी उद्देश्य से बुधवार को दोनों अंचलों के अंचल अधिकारी गांव पहुंचे थे। अधिकारियों के पहुंचने पर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। उन्होंने अधिकारियों को भूमि निरीक्षण करने से रोक दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल बुलाया गया, लेकिन ग्रामीणों ने पुलिस की भी बात नहीं मानी और अपनी मांगों पर अड़े रहे। ग्रामीणों का मानना, गांवों में पानी का गंभीर संकट पैदा हो जाएगा ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव के कुओं और चापानलों में अभी से ही पानी का स्तर नीचे चला गया है। उनका मानना है कि नदी में इंटक वेल के निर्माण और डीप बोरिंग से आसपास के गांवों में पानी का गंभीर संकट पैदा हो जाएगा। इससे भविष्य में सिंचाई तो दूर, पीने के पानी के लिए भी ग्रामीणों को तरसना पड़ेगा। घंटों चली बहस के बाद अंचल अधिकारियों को निराश होकर लौटना पड़ा। ग्रामीणों ने अधिकारियों से दो दिनों की मोहलत मांगी है ताकि वे अपनी मांगों को लिखित रूप में प्रस्तुत कर सकें। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि जिला प्रशासन उनकी बातों को मानता है, तभी वे योजना को आगे बढ़ने देंगे, अन्यथा इसे लागू नहीं होने दिया जाएगा। इधर, जयनगर सीओ सारांश जैन ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा कोई भी वैध मांग अभी तक सामने नहीं आई है। उक्त गांव के कुछ लोग हैं, जो भोलीभाली जनता को गुमराह कर विकास कार्यों में बाधक बने हुए हैं। वाटर लेवल गिरने की बात पर उन्होंने कहा कि जिस कम्पनी ने यह कार्य लिया है, उसने डीवीसी से एक एकरारनामा किया है, जिसमें यह साफ साफ लिखा हुआ है कि उनके द्वारा वाटर लेवल को कर हाल में मेंटेन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों द्वारा दो दिनों का समय मांगा गया है ताकि वे अपनी मांगों को हमारे समक्ष रख सकें। उन्होंने कहा कि अगर ग्रामीणों की मांग जायज हुई तो उसे हर हाल में माना जाएगा, अन्यथा कार्य में अवरोध पैदा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


