किशनगंज जिला कार्यालय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा हाल ही में अधिसूचित ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले विनियम, 2026’ के प्रस्तावित प्रावधानों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में स्वर्ण समाज (सामान्य वर्ग) के हितों पर पड़ने वाले संभावित प्रतिकूल प्रभावों पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने इन नियमों को सवर्ण विरोधी बताते हुए इनमें संशोधन की मांग पर जोर दिया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि पूरे स्वर्ण समाज को एकजुट कर इस विधेयक में संशोधन की मांग को पुरजोर तरीके से उठाया जाएगा। इसी क्रम में, राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना द्वारा जल्द ही किशनगंज के जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर यूजीसी के इन नियमों का औपचारिक विरोध दर्ज कराने की योजना है। सवर्ण छात्रों को भेदभाव झेलना पड़ सकता है
वक्ताओं ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि नए नियमों में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा केवल अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) तक सीमित है। उन्होंने तर्क दिया कि सामान्य वर्ग के छात्रों को भी भेदभाव का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन उनके लिए कोई सुरक्षा या शिकायत निवारण का प्रावधान नहीं है। इसे असंवैधानिक और एकतरफा करार देते हुए चेतावनी दी गई कि यदि स्वर्ण समाज के हितों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को तेज किया जाएगा और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। संगठन के दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे
इस बैठक में राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के जिला अध्यक्ष रिंकू सिंह, जिला महामंत्री संजय सिंह, जिला सचिव राज किशोर सिंह, मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र सिंह, अभिमन्यु सिंह, युवा मोर्चा के हितेश सिंह, बादल सिंह, अभिषेक सिंह, राघवेंद्र दुबे और उपेंद्र सिंह सहित संगठन के दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि यूजीसी के इन नए नियमों, जिन्हें 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया गया था, के खिलाफ देशभर में सवर्ण संगठनों और छात्रों द्वारा विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और बिहार के कई जिलों में प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां इन नियमों को ‘काला कानून’ बताया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में भी इसकी वैधता को चुनौती दी गई है। किशनगंज जिला कार्यालय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा हाल ही में अधिसूचित ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले विनियम, 2026’ के प्रस्तावित प्रावधानों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में स्वर्ण समाज (सामान्य वर्ग) के हितों पर पड़ने वाले संभावित प्रतिकूल प्रभावों पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने इन नियमों को सवर्ण विरोधी बताते हुए इनमें संशोधन की मांग पर जोर दिया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि पूरे स्वर्ण समाज को एकजुट कर इस विधेयक में संशोधन की मांग को पुरजोर तरीके से उठाया जाएगा। इसी क्रम में, राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना द्वारा जल्द ही किशनगंज के जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर यूजीसी के इन नियमों का औपचारिक विरोध दर्ज कराने की योजना है। सवर्ण छात्रों को भेदभाव झेलना पड़ सकता है
वक्ताओं ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि नए नियमों में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा केवल अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) तक सीमित है। उन्होंने तर्क दिया कि सामान्य वर्ग के छात्रों को भी भेदभाव का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन उनके लिए कोई सुरक्षा या शिकायत निवारण का प्रावधान नहीं है। इसे असंवैधानिक और एकतरफा करार देते हुए चेतावनी दी गई कि यदि स्वर्ण समाज के हितों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को तेज किया जाएगा और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। संगठन के दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे
इस बैठक में राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के जिला अध्यक्ष रिंकू सिंह, जिला महामंत्री संजय सिंह, जिला सचिव राज किशोर सिंह, मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र सिंह, अभिमन्यु सिंह, युवा मोर्चा के हितेश सिंह, बादल सिंह, अभिषेक सिंह, राघवेंद्र दुबे और उपेंद्र सिंह सहित संगठन के दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि यूजीसी के इन नए नियमों, जिन्हें 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया गया था, के खिलाफ देशभर में सवर्ण संगठनों और छात्रों द्वारा विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और बिहार के कई जिलों में प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां इन नियमों को ‘काला कानून’ बताया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में भी इसकी वैधता को चुनौती दी गई है।


