सड़क सुरक्षा जागरूकता माह 2026 के तहत जिला परिवहन पदाधिकारी सुनंदा कुमारी के निर्देशानुसार औरंगाबाद में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। अलग-अलग स्कूल और महाविद्यालयों में इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों और युवाओं को यातायात नियमों, सड़क सुरक्षा संकेतकों और सुरक्षित व्यवहार के प्रति जागरूक करना रहा, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं को सार्वजनिक सड़कों पर लगाए जाने वाले अलग-अलग यातायात संकेतक चिन्हों की विस्तृत जानकारी दी गई। इनमें स्टॉप साइन, नो पार्किंग, नो एंट्री, स्पीड लिमिट, स्कूल अहेड, ज़ेब्रा क्रॉसिंग सहित अन्य महत्वपूर्ण संकेतकों के अर्थ और उनके पालन की आवश्यकता को सरल भाषा में समझाया गया। अधिकारियों ने बताया कि इन संकेतों का सही तरीके से पालन करने से न केवल सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है, बल्कि यातायात व्यवस्था भी सुचारु बनी रहती है। बच्चों के बीच संवाद-प्रश्नोत्तर सत्र का भी आयोजन विद्यार्थियों को दोपहिया गाड़ी चलाते समय हेलमेट पहनने और चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाने की अनिवार्यता के बारे में जानकारी दी गई। ओवरस्पीडिंग से होने वाले खतरों, नशे की हालत में गाड़ी चलाने के दुष्परिणामों और गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन के उपयोग से होने वाली दुर्घटनाओं पर भी विशेष रूप से जानकारी दी गई। छात्रों को सुरक्षित पैदल चलने के नियमों, सड़क पार करते समय ज़ेब्रा क्रॉसिंग के उपयोग और ट्रैफिक सिग्नल का पालन करने के तरीकों से भी अवगत कराया गया।जागरूकता कार्यक्रम के दौरान संवाद और प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी जिज्ञासाओं को अधिकारियों के सामने रखा। अधिकारियों ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का विस्तार से उत्तर देकर उन्हें व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से सड़क सुरक्षा के महत्व को समझाया। ट्रैफिक नियमों का पालन करना सामाजिक जिम्मेदारी जिला परिवहन पदाधिकारी सुनंदा कुमारी ने कहा कि सड़क सुरक्षा की आदतें बचपन से ही विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। यदि बच्चे और युवा यातायात नियमों का पालन करना सीखेंगे, तो भविष्य में वे जिम्मेदार और सुरक्षित नागरिक बनेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सड़क सुरक्षा केवल नियमों का पालन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है। जिला परिवहन कार्यालय की ओर से यह जानकारी दी गई कि सड़क सुरक्षा जागरूकता माह के तहत इस तरह के कार्यक्रम आगे भी जिले के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में लगातार आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक सड़क सुरक्षा का संदेश पहुंचाया जा सके और दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। सड़क सुरक्षा जागरूकता माह 2026 के तहत जिला परिवहन पदाधिकारी सुनंदा कुमारी के निर्देशानुसार औरंगाबाद में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। अलग-अलग स्कूल और महाविद्यालयों में इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों और युवाओं को यातायात नियमों, सड़क सुरक्षा संकेतकों और सुरक्षित व्यवहार के प्रति जागरूक करना रहा, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं को सार्वजनिक सड़कों पर लगाए जाने वाले अलग-अलग यातायात संकेतक चिन्हों की विस्तृत जानकारी दी गई। इनमें स्टॉप साइन, नो पार्किंग, नो एंट्री, स्पीड लिमिट, स्कूल अहेड, ज़ेब्रा क्रॉसिंग सहित अन्य महत्वपूर्ण संकेतकों के अर्थ और उनके पालन की आवश्यकता को सरल भाषा में समझाया गया। अधिकारियों ने बताया कि इन संकेतों का सही तरीके से पालन करने से न केवल सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है, बल्कि यातायात व्यवस्था भी सुचारु बनी रहती है। बच्चों के बीच संवाद-प्रश्नोत्तर सत्र का भी आयोजन विद्यार्थियों को दोपहिया गाड़ी चलाते समय हेलमेट पहनने और चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाने की अनिवार्यता के बारे में जानकारी दी गई। ओवरस्पीडिंग से होने वाले खतरों, नशे की हालत में गाड़ी चलाने के दुष्परिणामों और गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन के उपयोग से होने वाली दुर्घटनाओं पर भी विशेष रूप से जानकारी दी गई। छात्रों को सुरक्षित पैदल चलने के नियमों, सड़क पार करते समय ज़ेब्रा क्रॉसिंग के उपयोग और ट्रैफिक सिग्नल का पालन करने के तरीकों से भी अवगत कराया गया।जागरूकता कार्यक्रम के दौरान संवाद और प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी जिज्ञासाओं को अधिकारियों के सामने रखा। अधिकारियों ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का विस्तार से उत्तर देकर उन्हें व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से सड़क सुरक्षा के महत्व को समझाया। ट्रैफिक नियमों का पालन करना सामाजिक जिम्मेदारी जिला परिवहन पदाधिकारी सुनंदा कुमारी ने कहा कि सड़क सुरक्षा की आदतें बचपन से ही विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। यदि बच्चे और युवा यातायात नियमों का पालन करना सीखेंगे, तो भविष्य में वे जिम्मेदार और सुरक्षित नागरिक बनेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सड़क सुरक्षा केवल नियमों का पालन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है। जिला परिवहन कार्यालय की ओर से यह जानकारी दी गई कि सड़क सुरक्षा जागरूकता माह के तहत इस तरह के कार्यक्रम आगे भी जिले के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में लगातार आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक सड़क सुरक्षा का संदेश पहुंचाया जा सके और दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके।


