अररिया में ई-रिक्शा (टोटो) चालकों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। बुधवार को परमान नदी के किनारे स्थित बाबा जी कुटिया परिसर में ऑटो चालक संघ की एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में शहर में टोटो चालकों के सामने खड़ी बुनियादी समस्याओं, सरकार के नए फरमान और पुलिस के सख्त रवैये को लेकर गहन चर्चा हुई। करीब 100 से अधिक टोटो चालक इस बैठक में शामिल हुए, जो अपनी रोजी-रोटी को लेकर गहरी चिंता में दिखे। एनएच-एसएच पर प्रतिबंध से रास्ते बंद बैठक के दौरान संघ के सदस्यों ने बताया कि राज्य सरकार ने टोटो वाहनों का नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे पर संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। यह फैसला अररिया जैसे शहरों में टोटो चालकों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गया है। चालकों का कहना है कि अररिया शहर की भौगोलिक बनावट ही ऐसी है कि शहर का मुख्य हिस्सा एनएच-27 और स्टेट हाईवे से जुड़ा हुआ है। ऐसे में प्रतिबंध के बाद टोटो चालकों के पास चलने के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग ही नहीं बचा है। एक चालक ने कहा, “शहर की संकरी गलियों में टोटो ले जाना भी आसान नहीं है। अब हाईवे पर चलना मना है तो हम कमाई कहां से करें? परिवार का खर्च निकालना मुश्किल हो गया है।” टोटो स्टैंड की भारी कमी बैठक में शहर में टोटो स्टैंड और पार्किंग की व्यवस्था न होने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। चालकों ने बताया कि पूरे अररिया शहर में टोटो चालकों के लिए कोई निर्धारित स्टैंड नहीं है। मजबूरी में उन्हें सड़कों के किनारे ही खड़ा होकर सवारी का इंतजार करना पड़ता है। इससे एक ओर ट्रैफिक जाम की समस्या पैदा होती है, वहीं दूसरी ओर पुलिस कार्रवाई का खतरा भी बना रहता है। एक सदस्य ने कहा, “अगर प्रशासन हमें स्टैंड दे दे तो हम नियमों का पालन करेंगे। सड़क पर खड़े रहने से हमें भी परेशानी होती है, लेकिन हमारे पास कोई विकल्प नहीं है।”
पुलिस के व्यवहार को लेकर नाराजगी बैठक में कई टोटो चालकों ने पुलिस के रवैये पर भी नाराजगी जाहिर की। चालकों का आरोप है कि पुलिसकर्मी अक्सर बिना वजह डांट-फटकार करते हैं, भगा देते हैं या भारी जुर्माना वसूलते हैं। संघ के सदस्यों ने साफ कहा कि वे कानून के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें सम्मानजनक व्यवहार चाहिए। एक चालक ने कहा, “हम अपराधी नहीं हैं। मेहनत-मजदूरी करके परिवार पालते हैं। बेवजह की सख्ती से हमारा मनोबल टूट रहा है।” लोन की किस्त बन गई सबसे बड़ी चिंता आर्थिक संकट भी टोटो चालकों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। बैठक में कई सदस्यों ने बताया कि उन्होंने बैंक या फाइनेंस कंपनियों से लोन लेकर टोटो खरीदा है।
प्रतिबंध और जुर्माने के कारण कमाई घटने से अब लोन की किस्त चुकाना मुश्किल हो गया है। बैंक का दबाव लगातार बढ़ रहा है। एक चालक ने कहा, “अगर यही हाल रहा तो हम सड़क पर आ जाएंगे। किस्त नहीं देने पर गाड़ी जब्त होने का डर सता रहा है।” आंदोलन की चेतावनी बैठक में यह निर्णय लिया गया कि टोटो चालक संघ जल्द ही जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी मांगें रखेगा। इसमें टोटो स्टैंड का आवंटन, प्रतिबंध में व्यवहारिक छूट और पुलिस के व्यवहार में सुधार की मांग शामिल होगी। संघ ने चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो धरना-प्रदर्शन और आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। संघ अध्यक्ष शत्रुघ्न पासवान ने कहा, “हम मजदूर वर्ग से आते हैं। टोटो शहर की जीवनरेखा है। सरकार को हमारी पीड़ा समझनी होगी।” वहीं सह-आयोजक प्रवीण कुमार ने कहा कि बिना ठोस कदम के आंदोलन और तेज किया जाएगा। छोटे शहरों में सस्ता परिवहन उपलब्ध कराने वाले टोटो चालक आज नीतिगत उपेक्षा का शिकार हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन उनकी समस्याओं पर कब तक ध्यान देता है। अररिया में ई-रिक्शा (टोटो) चालकों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। बुधवार को परमान नदी के किनारे स्थित बाबा जी कुटिया परिसर में ऑटो चालक संघ की एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में शहर में टोटो चालकों के सामने खड़ी बुनियादी समस्याओं, सरकार के नए फरमान और पुलिस के सख्त रवैये को लेकर गहन चर्चा हुई। करीब 100 से अधिक टोटो चालक इस बैठक में शामिल हुए, जो अपनी रोजी-रोटी को लेकर गहरी चिंता में दिखे। एनएच-एसएच पर प्रतिबंध से रास्ते बंद बैठक के दौरान संघ के सदस्यों ने बताया कि राज्य सरकार ने टोटो वाहनों का नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे पर संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। यह फैसला अररिया जैसे शहरों में टोटो चालकों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गया है। चालकों का कहना है कि अररिया शहर की भौगोलिक बनावट ही ऐसी है कि शहर का मुख्य हिस्सा एनएच-27 और स्टेट हाईवे से जुड़ा हुआ है। ऐसे में प्रतिबंध के बाद टोटो चालकों के पास चलने के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग ही नहीं बचा है। एक चालक ने कहा, “शहर की संकरी गलियों में टोटो ले जाना भी आसान नहीं है। अब हाईवे पर चलना मना है तो हम कमाई कहां से करें? परिवार का खर्च निकालना मुश्किल हो गया है।” टोटो स्टैंड की भारी कमी बैठक में शहर में टोटो स्टैंड और पार्किंग की व्यवस्था न होने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। चालकों ने बताया कि पूरे अररिया शहर में टोटो चालकों के लिए कोई निर्धारित स्टैंड नहीं है। मजबूरी में उन्हें सड़कों के किनारे ही खड़ा होकर सवारी का इंतजार करना पड़ता है। इससे एक ओर ट्रैफिक जाम की समस्या पैदा होती है, वहीं दूसरी ओर पुलिस कार्रवाई का खतरा भी बना रहता है। एक सदस्य ने कहा, “अगर प्रशासन हमें स्टैंड दे दे तो हम नियमों का पालन करेंगे। सड़क पर खड़े रहने से हमें भी परेशानी होती है, लेकिन हमारे पास कोई विकल्प नहीं है।”
पुलिस के व्यवहार को लेकर नाराजगी बैठक में कई टोटो चालकों ने पुलिस के रवैये पर भी नाराजगी जाहिर की। चालकों का आरोप है कि पुलिसकर्मी अक्सर बिना वजह डांट-फटकार करते हैं, भगा देते हैं या भारी जुर्माना वसूलते हैं। संघ के सदस्यों ने साफ कहा कि वे कानून के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें सम्मानजनक व्यवहार चाहिए। एक चालक ने कहा, “हम अपराधी नहीं हैं। मेहनत-मजदूरी करके परिवार पालते हैं। बेवजह की सख्ती से हमारा मनोबल टूट रहा है।” लोन की किस्त बन गई सबसे बड़ी चिंता आर्थिक संकट भी टोटो चालकों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। बैठक में कई सदस्यों ने बताया कि उन्होंने बैंक या फाइनेंस कंपनियों से लोन लेकर टोटो खरीदा है।
प्रतिबंध और जुर्माने के कारण कमाई घटने से अब लोन की किस्त चुकाना मुश्किल हो गया है। बैंक का दबाव लगातार बढ़ रहा है। एक चालक ने कहा, “अगर यही हाल रहा तो हम सड़क पर आ जाएंगे। किस्त नहीं देने पर गाड़ी जब्त होने का डर सता रहा है।” आंदोलन की चेतावनी बैठक में यह निर्णय लिया गया कि टोटो चालक संघ जल्द ही जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी मांगें रखेगा। इसमें टोटो स्टैंड का आवंटन, प्रतिबंध में व्यवहारिक छूट और पुलिस के व्यवहार में सुधार की मांग शामिल होगी। संघ ने चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो धरना-प्रदर्शन और आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। संघ अध्यक्ष शत्रुघ्न पासवान ने कहा, “हम मजदूर वर्ग से आते हैं। टोटो शहर की जीवनरेखा है। सरकार को हमारी पीड़ा समझनी होगी।” वहीं सह-आयोजक प्रवीण कुमार ने कहा कि बिना ठोस कदम के आंदोलन और तेज किया जाएगा। छोटे शहरों में सस्ता परिवहन उपलब्ध कराने वाले टोटो चालक आज नीतिगत उपेक्षा का शिकार हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन उनकी समस्याओं पर कब तक ध्यान देता है।


