आपदा से बचाव की बड़ी तैयारी:बिहार में 16 हजार से ज्यादा युवा, 4 हजार शिक्षक और हजारों बच्चों को मिला प्रशिक्षण

आपदा से बचाव की बड़ी तैयारी:बिहार में 16 हजार से ज्यादा युवा, 4 हजार शिक्षक और हजारों बच्चों को मिला प्रशिक्षण

बिहार सरकार के निर्देश के अनुसार हर महीने के आखिरी बुधवार को सभी विभाग अपने-अपने कामकाज की जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से देते हैं। इसी क्रम में आज सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव मोहम्मद गफ्फार ने बताया कि बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) द्वारा राज्यभर में आपदा से बचाव को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल होगा तैयार उन्होंने बताया कि दिव्यांग बच्चों को आपदाओं से सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया गया है। इसके तहत दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों और शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। अब तक करीब 1352 दिव्यांग बच्चों को तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण देकर आपदा से बचाव की जानकारी दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के सहयोग से राज्य के सभी सरकारी, निजी स्कूल और मदरसों में यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों को आपदा के खतरे पहचानने और उससे बचाव के उपाय सिखाना है। वर्ष 2025 में 4363 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें 1057 मध्य विद्यालय और 3306 माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक शामिल हैं। साथ ही 1005 मदरसों की फोकल शिक्षिकाओं को भी प्रशिक्षण दिया गया। सुरक्षित तैराकी कार्यक्रम की शुरुआत डूबने से होने वाली मौतों को रोकने के लिए सुरक्षित तैराकी कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक डूबने से होने वाली मौतों में 50 प्रतिशत की कमी लाना है। इस कार्यक्रम के तहत बच्चों, किशोरों और युवाओं को तैराकी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक 16374 युवकों और युवतियों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा 96 मास्टर ट्रेनर्स भी तैयार किए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आपदा जागरूकता के लिए 5 जिलों के 483 ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य समन्वयकों को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। वहीं 2241 आंगनवाड़ी सेविकाओं और 482 स्वास्थ्य कर्मियों को भी आपदा प्रबंधन से जुड़ा प्रशिक्षण प्रदान किया गया। शहरी झुग्गी-झोपड़ियों में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए पटना में करीब 5000 मजदूर और श्रमिक वर्ग के लोगों को जागरूक किया गया। अंत में सचिव ने बताया कि जीविका दीदियों के लिए भी आपदा जोखिम न्यूनीकरण से जुड़े चार विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए गए हैं, ताकि वे आपदा के समय बेहतर भूमिका निभा सकें। बिहार सरकार के निर्देश के अनुसार हर महीने के आखिरी बुधवार को सभी विभाग अपने-अपने कामकाज की जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से देते हैं। इसी क्रम में आज सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव मोहम्मद गफ्फार ने बताया कि बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) द्वारा राज्यभर में आपदा से बचाव को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल होगा तैयार उन्होंने बताया कि दिव्यांग बच्चों को आपदाओं से सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया गया है। इसके तहत दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों और शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। अब तक करीब 1352 दिव्यांग बच्चों को तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण देकर आपदा से बचाव की जानकारी दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के सहयोग से राज्य के सभी सरकारी, निजी स्कूल और मदरसों में यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों को आपदा के खतरे पहचानने और उससे बचाव के उपाय सिखाना है। वर्ष 2025 में 4363 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें 1057 मध्य विद्यालय और 3306 माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक शामिल हैं। साथ ही 1005 मदरसों की फोकल शिक्षिकाओं को भी प्रशिक्षण दिया गया। सुरक्षित तैराकी कार्यक्रम की शुरुआत डूबने से होने वाली मौतों को रोकने के लिए सुरक्षित तैराकी कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक डूबने से होने वाली मौतों में 50 प्रतिशत की कमी लाना है। इस कार्यक्रम के तहत बच्चों, किशोरों और युवाओं को तैराकी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक 16374 युवकों और युवतियों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा 96 मास्टर ट्रेनर्स भी तैयार किए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आपदा जागरूकता के लिए 5 जिलों के 483 ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य समन्वयकों को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। वहीं 2241 आंगनवाड़ी सेविकाओं और 482 स्वास्थ्य कर्मियों को भी आपदा प्रबंधन से जुड़ा प्रशिक्षण प्रदान किया गया। शहरी झुग्गी-झोपड़ियों में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए पटना में करीब 5000 मजदूर और श्रमिक वर्ग के लोगों को जागरूक किया गया। अंत में सचिव ने बताया कि जीविका दीदियों के लिए भी आपदा जोखिम न्यूनीकरण से जुड़े चार विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए गए हैं, ताकि वे आपदा के समय बेहतर भूमिका निभा सकें।  

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