Arijit Singh Retirement : शोर, सफलता और संन्यास, अरिजीत की तरह ‘रिटायरमेंट’ लेना सही या गलत? एक्सपर्ट्स से जानिए

Arijit Singh Retirement : शोर, सफलता और संन्यास, अरिजीत की तरह ‘रिटायरमेंट’ लेना सही या गलत? एक्सपर्ट्स से जानिए

Arijit Singh Retirement Reason : प्रसिद्ध गायक अरिजीत सिंह ने प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास (Arijit Singh Retired As Playback Singer) लेकर ना जाने कितने संगीत प्रेमियों का दिल तोड़ दिया। करीब 15 साल का गायिकी का करियर, 400 गाने और सात सालों से लगातार टॉप पर बने हुए अरिजीत का यूं फैसला लेना हर किसीको हैरान कर रहा है! हम चाहने वालों को जो भी लगे लेकिन, अरिजीत ने ऐसा निर्णय क्यों लिया और वर्किंग लोगों को इस बात को समझने की आवश्यकता क्यों है? डॉ. पंकज टंडन (साइकेट्रिस्ट) और डॉ. चंद्र शेखर श्रीमाली (नेशनल करियर काउंसलर) से इससे जुड़ी तमाम बातों को समझेंगे।

अरिजीत का प्लेबैक सिंगिंग से अलविदा मैसेज

Arijit Singh Retired As Playback Singer
Photo – NotebookLM

अरिजीत ने प्लेबैक सिंगिंग से अलविदा लेते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा- “नमस्ते, आपको नए साल की शुभकामनाएं। इतने सालों तक मुझे सुनने वालों ने इतना प्यार दिया जिसके लिए शुक्रिया अदा करना चाहता हूं। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अब से मैं प्लेबैक वोकलिस्ट के तौर पर कोई नया असाइनमेंट (गाना) नहीं लूंगा। मैं इसे खत्म कर रहा हूं। यह एक शानदार सफर था।”

आगे उन्होंने लिखा है, “एक वजह यह थी कि मैं जल्दी बोर हो जाता हूं, इसलिए मैं एक ही गानों के अरेंजमेंट बदलता रहता हूं और उन्हें स्टेज पर परफॉर्म करता हूं। तो बात यह है, मैं बोर हो गया हूं मुझे जीने के लिए कुछ और संगीत करने की आवश्यकता है।”

अरिजीत सिंह का करियर ग्राफ

Arijit Singh career
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  • 2005 : म्यूजिकल सफर की शुरुआत फेम गुरुकुल में एक कंटेस्टेंट के तौर पर
  • 2011 : हिंदी मूवी में डेब्यू मर्डर 2 का गाना “फिर मोहब्बत” से किया था
  • 2013 : आशिकी 2 के गाने तुम ही हो ने उन्हें सुपरस्टार बनाया और पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला
  • दो फिल्मों का निर्देशन : बंगाली फिल्म ‘भालोबाशार रोजनामचा’ (2015) और ‘सिंपल नोट्स’ (2017)
  • 2025 : कला (गायन) के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा पद्म श्री सम्मान
  • अबतक लगभग हर भाषा के मिलाकर 400 गाने गाए

करियर या नौकरी में बोर होने का मतलब

करियर या नौकरी में बोर हो जाना, बर्नआउट होना, फ्रस्टेटेड हो जाना… ये सब बातें सुनने में बहुत हल्की लगती हैं। अधिकतर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में मनोचिकित्सक और करियर काउंसलर से ये समझना जरूरी है कि हमें क्या करना चाहिए।

डॉ. टंडन कहते हैं, करियर में बोर होना, बर्नआउट होना स्वभाविक है। हम लगातार एक ही काम करते हुए ऐसा हो सकते हैं। जैसे- हर दिन दाल-चावल या रोटी ही खाने को मिले तो खाना खाने का मूड नहीं हो पाता है। वैसे ही काम में भी ऐसा होता है। हमारी सोसाइटी में इस बात को हल्के में लिया जाता है। जबकि, ये आगे चलकर डिप्रेशन, हाइपरटेंशन, सुसाइडल थोट का आने जैसी गंभीर समस्या में बदल सकती है।

चेकलिस्ट: क्या आप भी ‘हसल कल्चर’ के जाल में फंस रहे हैं?

hustle culture trap
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यदि आपके साथ इनमें से 3 से ज्यादा चीजें हो रही हैं, तो यह रुकने और सोचने का समय है:

  • गिल्ट ट्रिप (Guilt Trip): क्या आप जब काम नहीं कर रहे होते या छुट्टी पर होते हैं, तो आपको अपराधबोध (Guilt) महसूस होता है?
  • नींद की कमी: क्या आप अपनी सफलता के लिए नींद और सेहत को दांव पर लगा रहे हैं?
  • हमेशा व्यस्त रहने का दिखावा: क्या आप बिना किसी ठोस नतीजे के भी खुद को व्यस्त दिखाने की कोशिश करते हैं?
  • हॉबीज का खत्म होना: क्या आपने अपने उन शौक को छोड़ दिया है जो आपको खुशी देते थे, क्योंकि आपको लगता है कि वे “उत्पादक” (Productive) नहीं हैं?
  • पहचान का संकट: क्या आपकी पूरी पहचान सिर्फ आपके ‘जॉब टाइटल’ या ‘सैलरी’ तक सीमित हो गई है?
  • तुलना का बोझ: क्या आप दूसरों की सोशल मीडिया ‘सफलता’ देखकर अपनी मेहनत को कम आंकते हैं?

वो आगे कहते हैं, आपको हसल कल्चर से पहचान करने के अलावा इस तरह से भी खुद का आकलन करें। अगर आप अपने काम को करते हुए ऊर्जावान, खुश और संतुष्ट नहीं महसूस कर पा रहे हैं। मतलब कि काम से दिमागी थकान, निराशा जैसे संकेत मिल रहे हैं तो सावधान हो जाएं। ये सही लक्षण नहीं हैं। पिछले कुछ सालों में मेरे पास ऐसे कई मरीज भी आए हैं। उनको हम कुछ निम्नलिखित सलाह देते हैं-

हसल कल्चर से बचने के उपाय (Solutions for Readers)

hustle culture trap
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  • जोमो – JOMO (Joy Of Missing Out): हर रेस का हिस्सा ना बनें
  • बाउंड्री जरूरी: काम और निजी जीवन के बीच एक लक्ष्मण रेखा बनाएं
  • स्लो जिएं: अरिजीत की तरह कभी-कभी पीछे हटना और जीवन को धीमी गति से जीना जरूरी

वीक ऑफ पर छुट्टी का आनंद लें

हमारे यहां हसल कल्चर यानी खूब काम करो, मरते दम तक काम करना और इसको सराहना आदि का ट्रेंड है। इसलिए, वीक ऑफ पर कई लोग काम करते हैं। जबकि, इस दिन आप जो काम करते हैं उससे संबंधित वर्क ना करें। इसका मतलब ये भी नहीं है कि दिनभर सोए रहें या लेट से जागें। आप अपने डेली ऑफिस वर्क के अलावा वो काम करें जिससे खुशी मिले। जैसे- कहीं घूमने फिरने चले जाएं, कुछ खाना बनाएं, किताबे पढ़ें कुछ लिखें या जो आपको पसंद हो वो करें।

करियर से लंबा ब्रेक कब लें?

इस पर उनका कहना है, करियर से ब्रेक हर व्यक्ति अपनी इच्छानुसार ले सकता है। ये फैसला खुद का होना चाहिए। अगर आपको बिल्कुल काम करने का मन नहीं है, आपको सिर्फ अकेलापन अच्छा लग रहो हो… ये डिप्रेशन के मुख्य लक्षण हैं। ऐसे में किसी मनोचिकित्सक से मिल लें। कुछ दिनों के लिए छुट्टी लेकर अपने मन की करें। अगर आप अकेलेपन को बढ़ावा देंगे तो ये आत्महत्या जैसी आग में आपको धकेल सकता है।

जॉब छोड़ने का फैसला कब लें?

डॉ. श्रीमाली का मानना है, आपको काम चुनते समय ही ये तय करना चाहिए कि आपके दिल के लायक ये है या नहीं। इसके लिए कई वैज्ञानिक मैथड आ चुके हैं। आप करियर काउंसलर से मिलकर ये चुन सकते हैं। अगर आप अचानक नौकरी छोड़ने का फैसला लेते हैं तो मिड लाइफ क्राइसिस जैसी परिस्थिति आ सकती है। इससे आप तनाव से बचने की बजाय अधिक तनाव व जीवन की समस्याओं से घिर सकते हैं। इससे बचने के लिए आपको हमेशा बैकअप प्लान तैयार रखना चाहिए।

वो आगे कहते हैं, जिस तरह अरिजीत ने प्लेबैक को छोड़ने के बाद शास्त्रीय संगीत की ओर कदम बढ़ाए हैं। ये उनका बैकअप प्लान है। आप भी इसी तरह से योजना बनाने के बाद आगे का फैसला करें। अगर बैकअप प्लान है तो फिर आप काम से बोर होकर या बर्नआउट होने पर जॉब छोड़ने का फैसला लेकर आगे का जीवन खुशी से जीने की कोशिश कर सकते हैं।

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