UGC विवाद पर फूटा मनोज मुंतशिर का गुस्सा, बोले-अगर इस देश में जातियां जीत गईं तो…

UGC विवाद पर फूटा मनोज मुंतशिर का गुस्सा, बोले-अगर इस देश में जातियां जीत गईं तो…

Manoj Muntashir  On UGC Controversy:  इन दिनों देश में जिस बात का हल्ला है वह कुछ और नहीं बल्कि UGC विवाद है। जी हां विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियम आने पर बड़े-बड़े सितारे अपनी राय रख रहे हैं। कोई इसके पक्ष में है तो कोई इसका विरोध कर रहा है। अब इसी लिस्ट में मशहूर गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर का नाम भी जुड़ गया है। मनोज मुंतशिर ऐसे टॉपिक पर बेबाक बयानबाजी करते नजर आते हैं। इस बार भी यही हुआ। उन्होंने इस विवाद पर अपनी भड़ास निकाली और सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो संदेश जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस फैसले को वापस लेने की गुहार लगाई। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि अब समय आ गया है जब हमें जातियों को विदा कर देना चाहिए।

UGC विवाद पर मनोज मुंतशिर का फूटा गुस्सा (Manoj Muntashir On UGC Controversy)

28 जनवरी की सुबह अपने ‘X’ (ट्विटर) हैंडल पर शेयर किए गए 39 सेकंड के वीडियो में मनोज मुंतशिर काफी गंभीर नजर आए। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा, “अगर किसी बाग में एक पौधा छोटा रह गया, तो इसका मतलब यह तो नहीं कि सुरक्षा और समानता के नाम पर बाकी बड़े पौधों को ऊपर से काट दिया जाए।”

प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए उन्होंने आगे कहा, “आप 140 करोड़ देशवासियों के लिए पिता समान हैं। एक बच्चे को खुश करने के लिए दूसरे को बेवजह थप्पड़ मत मारिए। आपकी ममता पर हम सबका बराबर अधिकार है।” मुंतशिर ने UGC को काला कानून कहा और बोले कि इसे वापस ले लीजिए, हमारी एकता को कमजोर होने से बचा लीजिए। अगर इस देश में जातियां जीत गईं, तो भारत हार जाएगा।”

क्या है UGC का विवादित ‘इक्विटी सेल’ नियम? (What Is the UGC Controversy)

दरअसल, UGC ने हाल ही में एक नया दिशा-निर्देश जारी किया है। इसके तहत सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह की यूनिवर्सिटीज में एक ‘इक्विटी सेल’ (Equity Cell) बनाई जाएगी। यह कमेटी उन छात्रों की शिकायतों की सुनवाई करेगी जिनके साथ धर्म, जाति, नस्ल, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव हुआ हो।

विवाद की असली जड़? (UGC introduces new equity regulations for higher education)

विवाद की असली जड़ यह है कि जनरल कैटेगरी (सामान्य वर्ग) के छात्रों को इस कमेटी के दायरे से बाहर रखा गया है। इसी को लेकर सामान्य वर्ग के छात्र और मनोज मुंतशिर जैसे कई लोग इसका विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि केवल एक पक्ष के लिए ऐसी कमेटी बनाना भेदभावपूर्ण है और इसका इस्तेमाल जनरल कैटेगरी के छात्रों के खिलाफ झूठे आरोप लगाने या उन्हें परेशान करने के लिए किया जा सकता है।

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