यमुनानगर में मंगलवार को यूजीसी (UGC) एक्ट के विरोध में सवर्ण समाज का जोरदार और उग्र प्रदर्शन देखने को मिला। राष्ट्रीय सवर्ण समाज मोर्चा के आह्वान पर भारी संख्या में समाज के लोग नेहरू पार्क में एकत्रित हुए, जहां उन्होंने मानव श्रृंखला बनाकर इस कानून के खिलाफ एकजुटता और आक्रोश का प्रदर्शन किया। नेहरू पार्क में एकत्रित होने के बाद प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी एक्ट को सवर्ण समाज के खिलाफ और समाज को तोड़ने वाला कानून बताते हुए जमकर नारेबाजी की। इसके बाद सभी प्रदर्शनकारी रोष मार्च निकालते हुए यमुनानगर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा के निवास की ओर रवाना हुए। विधायक आवास पर हनुमान चालीसा, नहीं मिले विधायक तो बढ़ा आक्रोश जब प्रदर्शनकारी विधायक के निवास पर पहुंचे तो वहां विधायक घनश्याम दास अरोड़ा मौजूद नहीं मिले, जिससे प्रदर्शनकारियों में नाराजगी और बढ़ गई। नाराज सवर्ण समाज के लोगों ने विधायक आवास के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद प्रदर्शनकारी करीब एक किलोमीटर तक पैदल मार्च करते हुए विधायक के कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए यूजीसी एक्ट को तुरंत वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान दो गुटों में बंटे प्रदर्शनकारी प्रदर्शन के दौरान उस समय स्थिति कुछ तनावपूर्ण हो गई जब सवर्ण समाज के प्रदर्शनकारी दो गुटों में बंटते नजर आए। एक गुट जहां सिर्फ यूजीसी एक्ट के विरोध में नारेबाजी कर रहा था। वहीं दूसरा गुट सीधे तौर पर भाजपा सरकार के खिलाफ नारे लगाता नजर आया। भाजपा से जुड़े कुछ लोगों ने सरकार विरोधी नारों पर आपत्ति जताई, लेकिन बाद में सभी प्रदर्शनकारी एकजुट होकर सरकार के खिलाफ रोष मार्च निकालते हुए विधायक कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। ‘राजतिलक कर सकता है तो राज छीन भी सकता है’—प्रदर्शनकारियों की चेतावनी प्रदर्शनकारियों ने विधायक से साफ शब्दों में कहा कि सवर्ण समाज यदि किसी को राजतिलक कर सकता है, तो राज छीनने की ताकत भी रखता है। प्रदर्शनकारियों ने चेताया कि यदि इस कानून को वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। विधायक घनश्याम दास अरोड़ा ने प्रदर्शनकारियों का ज्ञापन स्वीकार किया और आश्वासन दिया कि वह अपनी टिप्पणी के साथ यह ज्ञापन प्रधानमंत्री तक पहुंचाएंगे। यूजीसी एक्ट समाज को तोड़ने वाला कानून—सुंदर राणा राष्ट्रीय सवर्ण समाज मोर्चा के नेता सुंदर प्रताप सिंह राणा ने कहा कि देश में जो यूजीसी कानून थोपा गया है, वह समाज को जोड़ने वाला नहीं बल्कि फाड़ने वाला कानून है। इससे समाज अलग-अलग वर्गों में बंट जाएगा। उन्होंने कहा कि 2012 से पहले कानून में यह प्रावधान था कि किसी भी आरोप की पहले जांच होगी और बाद में गिरफ्तारी, लेकिन नए संशोधन में पहले गिरफ्तारी और बाद में जांच का प्रावधान कर दिया गया है, जो पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। सवर्ण समाज से पंगा लेने वालों की राजनीति ज्यादा दिन नहीं चलती सुंदर प्रताप सिंह राणा ने सवाल उठाया कि अगर कोई व्यक्ति किसी सवर्ण के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराता है और बाद में वह झूठा साबित होता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए? उन्होंने इस कानून को “फूट डालो और राज करो की नीति” करार देते हुए कहा कि इससे कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में गुटबाजी बढ़ेगी और सामाजिक सौहार्द बिगड़ेगा। प्रताप राणा ने चेतावनी देते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि सवर्ण समाज से पंगा लेने वालों की राजनीति ज्यादा दिन नहीं चलती। अगर सरकार ने इस कानून को वापस नहीं लिया, तो समाज संसद तक संघर्ष करेगा। पुलिस रही मुस्तैद, स्थिति रही नियंत्रण में भगवान श्री परशुरम सेना संघ ट्रस्ट के प्रदेशाध्यक्ष कपिल पंडित ने कहा कि इस कानून के आने से भाइचारा समाप्त हो रहा है। सवर्ण समाज में भय का माहौल व्याप्त है। हिंदू सजाज जिसे एक जुट करने का लगातार प्रयास भाजपा सरकार कर रही है इस कानून से वह बंट जाएगा, जोकि समाज के लिए घातक साबित होगा। इस मौके पर योगेश शर्मा, पुरुषोत्मलाल, बालकृष्ण भट्ट, सुरेश शर्मा, संजय शर्मा व नितिन शर्मा सहित काफी मात्रा में समाज के लोग मौजूद रहे। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहा। विधायक आवास और कार्यालय के आसपास पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और किसी प्रकार की अप्रिय घटना सामने नहीं आई।


