सप्ताह में पांच दिन वर्किंग डे सहित अन्य लंबित मांगों को लेकर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर सोमवार को बैंक कर्मियों ने हड़ताल कर दी, जिससे जिले की बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। लास्ट सैटरडे, रविवार और गणतंत्र दिवस की छुट्टियों के कारण पहले ही तीन दिनों से बैंक बंद थे। ऐसे में हड़ताल के चलते लगातार चौथे दिन भी बैंक नहीं खुलने से आम लोगों की परेशानी काफी बढ़ गई। जिले भर के सरकारी बैंकों-एसबीआई, पीएनबी, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक सहित अन्य में ताले लटके रहे। निजी बैंकों की संख्या जिले में सीमित है और 80 प्रतिशत से अधिक बैंकिंग सेवाएं सरकारी बैंकों पर निर्भर हैं। ऐसे में सरकारी बैंकों के पूरी तरह बंद रहने से बैंकिंग सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं। हड़ताल में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी संगठनों के नौ घटक दलों के बैंककर्मी शामिल रहे। बैंक हड़ताल के कारण आम उपभोक्ताओं और व्यापारियों को खासा संकट झेलना पड़ा। व्यापारिक लेनदेन प्रभावित रहा। शादी-विवाह का सीजन होने के बावजूद बाजार में नकदी की किल्लत देखी गई। बैंकों से कैश नहीं निकलने के कारण एटीएम भी खाली रहे, जिससे लोग इधर-उधर भटकते नजर आए। चेक क्लीयरेंस नहीं हो सका और नकदी आधारित कारोबार ठप पड़ गया। सरकार पर वादाखिलाफी का लगाया आरोप नवादा जिला एआईबीईए के महासचिव सौरभ रंजन ने बताया कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस और इंडियन बैंक एसोसिएशन के बीच पहले ही सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग सेवा को लेकर समझौता हो चुका है, लेकिन अब तक केंद्र सरकार की अनुमति नहीं मिल सकी है। उन्होंने बताया कि 22 और 23 जनवरी 2026 को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस और डीएफएस के बीच बैठक भी हुई, लेकिन कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकलने के कारण बैंक कर्मियों को हड़ताल पर जाना पड़ा। इस आंदोलन में केनरा बैंक से सौरभ, रंजीत, कुतुबुद्दीन, आदित्य, मधुसूदन; बैंक ऑफ इंडिया से गौरव, विनोद; पीएनबी से कार्यानंद, हरेंद्र तथा एसबीआई से समरजीत सहित अन्य बैंककर्मी शामिल रहे। सप्ताह में पांच दिन वर्किंग डे सहित अन्य लंबित मांगों को लेकर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर सोमवार को बैंक कर्मियों ने हड़ताल कर दी, जिससे जिले की बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। लास्ट सैटरडे, रविवार और गणतंत्र दिवस की छुट्टियों के कारण पहले ही तीन दिनों से बैंक बंद थे। ऐसे में हड़ताल के चलते लगातार चौथे दिन भी बैंक नहीं खुलने से आम लोगों की परेशानी काफी बढ़ गई। जिले भर के सरकारी बैंकों-एसबीआई, पीएनबी, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक सहित अन्य में ताले लटके रहे। निजी बैंकों की संख्या जिले में सीमित है और 80 प्रतिशत से अधिक बैंकिंग सेवाएं सरकारी बैंकों पर निर्भर हैं। ऐसे में सरकारी बैंकों के पूरी तरह बंद रहने से बैंकिंग सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं। हड़ताल में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी संगठनों के नौ घटक दलों के बैंककर्मी शामिल रहे। बैंक हड़ताल के कारण आम उपभोक्ताओं और व्यापारियों को खासा संकट झेलना पड़ा। व्यापारिक लेनदेन प्रभावित रहा। शादी-विवाह का सीजन होने के बावजूद बाजार में नकदी की किल्लत देखी गई। बैंकों से कैश नहीं निकलने के कारण एटीएम भी खाली रहे, जिससे लोग इधर-उधर भटकते नजर आए। चेक क्लीयरेंस नहीं हो सका और नकदी आधारित कारोबार ठप पड़ गया। सरकार पर वादाखिलाफी का लगाया आरोप नवादा जिला एआईबीईए के महासचिव सौरभ रंजन ने बताया कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस और इंडियन बैंक एसोसिएशन के बीच पहले ही सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग सेवा को लेकर समझौता हो चुका है, लेकिन अब तक केंद्र सरकार की अनुमति नहीं मिल सकी है। उन्होंने बताया कि 22 और 23 जनवरी 2026 को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस और डीएफएस के बीच बैठक भी हुई, लेकिन कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकलने के कारण बैंक कर्मियों को हड़ताल पर जाना पड़ा। इस आंदोलन में केनरा बैंक से सौरभ, रंजीत, कुतुबुद्दीन, आदित्य, मधुसूदन; बैंक ऑफ इंडिया से गौरव, विनोद; पीएनबी से कार्यानंद, हरेंद्र तथा एसबीआई से समरजीत सहित अन्य बैंककर्मी शामिल रहे।


